Latest Updates

हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ेगा जनमानस ..!

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आजादी के 75 वें साल पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के दौरान लोगों को तिरंगा घर लाने और इसे फहराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए “हर घर तिरंगा” अभियान शुरू किया है।इतिहास के पलों को याद करते हुए उन्होंने कुछ दिन पहले  एक ट्वीट भी…

Read More

इतना तो असर हो मेरी दुआओं में घुले प्रेम का रँग सारी फ़िज़ाओं में

कितना अद्भुत सँगम है माँ शारदे की स्तुति के साथ हर रूह की चूनर प्रेम रँग से रँगते बसँत की दस्तक का !! कितना खूबसूरत नज़ारा है !! हर तरफ ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा के पँडाल वीणावादिनी की कर्णप्रिय स्तुति से गुँजित हैं !! बसँत की ख़ुमारी से रँगी ये सारी क़ायनात…

Read More

राष्ट्रमुकुट की प्रतीक्षा

कर कर के युग प्रतीक्षा थक जाऊंगी। क्या पता राष्ट्रभाषा कब बन पाऊंगी। मेरी आत्मा से वे चलचित्र बनाते, मेरे वाक्यों से अरबों रोज कमाते, मेरा अधरों पर नाम तक नहीं लाते, उस फिरंगिनी बोली को गले लगाते। सब देशों की प्रिय भाषा बन जाऊंगी, क्या पता राष्ट्रभाषा कब बन पाऊंगी। शिशुओं की मुझसे दूरी…

Read More

माँ (कविता-7)

पूरे घर का काम समेट कर थकान से चूर सुस्ताने को लेटी माँ बेटी के आते ही फुर्ती से रसोई में बेसन,सूजी ढूँढ पकौड़ी-हलवा बनाने लगती है! सबके सामने चुप रहने वाली माँ बेटी के आते ही उसके सम्मुख अकेले में मुखर हो उठती है! कुछ दिनों मायके में रहने आई बेटी को जाते समय…

Read More

(लघुकथा) नया साथी

आज चीकू बहुत ही उदास बैठा है ।घर का माहौल भी गमगीन है ।आज उसके प्यारे दादा जी भगवान के घर चले गये । रोज उनके साथ ही रहता था। दादाजी भी उसका बहुत ही ख्याल रखते थे । अंदर गया तो देखा कि दादी जी रो रही थी और बहुत ही उदास थी। जब…

Read More

दिल के ज़ख़्म…..

ज़ख़्म अल्फ़ाज़ों के थेदवा करते भी कैसेख्वाबो आंखों ने देखे थेमुक़्क़मल होते भी कैसे सब ख़त्म हो रहा थामेरी आँखों के सामनेतदबीर कुछ होती तोफ़ना होते भी कैसे फ़ासले न होते तोज़ुदा होते भी कैसेमल्लिका ए दिल थीदग़ा देते भी कैसे तड़प दिल कीअब रुकती नही हैबिते हुये पलों कीकहानी बनेगी कैसे…. आरिफ़ असासदिल्ली

Read More

होली सामाजिक भाईचारे की अजब मिसाल- लाल बिहारी लाल

भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास से मनाये जाने वाला रंगों से भरा हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी उत्सुकतापूर्वक करते है और उस दिन इसे लजीज पकवानों और रंगों के साथ धूमधाम से मनाते है। बच्चे सुबह-सुबह ही रंगों और पिचकारियों के साथ…

Read More

पहलगाम की गोलियाँ: धर्म पर नहीं, मानवता पर चली थीं— प्रियंका सौरभ

कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुआ आतंकी हमला सिर्फ एक गोलीबारी नहीं थी—यह एक ऐसा खौफनाक संदेश था जिसमें गोलियों ने धर्म की पहचान पूछकर चलना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आतंकियों ने पहले पर्यटकों से उनका धर्म पूछा, फिर उन्हें जबरन कलमा पढ़ने के लिए कहा, और इंकार करने पर गोली…

Read More

टॉफी

(अर्चना त्यागी) वह पगली थी। लोग ऐसा ही कहते थे। शायद उसकी बेतरतीब  सी वेषभूषा देखकर। भाव भी वह अजीब तरह के ही बनाती थी। मैंने भी आते जाते हुए एक दो बार उसे देखा था। मैले कुचैले कपड़े, सूखा बदन और बिखरे बाल। कोई भी देखकर अनुमान लगा सकता था कि महीनों से उन्हें…

Read More

बारहमासी वसंत होगा

कविता मल्होत्रा (संरक्षक) किसी को नज़ारे पसंद आते है तो कोई हरियाली का तलबगार है ख़ुशियाँ बाँटकर जग को ख़ुशी देना प्रकृति के दिव्य कारोबार का आधार है ✍️ वसंत ऋतु अपने आगमन के साथ-साथ जीवन दर्शन का एक बहुत ख़ूबसूरत संकेत भी लेकर आती है।हर तरफ़ रंग बिरँगे फूल देखकर किसका मन खुश नहीं…

Read More