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रक्तदान शिविर

रक्तदान शिविर लगाने की तैयारी चल रही थी। छुट भैया नेता जोर शोर से प्रचार प्रसार कर रहे थे। सभी से अपील की जा रही थी कि ज्यादा से ज्यादा लोग रक्तदान करें जिससे अधिक से अधिक लोगों का जीवन बच सके। स्कूल के बच्चे पोस्टर बनाकर रैली निकालने की तैयारी कर रहे थे। नेताजी…

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अरुणा पाठक आभा, रीवा (अनुज्ञा) दिल्ली में सम्मानित

ट्रू मीडिया गौरव सम्मान, उत्कृष्ट साक्षात्कारकर्ता, सम्मान से अरुणा पाठक आभा, रीवा (अनुज्ञा)दिल्ली में सम्मानित।सोशल एवं मोटिवेशनल ट्रस्ट द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह सम्मान समारोह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया नौअप्रैल को जिसमें तेरह पुस्तकों का विमोचन किया गया। कवि कवयित्रीयों को सम्मानित किया गया । जिसमें दिल्ली के वरिष्ठ साहित्यकारोकी उपस्थिति थी। आदरणीय…

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फ़िट इँडिया-हिट इँडिया

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होए कबीर जी के दोहे में धैर्यशीलता का कितना खूबसूरत सँदेश छिपा है।बात केवल इतनी सी है कि किसी भी सोच विचार के बीज को बो देने भर से फ़सल के इँतज़ार में हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाने भर…

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(कविता) विचार धारा

अपनी विचार धारादूसरों पर थोपते -थोपतेमर जाता है आदमी!आखिर !मरने के लिए आये हैतो मर जाते हैं,छोड़कर अपनी विचार धारावो !विचार धारासुलगती रहती है समाज मेंअंधी होकरक्योंकि ढोने वालेएक्का दुक्कापैदा होते रहते हैंयुगों युगों सेऔर मृत तस्वीर परचढाते रहते हैं फूलउस विचार धारा को जिंदा रखने के लिए।लेकिन दूसरे विचार धारा को नहीं मानतेचाहे उत्तम…

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राजनीतिक सफरनामा : चुनाव आयोग पर उठते सवाल

कुशलेन्द्र श्रीवास्तवभारत का चुनाव आयोग चर्चाओं मेें हैं, चुनाव आयोग से ज्यादा चर्चाओं में ज्ञानेश कुमार हैं जो मुख्य चुनाव अधिकारी हैं । जब से वे मुख्य चुनाव अधिकारी बने हैं तब से ही वे चर्चाओं मेें हैं । कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली होती ही ऐसी है कि वे विवाद को जन्म देते रहते हैं…

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आजकल के स्कूलो ने ही किसी को दलित तो किसी को सवर्ण  बना डाला….

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  हममें से जितने भी लोग नब्बे के दशक में सरकारी या निजी स्कूलों में पढ़े हैं उनको याद होगा सुबह के  समय असेंबली की शुरुआत प्रार्थना से और राष्ट्गान से होता था और समापन पीटी से होती थी और अंत में सभी शिक्षकों का चरण स्पर्श…

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फागुन लाया रंग की बौछार

फागुन लाया रंग की बौछार भरी पिचकारी गुलाबी हरी लाल टेसू  फूल भरी नारंगी थाल खेतन सजे सरसों पीला हार । सिया राम सब रंगे गुलाल खेले जन अवध प्रभु निहारसरयू किनारे लंबी कतार ढोल नगाड़े मृदंग झंकार। कान्हा पर हुई फूलों की बरसात ग्वाल बाल सखियां राधा का भरा प्यारछेड़खानी लठियन  लड्डूअन न्योछार मची ब्रज धूम होली त्यौहार। काशी में भोले…

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छिलका आन्दोलन

स्वच्छ वातावरण, जैविक खेती, हृष्ट पुष्ट गायों एवं पशुओं के लिए एक सजग प्रयास “छिलका आन्दोलन” | हर वर्ग, जाती, धर्म, गरीब, अमीर, प्रत्येक संगठन, सामाजिक संस्थाओं और हर जन की भागीदारी का एक प्रयास स्वस्थ, स्वच्छ, सुन्दरतम भारत के लिए| भारतीय संस्कृति प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठसंस्कृति है | भारतीय धर्म और ज्ञान विज्ञान विश्व में…

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दरिया ए इश्क-इब़ादत की मुश्क

कविता मल्होत्रा प्रेम है दरिया आग का,उल्टी है इसकी धार जो उतरा सो डूब गया,जो डूब गया वो पार ✍️ अपनी दृष्टि को विस्तार देकर ही सृष्टि के आधार को समझना सँभव है, वर्ना दृष्टिकोण के अभाव में तो शिक्षित लोग भी अशिक्षितों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। ✍️ जैसे तुम सबके वैसे ही मैं…

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अब नहीं रही

घुमंतु परिवार में भीख के रोजगार में, वह चलने से लाचार टांगें  अब नहीं रहीं। रीते घड़े की पहेलियां दाना खोजती उंगलियां,  वह पेट की पीड़ाएं अब नहीं रहीं। दिन में लकड़ी बीनना रात के लिए सहेजना,  वो आग तापती रातें  अब नहीं रहीं। कलुआ कई दिनों से आया नहीं शहर से,  वो बेटे को…

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