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लघुकथा: “चार बजे की माँ”

(लेखिका: डॉ. प्रियंका सौरभ) सुबह के चार बजे थे। बाहर अभी भी अंधेरा पसरा था, मगर प्रियंका की नींद खुल चुकी थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँखें खुल गई थीं — जैसे उसकी जिम्मेदारियाँ अलार्म से भी पहले जाग जाती हों। बिस्तर छोड़ते ही ठंडी ज़मीन पर पैर रखते हुए एक ही ख्याल…

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“देवभूमि का दर्द: विकास के नाम पर विनाश”

पहाड़ों का सर्वनाश: उत्तराखंड की आखिरी चेतावनी “देवभूमि का दर्द: विकास के नाम पर विनाश” उत्तरकाशी के थराली में बादल फटने से हुई भीषण तबाही उत्तराखंड के पर्यावरणीय संकट की गंभीर चेतावनी है। विकास के नाम पर हो रही पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई, अवैज्ञानिक निर्माण और बेतरतीब पर्यटन ने पहाड़ों की सहनशीलता को खत्म कर…

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उधम सिंह सरदार: एक गोली, सौ सालों की गूंज

उधम सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक विचार थे—संयम, संकल्प और सत्य का प्रतीक। जलियांवाला बाग़ के नरसंहार का प्रत्यक्षदर्शी यह वीर 21 वर्षों तक चुपचाप अपने मिशन की तैयारी करता रहा और लंदन जाकर ओ’डायर को गोली मारकर भारत का प्रतिशोध पूरा किया। उनकी चुप्पी न्याय की गर्जना थी, जो आज भी…

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अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्..!

पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी, सम्पर्क सूत्र  8808113709 महोपनिषद् 4.71 वो में एक सूक्ति है :- अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् ! उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ जिसका आशय है कि संकीर्ण सोच वाले ही “अपना–पराया” करते हैं; उदारजन पूरी पृथ्वी को परिवार मानते हैं। आज जो लोग सांप्रदायिक राजनीति, जातिवाद…

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हंगामा करना बन गया है परिपाटी

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सांसदों और विधायकों का ससंद या विधानसभा के अंदर किया जाने वाला व्यवहार अब आम व्यक्तियों को भी अखरने लगा है । वित कुछ वर्षों से यह परिपाटी सी बनती जा रही है कि जब भी संसद का या विधानसभा का सत्र प्रारंभ होगा तब ही विपक्ष हंगामा करेगा ।…

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श्रावण में शिव भक्ति और आध्यात्मिकता

हिंदू सनातन धर्म में शिव भक्ति का विशेष  महत्त्व है । भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है ।वह जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं । सोमवार के दिन चंद्र देव ने भगवान शिव का पूजन कर क्षय रोग से अपने प्राण बचाए थे। सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग मंदिर इसी का प्रमाण है। इसलिए भगवान को सोमवार…

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ड्रोन की सदी

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ज़रिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। दुनिया को पाकिस्तान के नापाक इरादों से भी अवगत कराया गया। यह निश्चित रूप से वायु सेना की श्रेष्ठता का एक शानदार प्रदर्शन था, लेकिन सिर्फ़ इसी से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। चीफ ऑफ…

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ग़ज़ल : आशुतोष द्विवेदी

हारी, थकी, उदास निगाहें जाग रहीं, ज़ख्म सो गए मगर कराहें जाग रहीं। अब वे रातें सपनों जैसी लगती हैं, हमें सुलाकर गोरी बाहें जाग रहीं। चिंता करते-करते चिता हो गए हम, राख में अब भी बिखरी चाहें जाग रहीं। बेदम होकर झपकी लेते पाँवों में कब से उलझी-उलझी राहें जाग रहीं। कबके उजड़े उम्मीदों…

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चौड़ाई और गहराई : आरती परीख

लघुकथा डॉक्टर ने कहा — “आपके पास बस छह महीने हैं।” रवि थोड़े दर्द के साथ, पर हल्के से मुस्कुराकर बोला — “छह महीने…? काफी हैं, जीने के लिए….” घर लौटते ही उसने अपनी टू-डू लिस्ट जला दी — वो लिस्ट; जिसमें प्रमोशन, नया घर, कार और सामाजिक प्रतिष्ठा दर्ज़ थी। अब वो हर सुबह…

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