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तूफान में धराशायी विपक्ष

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक बहुत बड़ मंत्र मिल गया है राजनीतिक दलों को चुनाव जीतने के लिए ‘‘लाड़ली बहिना’’  । पिछले साल मध्यप्रदेश के चुनावों में इस मंत्र को सिद्ध किया गया, परिणाम बेहतर आए तो अब हर एक चुनावी राज्यों में इस का प्रयोग किया जाने लगा ‘‘आओ बहिना तुम हमे वोट…

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मैं दूर दृष्टि धारक संजय

में दूर  दृष्टि धारक संजय,  आंखों देखा हाल बताया, धृतराष्ट्र के , कुल के काल को  मैं भी ना बदल पाया । पांचाली की हंसी , धृतराष्ट्र की चुप्पी,  शकुनि के  पाशो ने  सारा महाभारत करवाया । पति प्रेम में गांधारी ने भी  धृतराष्ट्र का साथ दिया दुर्योधन के सिंहासन के खातिर  अपने कुल का…

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डॉ कौशिक को एक और इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्डस घोषित

यूसीऐसकेएम स्कूल के प्राचार्य डॉ प्रभात कौशिक द्वारा लिखित व  हाल ही में प्रकाशित लीगली अपराइट : शिक्षा प्रबंधन  पर न्यायालयों के फैसलों के प्रभाव पुस्तक ने इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड के लिए एक और कीर्तिमान स्थापित किया है | इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स द्वारा इस पुस्तक का चयन 9 सितम्बर को दिल्ली में हुई…

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रामजी तुमको आना पड़ेगा

राम मंदिर बनाया है मन को,राम जी तुमको आना पड़ेगा। मेरा दिल है अयोध्या तुम्हारी,मिथिला नगरी है धड़कन हमारी।मेरी सांसों की नगरी में आकर,उम्र भर तुमको रहना पड़ेगा। आखिरी शाम जीवन की आये,मेरे प्रभु आना तुम बिन बुलाए।मेरा सर रख के गोदी में अपनी,मेरे भगवन सुलाना पड़ेगा। चार कंधों का लेकर सहारा,कैसे ढूंढ़ूगा मैं घर…

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आस मधुरतम

प्रिये! तुम विराट और मैं लघु गात,          अभिलषित तेरे उर सिंधु की। मद्धम होता उर प्रज्वाल जब,       बुझती चिर प्यास इस बिंदु की। अश्रु बिंदु मेरे अनुनय के,       जाते जब करुणा में हिलमिल। नेह सिंचित हो दीपक फिर,       जल उठता मुग्ध सा झिलमिल। लास उल्लास रहित जीवन,         यह पल-पल का…

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“साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग” पुस्तक का लोकार्पण

विज्ञानं भवन नई दिल्ली में इंडियन ब्रेव हार्ट्स संस्था द्वारा आयोजित सम्मान लोकार्पण समारोह में टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया के डायरेक्टर डॉ प्रभाकर राव गोविन्द राव चावरे द्वारा लिखित एवं श्री रामानुज सिंह ‘सुन्दरम’ द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग’ का लोकार्पण धर्माचार्य श्री सुधांशु महाराज जी, एम पी श्री मति सुनीता दुग्गल,…

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संतोष (लघुकथा)

    शाम होते-होते सूरज ढलने लगा। उम्मीदों के दीप बूझने लगे मगर सबको अपना-सा लगने वाला रमेश फिर कभी उन लोगों के बीच कभी नहीं लौटा जिनके लिए आधी रात को भी मुसीबत आए तो तैयार हो जाता था। गॉंव छोड़ शहर की नौकरी में ऐसा उलझा की घर बसाना ही भुल गया। गॉंव भी…

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मैं बदलूँ तो बदले समाज

आज मनुष्य का जीवन हर प्रकार से त्रस्त और असुरक्षित है।पेट भरने को भोजन नहीं है,कितनीही आशंकाओं के बीच जी रहे हैं और हर ओर सेमनुष्य का शोषण औरउत्पीड़न हो रहा है।ऐसीपरिस्थिति में आदमी के पास केवल एक ही विकल्प बचा है कि वह व्यवस्था को बदल डाले।आज लगभग पूरा विश्व ही कोरोना महामारी की चपेट…

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धोबीघाट

एक अँधेरी गुफामें खिंची जा रही है वह—घिरनी की तरह घूमती हुई।घोर अँधेरा—आँखें फाड़ फाड़कर देखने की कोशिश कर रही है वह-,पर कुछ दीखता नहीं –काला –गहरा अँधेरा बस।घूमता हुआ शरीर जैसे तिनके तिनके हो बिखर जाएगा—कितना लम्बा अँधेरा है—एक किरण ही रोशनी की दिख जाए गर! और –और  –अचानक जैसे रोशनी का विस्फोट है…

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भ्रष्टाचार का बोलबाला फिर भी सच्चाई का मुंह काला !

कई राजनीतिक आत्माओं के साथ सोशल मीडिया पर हूं कुछ तो सलाह भी लेते है पर अवसर पर पहचानने तक से मुकर जाते है और कुछ लोगो के संपर्क में भी रहता हूं जिन्हे कलम के माध्यम से आप सबके बीच लाने की जिज्ञासा भी है । धन धर्म और सुकर्म से समाज सेवा करने…

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