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खजुराहो यात्रा:  एक अविस्मरणीय दैवीय अनुभव

यात्रा…….   जिसका नाम आते ही मन में  अजीब सी तरंगे  उसने लगती है।  एक  उत्साह  ,एक  जोश उत्पन्न हो जाता है  कि  लगातार  एक ही तरह की  दैनिक जीवन से  नया  कुछ हटकर  देखने को,  घूमने को,  सीखने को मिलेगा।  जहां हम स्वच्छंद होंगे , पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ  शायद  कुछ कम होगा। जहां…

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भावना

सब देखता नित ही यहाँ कब बोलता बस रो रहा। अब रोज ही यह हो रहा मुख ढाँप मानव सो रहा।। जग ही दिखे सब ये सखी अब खो रही निज है दया। अति हो रही हर क्षेत्र में यह बीज है नव बो रहा।। रचना रची भगवान ने उसने दिया यह रूप है। सबको…

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बधाईयां बधाईयां और केवल बधाईयां

डा.सर्वेश कुमार मिश्र सुबह से शाम हो गई किंतु कोई हलचल ना हुई कोई मनचल ना हुई कोई हिला भी नहीं कोई डुला भी नहीं कोई देखा भी नहीं कोई ताका भी नहीं। सच है खुद की लड़ाई खुद से लड़नी चाहिए बधाइयों के शहर में ना दुखड़े गाना चाहिए। खुद के मन की व्यथा…

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ग़ज़ल

इस नये साल पर दें तुम्हें क्या बधाइयाँ। हर सिम्त हैं चीखें-पुकार, ग़म- रुलाइयाँ। हम जायें किधर इधर कुंआ, उधर खाइयाँ गुमराह हो गयी हैं हमारी अगुआइयाँ। काबिज़ हैं ओहदों पर तंग़ज़हन ताक़तें, हथिया रहीं सम्मान सभी अब मक्कारियाँ। ईमानदारियों की पूछ- परख है कहाँ, मेहनत को भी हासिल नहीं हैं कामयाबियां। माँ,  बहन, बेटियों…

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चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है…

चेहरा उसका शगुफ़्ता सा गुलाब लगे है उजली शब का वो मुनव्वर माहताब लगे है l जब भी देखा है उसे तारीकियों से लड़ते वो फ़लक पर इक चमकता आफताब लगे है l क्या करें तारीफ़ हम उस जल्व ए जाना की सिर से पाँ तक जो ग़ज़ल की इक क़िताब लगे है l सब…

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नगरनिगम चुनाव  : बड़े राजनीतिक दलों का गणित बिगाड़  सकते हैं स्वतंत्र और बागी उम्मीदवार

दिल्ली नगर निगम चुनाव की चर्चा जोरो पर हैं, पहले तो इसकी घोषणा में विलम्ब हुआ , जिसके लिए फिर से एक ही नगरनिगम किया जाना बताया गया ……….जो भी हो अब प्रतीक्षा की घडी ख़त्म हो चुकी है और 4 दिसम्बर को मतदान होगा और सभी प्रत्याशियों की परिणाम उसमे बंद हो जायेंगे ………..इस…

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….फिर यह दुनिया होगी खूबसूरत

जब ना जाति होगी ना भेदभाव होगा जब धर्म सिर्फ इंसानियत का होगा तब होगी यह दुनिया खूबसूरत तब होगी यह दुनिया खूबसूरत। जब इंसान अपने प्रोटीन व स्वार्थ के लिए किसी बेजुबान जानवर की हत्या ना करके सही मायनों में प्रेम की परिभाषा सीखेगा। तब होगी यह दुनिया खूबसूरत तब होगी यह दुनिया खूबसूरत।…

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स्वार्थ निहित राष्ट्रवादियों से सावधान ..!

राष्ट्रवाद के निमित्त देश हित में सामाजिक  रंग और भावना कैसा है,कोई इसे हनुमान की तरह सीना फाड़कर नहीं दिखा सकता। राष्ट्रवादी होने का कोई गीत नहीं गाया जा सकता। राष्ट्रवाद अपने आप में एक जज्बा है, जूनून है जिसे मौक़ा मिलने पर पूरी ताक़त से दिखाया जाना चाहिए ना की पहले भारत तेरे टुकड़े…

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दो किलो रोज गाली का डोज

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव प्रधान मंत्री जी ने पूरा गणित लगाकर बता ही दिया है कि वे प्रतिदिन दो किलो गालियों का डोज लेते हैं हो सकता है कि वे इससे अधिक डोज लेते हों और उनको जानकारी मेे केवल दो किलो ही आइ्र हो । गालियों के वजन को मापने के किस यंत्र का उपयोग…

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कर्मवीर काशी के’ एवं श्री शंकर वाचनालय का लोकार्पण

31 अक्टूबर, 2022 “पुस्तकें और प्रकृति मनुष्य के दो आवश्यक सहचर हैं। पुस्तकें मनुष्य को शिक्षित करते हुए उसके आचरण का भी निर्माण करती हैं। आज के डिजिटल युग में भी छपी हुई पुस्तकों का महत्त्व है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान का संचार करती हैं।” ये बातें कहीं लेखक-समीक्षक डाॅ. अशोक कुमार ज्योति ने। ग्रामीण क्षेत्रों…

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