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हम पहुँच वाले लोग हैं, हमारा दुख भी वीआईपी है

हर भावना का प्रदर्शन, हर रिश्ते का प्रचार, और हर मौके का राजनीतिक/सामाजिक इस्तेमाल।) — डॉ. सत्यवान सौरभ मकान का मुहूर्त हो या दुकान का उद्घाटन, शादी-ब्याह की खुशियाँ हों या किसी अपने की मृत्यु का गम—हर जगह बड़े नेताओं और अफसरों की तस्वीरें चिपकाना अब “सम्मान” नहीं, बल्कि प्रभाव और पहुँच का प्रदर्शन बन…

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विशेष संसद सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023-

विशेष संसद सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023- प्रॉक्सी पॉलिटिक्स,राजनीतिक ढाल, आपराधिक नेटवर्क द्वारा जानबूझकर इस्तेमाल रोकने कठोर सजा का प्रावधान ज़रूरी ताकि वास्तविक सशक्तिकरण हों -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के माध्यम से लोकतांत्रिक इतिहास में एक निर्णायक कदम उठाया है,…

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रोटी से बड़ी हो गई गैस – शहर छोड़ते मजदूरों की मजबूरी

– महेन्द्र तिवारी भारत में प्रवासी मजदूरों का संकट एक बार फिर सामने खड़ा है, और इस बार इसकी जड़ में केवल आर्थिक मंदी या रोजगार की कमी नहीं, बल्कि एक गहरा ऊर्जा संकट है, जिसने शहरों की चमक के पीछे छिपी कमजोरियों को उजागर कर दिया है। हाल के दिनों में देश के कई…

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युद्ध और चुनाव के बीच कयासों का दौर

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तवयुद्ध और चुनाव, भारत की जनता इस समय इन दोनों के मध्य झूल रही है । चुनाव तो युद्ध जैसे हालत ले ही लेते हैं पर युद्ध चुनाव जेसे हालात नहीं ले पाता । कहने को तो अमेरिका और ईरान के बीच ‘सीजफायर’ जैसा कुछ हो गया है पर रिपोर्ट बता…

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भीड़ में अकेले: आधुनिक मित्रता के बारे में सच्चाई 

डॉ विजय गर्ग  आज की अति-कनेक्टेड दुनिया में, दोस्ती ने एक नया रूप ले लिया है जो स्क्रीन, सूचनाओं और डिजिटल बातचीत से आकार लेता है। हम पहले से कहीं अधिक जुड़े हुए हैं, सैकड़ों या हजारों ऑनलाइन संपर्क सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर हैं। फिर भी, विरोधाभासी बात यह है कि कई लोग…

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जनप्रतिनिधियों की पेंशन पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की सख्त टिप्पणी के बाद बहस तेज—क्या पूर्व सांसदों को मिलने वाली पेंशन समानता के सिद्धांत के अनुरूप है या यह विशेषाधिकार का उदाहरण?) – डॉ. प्रियंका सौरभ भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ जनता सर्वोच्च मानी जाती है और जनप्रतिनिधि जनता के सेवक के रूप में कार्य करते हैं। परंतु समय-समय…

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ई-चालान, ई-स्मार्ट मीटर और महंगे एजुकेशन सिस्टम से परेशान जनता

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी टेक्नोलॉजी का उपयोग और दुरूपयोग अपनी जगह है पर सरकारी तंत्र में टेक्नोलॉजी ने हड़कंप मचा दिया है। इस ट्रिपल ई ने आम जनता के नाक में दम करके रख दिया है। जहां एक तरफ भागती दौड़ती जिंदगी में लोगों को सुकून नहीं वहीं दूसरी तरफ…

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“इंडिया इन कोरिया: कोरिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव” का भव्य विमोचन

नई दिल्ली/सोल, 27 मार्च 2026. दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल स्थित क्वांगवून यूनिवर्सिटी के सभागार में डॉ. अजय कुमार ओझा की पुस्तक “इंडिया इन कोरिया: कोरिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव” का भव्य विमोचन अंतरराष्ट्रीय विद्वानों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। अनुराधा प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित इस पुस्तक में भारत और…

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साहित्यिक आयोजनों में जुगलबंदी का जाल

(अकादमियों और संस्थानों की बंद दुनिया में अपनों का उत्सव) – डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय साहित्यिक परिदृश्य सदैव से विविधता, विचारशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक रहा है। यह वह क्षेत्र है जहाँ शब्द केवल रचना नहीं होते, बल्कि समाज के अनुभव, संघर्ष, संवेदनाएँ और परिवर्तन की आकांक्षाएँ भी अभिव्यक्त करते हैं। परंतु वर्तमान…

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सफलता की दौड़ में बुनियादी शिक्षा का पतन

डॉ विजय गर्ग  आज का समय प्रतिस्पर्धा का समय है। हर विद्यार्थी, हर अभिभावक और हर संस्थान एक ही लक्ष्य की ओर भाग रहा है—सफलता। लेकिन इस अंधी दौड़ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न धीरे-धीरे पीछे छूटता जा रहा है: क्या हम वास्तव में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, या केवल परीक्षा पास करने की कला…

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