हम पहुँच वाले लोग हैं, हमारा दुख भी वीआईपी है
हर भावना का प्रदर्शन, हर रिश्ते का प्रचार, और हर मौके का राजनीतिक/सामाजिक इस्तेमाल।) — डॉ. सत्यवान सौरभ मकान का मुहूर्त हो या दुकान का उद्घाटन, शादी-ब्याह की खुशियाँ हों या किसी अपने की मृत्यु का गम—हर जगह बड़े नेताओं और अफसरों की तस्वीरें चिपकाना अब “सम्मान” नहीं, बल्कि प्रभाव और पहुँच का प्रदर्शन बन…
