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हरियाणा सरकार के बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में स्मारक निर्माण की दिशा में बढ़ते कदम

मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन ऐसे कम ही होते हैं जो शोषितों के अधिकारों और न्याय के लिए संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए किसी भी बलिदान के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसे ही एक योद्धा लक्ष्मण दास/माधोदास (बाबा बंदा सिंह बहादुर) का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में राम देव के घर…

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योग आत्मा के परमात्मा से जुड़ाव का संयोग

आत्मा का परमात्मा से जुड़ाव ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत पड़ाव पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जहाँ आजकल हर तरफ़ असहिष्णुता और हिंसा का शोरगुल है।जिसके परिणामस्वरूप हरि जनों की मानसिक स्थिति कंपित हो रही है। गोलियों से भूना किसी ने और किसी ने बोलियों से धुन डाला कैसे हज़म करेगी मानव जाति अतृप्त रूहों के…

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इमरती बड़ी चुलबुली… (बाल-कविता )

इमरती है बड़ी चुलबुली सोनपपड़ी अकड़ी अकड़ी कलाकंद दे रहा आनंद बरफी बिफरे करे फंद रसगुल्ला कर रहे हल्ला लड्डू ने झाड़ा है पल्ला मक्खनबड़ा रहते हैं मौन खीरमोहन की चली पौन जलेबी रस में डूबी पड़ी रबड़ी बात करे तगड़ी मोहनभोग लगे अच्छे गूँजी दे रही है गच्चे घर अंदर इनके हाँके हैं बाहर…

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माया मिली ना राम, बन गए आंदोलनजीवी !

खद्दर डाल कर ,दरी बिछाकर बिसलेरी का जल पीने वाले देश के परजीवियों को प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन जीवी कह दिया । अखिलेश यादव भी खुद को रोक नहीं पाए और खुद को लपेटे में लेकर भाजपा को चन्दा जीवी कह दिया । आप के भगवंत मान ने तो टूल्ल होकर रक्तजीवी कह दिया और…

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हिंदी भाषा की उत्पत्ति एवं विकास एवं अन्य भाषाओँ का प्रभाव (हिंदी दिवस पर विशेष )

डॉ सुशील शर्मा प्रारम्भिक अवस्था में मानव ने अपने भावों-विचारों को अपने अंग संकेतों से प्रषित किया होगा बाद में इसमें जब कठिनाई आने लगी तो सभी मनुष्यों ने सामाजिक समझौते के आधार पर विभिन्न भावों, विचारों और पदार्थों के लिए अनेक ध्वन्यात्मक संकेत निश्चित कर लिए। यह कार्य सभी मनुष्यों ने एकत्र होकर विचार…

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अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था स्व. हरविंदर सिंह लबाना जी की स्मृति में कवि सम्मेलन का आयोजन

४ अक्टूबर २९२१, को “अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था” दिल्ली के तत्वावधान में समूह की राष्ट्रीय अध्यक्षा आ० Madhu Madhubala Labana जी द्वारा, स्व. हरविंदर सिंह लबाना जी की स्मृति में और आ० राकेश शम्स (एटा) जी की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें “आदित्य साहित्य साधना संस्था” के संस्थापक, प्रसिद्ध कवि और व्यंग्यकार…

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वर्तमान का क्षण : ललित पारिमू

मनुष्य अगर अपने दैनन्दिन कार्यों पर एक पैनी नज़र दौड़ाए तो वो इस निष्कर्ष पर पोहोंच सकता है कि  वो अपने दिन का अधिकतम समय भविष्य और भूत काल में ही बिताता है। वर्तमान क्षण से उसका सम्बन्ध कम ही बना रहता है । और जो दिन भर में उसे थोड़ा सा सुख और आनंद…

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धुंध में लिपटी राजधानी

– राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”   शिक्षक एवम साहित्यकार   दीपावली के तीन दिनों बाद हमारे देश की राजधानी दिल्ली धुंध के काले आवरण से ढँक चुकी थी।दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों से प्रदूषण की दर बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1600 बड़े  शहरों में दिल्ली प्रदूषण में सबसे आगे हैं। भारत…

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“रत्नव” त्रिदिवसीय नाट्य महोत्सव का आयोजन

23 नवंबर 2024 को हिन्दी रंगमंच की अग्रणी संस्था ‘रत्नव'(रमा थिएटर नाट्य विद्या) का तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव दिल्ली के ‘श्री राम सेंटर’ में  पूरी भव्यता से आरंभ हुआ। महोत्सव का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता और देश में एसिड -अटैक  की शिकार लड़कियों के लिए वर्षों से…

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प्रेम का पनपना

अगर तुम महसूस कर सकते हो बारिस की बूंदों को अपने तन पर तो तुम महसूस कर सकते हो प्रेम को भी उन्हीं बूंदों की तरह प्रेम कोई बाहर की वस्तु नहीं है यह तुम्हारे भीतर ही पनपता है बशर्ते तुमने इसे पनपने दिया हो प्रेम के पनपने के लिए जरूरी है अनुकूल वातावरण का…

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