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जब कभी

जब कभी महफिल भी रुलाने लगे। तन्हा-तन्हा पल जब सताने लगे।। हमको आवाज देना मगर दिल से तुम। चाहे इसके लिए अब जमाने लगे।। रिश्ते हर रोज बनते हैं मिटते यहां। दिल लगाना यहां बस फसाने लगे।। ग़मों से अगर बात हो अपनी कभी। इन्तहां में भी हम मुस्कुराने लगे।। रंग भरते हैं ख्वाबों में…

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पिता

हो मजदूर हो फेरीवाला हो रिक्शेवाला हो ठेलेवाला हो कारीगर हो दुकानदार हो ऑफिस कर्मी हो नेता हो अभिनेता हो टाटा, बिरला,अम्बानी हो गरीब या मध्यम या अमीर या करोड़पति पिता तो पिता ही होता है सिर्फ बच्चों की मुस्कान के लिये हर मौसम की मार- हो चिलचिलाती धूप, लू, तेज़ बरसात, आंधी, तूफान या…

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जा रहा है कोरोना

जा रहा है कोरोना लेकर कितनों की जान कितनों की बर्बादी ,कितनों का ईमान इतिहास गवाही देगा, उनकी तबाही की गूंजती है जिनके रोने की आवाज खुलने लगे हैं बाजार होने लगी है चहल पहल सुनाई देने लगी गानो की आवाज,पर गूंजती है उनके रोने की आवाज छिन गई है जिनके घरों में रोटियां बुझ…

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उड़ान

जीवन की मुश्किल राहों में थकना न है… सपनों की उड़ान को पंख लगाने है .. हौसले बुलंद करके मंजिल को पाना है … हौंसले बुलंद हो तो पत्थर भी पानी बन जाता …. इरादे मजबूत हो तो पत्थर भी पिघल जाते …. जीवन में कोई भी बाधा आए सभी अपने आप ही हट जाती…

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हर रूह प्रेम की प्यासी है

कविता मल्होत्रा (संरक्षक एवं स्तंभकार – उत्कर्ष मेल) उधार की मिली सब साँसें,हर धड़कन मुक्ति की अभिलाषी है अपनी संवेदनाओं को साग़र कर दें, हर रूह प्रेम की प्यासी है ✍️ अति हर चीज़ की बुरी होती है, बचपन से सुनते आए हैं।मानव जाति से किस तरह के गुनाहों की अति हुई है जिनके परिणाम…

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छाया है पिता

बरगद की घनी छाया है पिता छाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोई आँसू छिपाता अन्तर में अपने। तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वो चाहता पूरे हों अपनों के सपने। बरगद की घनी छाया है पिता छाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद है पिता जीवन की इक…

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ख़बर से बेख़बर

ग़मों का मारा बेचारा मासूम-सा ये जो दिल है। अरमानों की इसने फिर से सजाई महफ़िल है।। कुहासा-सा  जिंदगी  में आजकल  बहुत है। दूर बादलों में गा रहा कोई प्यारी-सी ग़ज़ल है।। डर  था  जब  समंदर  की लहरों से  इतना। फिर क्यूँ, बना लिया साहिल सहारे घर है।। पाँवों के  छाले  भी  अब  तो पूछते…

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राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन

(01 अगस्त, 1882 से 01 जुलाई, 1962) प्रारंभिक जीवन :- पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 01 अगस्त, 1882 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं के सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर स्कूल में हुई। सन् 1894 में उन्होंने इसी स्कूल से मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की। हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण…

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दोहा : सास ससुर ससुराल है,

सास ससुर ससुराल है,साला सलहज दूर। आवत जावत मुह पिटे,नैन देखि मजबूर।। ननद मिताई बांध के, चलते रिस्ते नात। टूटी डोरी सांस की, झूठी सारी बात।। पाहुन घड़ी बिताय के, निकले अपने धाम। ठहरे जो पहरे पहर,बिगड़े सारे काम।। भोगे अपने भोग सब,अपने करमे हार। जीती -जाती जिंदगी,कर ली कैसे?क्षार।। साढू के घर जाइये,हाथ रहे…

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ग़ज़ल,

शराफत हम से कहती है,शराफत से जिया जाए, कोई हद भी तो होती है,कहाँ तक चुप रहा जाए। ग़ज़ल से गुफ़्तगू हमने इशारों में बहुत कर ली, मगर अब दिल ये कहता है कि कुछ खुल कर कहा जाये। अभी ज़िंदा हैं हम साँसें भी अपनी चल रहीं हैं न, तो फिर क्यों ना बुरे…

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