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ग़ज़ल

इस नये साल पर दें तुम्हें क्या बधाइयाँ। हर सिम्त हैं चीखें-पुकार, ग़म- रुलाइयाँ। हम जायें किधर इधर कुंआ, उधर खाइयाँ गुमराह हो गयी हैं हमारी अगुआइयाँ। काबिज़ हैं ओहदों पर तंग़ज़हन ताक़तें, हथिया रहीं सम्मान सभी अब मक्कारियाँ। ईमानदारियों की पूछ- परख है कहाँ, मेहनत को भी हासिल नहीं हैं कामयाबियां। माँ,  बहन, बेटियों…

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चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है…

चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है उजली शब का वो मुनव्वर माहताब लगे है l जब भी देखा है उसे तारीकियों से लड़ते वो फ़लक पर इक चमकता आफताब लगे है l क्या करें तारीफ़ हम उस जल्व ए जाना की सिर से पाँ तक जो ग़ज़ल की इक क़िताब लगे है l सब…

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नगरनिगम चुनाव  : बड़े राजनीतिक दलों का गणित बिगाड़  सकते हैं स्वतंत्र और बागी उम्मीदवार

दिल्ली नगर निगम चुनाव की चर्चा जोरो पर हैं, पहले तो इसकी घोषणा में विलम्ब हुआ , जिसके लिए फिर से एक ही नगरनिगम किया जाना बताया गया ……….जो भी हो अब प्रतीक्षा की घडी ख़त्म हो चुकी है और 4 दिसम्बर को मतदान होगा और सभी प्रत्याशियों की परिणाम उसमे बंद हो जायेंगे ………..इस…

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….फिर यह दुनिया होगी खूबसूरत

जब ना जाति होगी ना भेदभाव होगा जब धर्म सिर्फ इंसानियत का होगा तब होगी यह दुनिया खूबसूरत तब होगी यह दुनिया खूबसूरत। जब इंसान अपने प्रोटीन व स्वार्थ के लिए किसी बेजुबान जानवर की हत्या ना करके सही मायनों में प्रेम की परिभाषा सीखेगा। तब होगी यह दुनिया खूबसूरत तब होगी यह दुनिया खूबसूरत।…

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स्वार्थ निहित राष्ट्रवादियों से सावधान ..!

राष्ट्रवाद के निमित्त देश हित में सामाजिक  रंग और भावना कैसा है,कोई इसे हनुमान की तरह सीना फाड़कर नहीं दिखा सकता। राष्ट्रवादी होने का कोई गीत नहीं गाया जा सकता। राष्ट्रवाद अपने आप में एक जज्बा है, जूनून है जिसे मौक़ा मिलने पर पूरी ताक़त से दिखाया जाना चाहिए ना की पहले भारत तेरे टुकड़े…

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दो किलो रोज गाली का डोज

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव प्रधान मंत्री जी ने पूरा गणित लगाकर बता ही दिया है कि वे प्रतिदिन दो किलो गालियों का डोज लेते हैं हो सकता है कि वे इससे अधिक डोज लेते हों और उनको जानकारी मेे केवल दो किलो ही आइ्र हो । गालियों के वजन को मापने के किस यंत्र का उपयोग…

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कर्मवीर काशी के’ एवं श्री शंकर वाचनालय का लोकार्पण

31 अक्टूबर, 2022 “पुस्तकें और प्रकृति मनुष्य के दो आवश्यक सहचर हैं। पुस्तकें मनुष्य को शिक्षित करते हुए उसके आचरण का भी निर्माण करती हैं। आज के डिजिटल युग में भी छपी हुई पुस्तकों का महत्त्व है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान का संचार करती हैं।” ये बातें कहीं लेखक-समीक्षक डाॅ. अशोक कुमार ज्योति ने। ग्रामीण क्षेत्रों…

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन 

सबका नंबर आयेगा कृपया प्रतीक्षा कीजिए वाली टैगलाइन के साथ अब उन सबके काले चिट्ठे खुल रहे जिन्होंने देश के साथ गद्दारी की है । भारत सहिष्णु देश है पर यहां रहने वाले इस अंधे सहिष्णुता का जमकर फायदा उठाते है । अबकी बारी ममता केजरीवाल और राहुल गांधी जी हिंदुत्व के अपमान के तहत…

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नोट की ओट से वोट पर निशाना

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव . उन्हें पूजन के दौरान ही सपना आ गया ‘‘हे वत्स! ज तू बाहर जाकर कह दे कि नोटों पर मॉ लक्ष्मी और प्रभु गणेश जी की फोटो लर्गा जाए’’ । उन्होने पूरी पूजन की फिर अपने मुख पर मुस्कान को ओढ़ा, गले को खंखारकर खांसी जैसी मिटाई और सारे…

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एकता,सरदार पटेल

वतन की दरदे नेहा की दवा है एकता गरीब कौम की हाजत रवा है एकता तमाम दहर की रूहे रवा है एकता वतन से मोहब्बत नहीवह क्या जाने क्या चीज़ है एकता क्या है अनेकता ******* दे रहा है ज़माना पैगामे पटेल अब न होगा फिर कब होगा सब मे मेल जाँ हथेली पे ले…

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