आज दिल जीते हैं, कल फिर कप जीतेंगे।
जन्म मरण के चक्र-सी है, हार जीत लग रही। लड़े-भिड़े शौर्य से, आज नही तो कल सही।। कप जितने से बड़ी बात दिल जीतना होता है। क्रिकेट खत्म नही हो गया। 46 दिन में 45 दिन आप जीते हो। हमारी भारतीय टीम ने 2023 वर्ल्ड कप के अंदर 10 मैच जीते और आज फाइनल हारने…
सावधानी बरतें रहें सुरक्षित, एड्स से- लाल बिहारी लाल
विश्व एड्स दिवस ( 1 दिसंम्बर) पर विशेष एड्स का जागरुकता ही बचाव है – लाल बिहारी लाल Or सावधानी बरतें रहें सुरक्षित एड्स से- लाल बिहारी लाल ++++++++++++++++++++++++++++++++++लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मुँह पर सफेद धब्बे,,सूखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदि पर एड्स की संभावना हो सकती हैं।इस वर्ष 2023 का थीम है- “लेट कम्युनिटी…
वर्तमान का क्षण : ललित पारिमू
मनुष्य अगर अपने दैनन्दिन कार्यों पर एक पैनी नज़र दौड़ाए तो वो इस निष्कर्ष पर पोहोंच सकता है कि वो अपने दिन का अधिकतम समय भविष्य और भूत काल में ही बिताता है। वर्तमान क्षण से उसका सम्बन्ध कम ही बना रहता है । और जो दिन भर में उसे थोड़ा सा सुख और आनंद…
सम्पादकीय : मानसिक व वायु प्रदूषण से मुक्ति जरूरी
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) दीपावली का पंच– दिवसीय महोत्सव मनाते नवम्बर माह के दूसरे पखवाड़े में प्रवेश कर रहे हैं । धनतेरस – छोटी दीपावली – बड़ी दीपावली – गोवर्धन पूजा, भैयादूज और छठ पूजा आदि.एक समय था जब भक्तिमय भाव प्रमुख होता था । सभी त्यौहार हो अथवा ईष्ट देव, ईश्वर की आराधना करनी…
मै नारी ही क्यों बनी ?
अपना जीवन देकर मैं, जीवन संगिनी तुम्हारी बनी हूँ अपना सब कुछ देकर तुम्हें, तुम्हारी अर्धांगिनी बनी हूँ तुम सभी को जैसे हो वैसे ही अपनाकर एक स्त्री बनी हूँ पुरे परिवार को भरपेट भोजन कराकर ही मै अन्नपूर्णा बनी हूँ मगर क्यों मुझे लगता है कि मेरा कोई अस्तित्व नहीं है मगर सच तो…
संस्था वॉक इट आउट टॉक इट आउट का प्रोत्साहित कार्यक्रम संपन्न
पुणे:- नागरिकों को पैदल चलने के लिए प्रोत्साहित करने वाली संस्था वॉक इट आउट टॉक इट आउट के माध्यम से कई गतिविधियां क्रियान्वित की जाती हैं। हाल ही में अक्टूबर चैलेंज की गतिविधि सफलतापूर्वक आयोजित की गई। उस अवसर पर, इस समूह ने वर्ष की समीक्षा करते हुए एक पुरस्कार समारोह का आयोजन किया। जिसमें…
बाल बहार, (कविता) दिवाली की छुट्टियां
दीपावली त्यौहार का,अनुपम अपना ढंग। बच्चे मनाते हैं खुशी से, घरवालों के संग॥ घरवालों के संग, मजा तब दुगुना हो जाता। होते जब मित्रों संग, फुलझड़ी स्वयं चलाता॥ रहा इंतजार महीनों से, अवसर कब आयेगा। दिया रावण दहन संदेश, मास अगले आयेगा॥ हम दिन गिन रहे थे रोज,माह कार्तिक का आया। तब अमावस्या से पूर्व,…
एक दीया और जला देना
बहुत सारे दीया जलाएँ दीवाली में !घरों, मंदिरों, आँगन और चारदीवारी मे!!कतारे दीयो की, होगी सैकड़ो, हजार!रोशनी की होगी जीत और अंधेरों की हार!!रोशनी से जगमगा उठेगा चहुंओर !रहेगा न अंधेरा, किसी भी ओर!!मनाएंगे खुशियाँ सब मिलकर!दुख,कष्ट ना रहे किसी के उपर!! सब जगहों मे रोशनी ही फैले!दूर रहे अंधेरा,हो उजाले ही उजाले !!लेकिन चुन्नू…
सम्पादकीय : अहम को त्यागकर ही एकता संभव है
31 अक्टूबर सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है । महान स्वतंत्रता सेनानी भारत के पहले उप–प्रधानमंत्री एवं पहले गृहमंत्री सरदार पटेल जी की अनेक अन्य विशेषताओं में से जो सबसे प्रमुख रही कि उन्होंने भारतीय रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने में अहम…
