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रेशमा

              रेशमा एक बहुत ही सीधी-सादी लड़की थी । जहां उसके साथ की लड़कियां फ़ैशन ,टीवी और मोबाइल में लगी रहती थी वहीं वह उम्र से पहले ही बड़ी हो चुकी थी। रेशमा का पिता शराबी था वह दर्जी का काम किया करता था परन्तु सारी की सारी कमाई अय्याशी और शराब पर लुटा दिया…

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रहे इस रूह की चूनर धानी

मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…

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टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी से पस्त जनता !

पहले आम जनमानस को सस्ते काल दर और सस्ती इंटरनेट सेवाओं की लत लगाई फिर धीरे- धीरे दरो को महंगा करते गए और आज हालात ये हो गए है कि आम जनता खुद को ठगा महसूस कर रही । विगत दो साल से जिस तरह टेलीकॉम कम्पनियों ने जनता को लूटा है वो आक्रोश पैदा…

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डॉ.राहुल को साहित्य शिरोमणि सम्मान

हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक-कवि डॉ.राहुल का भाषा, साहित्य,संस्कृतिएवं राष्ट्र के भावात्मक औरसृजनात्मकअतुलनीय योगदान एवं आलोचन- कार्य में उनकी विशिष्ट साहित्यिक उपलब्धि के लिए आर जे इंस्टीट्यूटआफ हायर एजेकेशन,जिला बुलन्दशहर (उत्तर प्रदेश) संस्था के तत्वावधान में साहित्य अकादमी, दिल्ली मेंआयोजित समारोह में दिनांक 16 नवम्बर 2024 को “साहित्य शिरोमणि राष्ट्रीय सम्मान”प्रदान किया गया।यह सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार…

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जय हिंद जय भारत

कविता मल्होत्रा माँ शारदे को नमन और भारत माता का वँदन करते हुए, आध्यात्मिक समिधा की आहुति के साथ, निस्वार्थ प्रेम का आचमन, हर रूह के जीवन यज्ञ को सफल बनाए, इसी शुभकामना के साथ,इस लेख का आरँभ करती हूँ। शीत ऋतु की विदाई के साथ बसँत के आगमन की दस्तक समूचे वातावरण में नवसृजन…

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संजीवनी।

धूप है बहुत चलने का वादा तो करो। धूप है बहुत चलने का वादा तो करो। भीड़ है निकल आने का इरादा तो करो।। सो जाऊगा गहरी नींद पल दो पल। सपनो में आने का,दावा तो करो।। जमाना ऐसा ही है,ऐसा ही रहेगा। थोड़ा मुस्कुराने में इजाफा तो करो।। मजबूर नहीं करते,साथ चलने को। पायल…

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व्यंग्य – कैशलेश होकर ये कहां आ गए हम….

मोबाइल आया घड़ी का ज़माना गया, लैपटॉप आया टेलीविजन का जमाना गया, एंड्राइड फोन आया रेडिओ का जमाना गया और अब तो हद ही हो गई ऑनलाइन पैमेंट आया बेचारे पर्स का जमाना गया। अति मॉडर्न दिखने के चक्कर में युवा वर्ग अपने पास कैश नहीं रखता। जो रखते भी हैं उनके पास खुल्ले पैसे…

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गोकुल ने रंग लगाया

सतरंगी डोली में बैठीहोली आई रे। ऋतु बसंत की ओढ़ चुनरिया होली आई रे। मधुऋतु की आंखों को जब,मौसम ने किया गुलाबी,बासंती बयार ने फागुन,को कर दिया शराबी। झूम-झूम कर फाग सुनाती होली आई रे। हर आंगन में रंग बिछे हैंमन की चूनर गीली,धरती गगन हुए सतरंगे,प्रकृति हुई रंगीली। लगा प्रीति का काजल देखो होली…

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ग्यारह को किसकी होगी पौह–बारह

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) सभी देशवासियों को बसंत पंचमी की बधाई एवं इस अवसर पर माँ सरस्वती से विशेष विनती है कि अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का प्रकाश चहुँ ओर कर दें जिससे सबको सच्ची बात भली प्रकार समझ में आ जाए । यहाँ थोड़ा मैं भी नासमझ सा हो गया हूं कि यदि…

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शब्द आज मौन है

हाहाकार करती धरा, चीत्कार करने लगा है गगन कैसे करूँ नमन उनको, जो कर गए न्योछवर तन अद्भुद सा संयोग है, क्या विचित्र सा योग है खुद को पीड़ित कहते है, पर औरो को पीड़ा देते है पीड़ित हो शोषित हो तो मेहनत को हथियार बना लो किसने तुमको रोका है, अपना जीवन आप बना…

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