गुरुवर जलते दीप से
दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप। अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।। चाहत को पर दे यही, स्वप्न करे साकार। शिक्षक अपने ज्ञान से, जीवन…
