Latest Updates

तलाक है या है ये बिदाई

हरफ – हरफ हिसाब लगाकर सब ले गई थी तुम अपना| ये मेरा हुआ, ये तुम्हारा बनता है इतना। फिर भी छोड़ गई देखो सामान कितना| इतना कि हर पल, हर कदम अपने ही घर में ठोकर खाकर गिरता हूँ में| यूंकि तुम याद न आओ इसलिए आँखें मूँदें फिरता हूँ मैं। सिंगार के निशां…

Read More

विवेक जौहरी बने BSF के महानिदेशक

भारतीय पुलिस सेवा के 1984 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी विवेक कुमार जौहरी ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक का कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने  भोपाल से इंजीनियरिंग स्नातक किया है और वे बीएसएफ के 25वें महानिदेशक हैं। इससे पहले वह अनुसंधान और विश्लेषण शाखा (रॉ) में विशेष सचिव के पद पर थे।…

Read More

वात्सल्य सामाजिक सँस्था के बच्चों संग साहित्यिक गोष्ठी का शुभारम्भ

महारानी एँक्लेव हस्तसाल उत्तम नगर में 2019 से कार्यरत वात्सल्य सामाजिक सँस्था में 26 मार्च 2021 को वात्सल्य के सौजन्य से अनुराधा प्रकाशन के बैनर तले युवा साहित्यकार चितरंजन भार्गव (जिसकी उम्र मात्र 13 वर्ष है ) की पुस्तक का लोकार्पण मनमोहन शर्मा जी के कर कमलों से किया गया। मनमोहन शर्मा ‘शरण’ ने अपने…

Read More

गिरगिट के शर्मिंदा होने का समय

एक चुटकुला इन दिनों चर्चाओं में है ‘‘नीतिष कुमार जी मुख्यमंत्री बनने के लिए मुख्यमंत्री पद से स्तीफा देकर, विधायक दल के नेता बनकर फिर से मुख्यमंत्री बन गए । किसी को एक बार भी मुख्यमंत्री पद नहीं मिलता नीतिष कुमार तो ऐसे ही करते-करते नौ बार मुख्यमंत्री बन गए ।‘‘होहिं वही जो राम रचि…

Read More

होली के रंग भोजपुरी के संग” काव्यमय होली मिलनोत्सव

होली और ‘अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस’ के पावन पर्व का स्वागत करने के लिए “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था) की ओर से 20 मार्च, रविवार को सायं 5 बजे से एक काव्यमय होली मिलनोत्सव का आयोजन किया गया। विश्व स्तर पर भोजपुरी की महत्ता को देखते हुए “होली के रंग भोजपुरी के संग” के…

Read More

खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है

संसद के अंदर  जब  शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही  घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का  ध्यान नहीं जाता है। संसद  में  एक मिनट  के  बहस  में  व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी  जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…

Read More

गीतों के होठों पर

फिर वही यादों की बारिश,वही गम का मौसम। जाने कब झूम के आएगा प्यार का मौसम। ख्वाबों के ताजमहल, रोज बना करते हैं, वादों के शीश महल, चूर हुआ करते हैं। फिर वही टूटी उम्मीदों के खंडहर सा मौसम, जाने कब झूम के आएगा प्यार का मौसम। चांदनी आती नहीं, चांद भी नहीं आता, तारों…

Read More

अटल सत्य

पता नही क्यो? कोई भा जाता आँखो के रास्ते दिल में समा जाता। पता नही क्यों? उसे दखते ही प्यार उमर जाता आँखे चमक जाती और होठ मुस्कुराता। पता नही क्यों? दिल की धड़कने बढ़ जाती एक एहसास जगा जाती जैसे सपनों में खोया हूँ यह आभास क्यों जगा जाता ? पता नहीं क्यों? अब…

Read More

सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

Read More