चेतना के फूल
चेतना के फूल तभी खिले जब सर्वस्व चढ़ाया है भानु का तांडव जारी फिर भी अंतरमन प्रेम से नहाया है कोई तो बात होगी सावन की फुहार में जो कीचड़ में भी कमल खिलाने की संभावनाओं को प्रकट करती है।दृष्टि हो तो सृष्टि बदल जाती है वर्ना सदियों के फेरों में उम्र निकल जाती है।जब-जब…
