अँधेरे और उजाले
गंगा के किनारे, यूँ हीं नहीं लगी है भीड़ साहब। लोगों ने पाप किये होंगे शायद बेहिसाब।। और वो कहता है मुझको, आओ कभी मेरे भी द्वार। गर करते हो मुझे से प्यार, बिना किसी दरकार।। काश! वो तो, मेरी हैसियत ना पूछता। अच्छा होता, गर वो मेरी खैरियत को पूछता।। उनका पैग़ाम नफ़रत था,…
खुदीराम बोस
(03 दिसंबर, 1889 से 11 अगस्त, 1908) प्रारंभिक जीवन :- खुदीराम बोस का जन्म 03 दिसंबर, 1889 ई. को बंगाल में मिदनापुर ज़िले के हबीबपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री त्रैलोक्य नाथ बोस और माता का नाम श्रीमती लक्ष्मीप्रिय देवी था। बालक खुदीराम के सिर से माता-पिता का साया बहुत जल्दी…
“धर्म ताकत या सियासत ?”
हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव की सरगर्मी के साथ साथ धर्म के नाम पर सियासत तेज हो जाती है। सर्वधर्म समभाव का पालन करने वाले इस देश की आत्मा को हिंदू मुसलमान के नाम पर बांटने की कोशिशें रुकने का नाम नहीं लेती हैं। देश कोरोना से लड़ रहा है, कितने…
कोख का बंटवारा
रामनरायण के दो बेटों का नाम रमेश और सुरेश है। युवा अवस्था में रामनारायण के मृत्यु होने के बाद उनकी पत्नी रमादेवी ने रामनारायण के जमा पूंजी और पूर्वजों से मिली संपत्ति से दोनों बेटों का परिवरिश किया। रमादेवी का बड़ा बेटा रमेश पढ़ लिखकर शहर में सरकारी विभाग पर बड़े बाबू के पद पर…
सावन कजरी और झूला
वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही,पूर्वांचल के बाग झूला गीतों से चहक उठते हैं और कजरी गायन की प्रथा का पालन शुरू हो जाता है, भाद्रपद कृष्णपक्ष की तृतिया को कजरी तीज मनाई जाती है,इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और रतजगा करते हुए कजरी गायन करती हैं।कजरी मे मुख्यतः संयोग वियोग और वर्षा…
पितृदिवस पर कनाडा से “मनस्विनी” समूह के सभी सदस्यों के सहयोग से स्वरचित पंक्तियां
न मेरी आंख ही फड़कीन ही हिचकियाँ आईंमगर फिर भी यें लगता हैंकि कोई याद करता हैं….वो ओर कोई नहीं मेरे पापा…पापा की दुलारी,थोड़ी बिगड़ी, थोड़ी प्यारीसुबह जल्दी जगाते हैं पापा,नौ बजे रात मैं बत्ती बुझाते हैसदैव याद में आतेमेरे प्यारे पापाउनकी दिलचस्प बातेंज्ञान से भरी नसीहतेंउनकी किताबों का भंडारअनुशासन में छिपा प्यारमेरे प्यारे पापापापा…
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति रहें सचेत
तनाव, चिंता और दुःख जैसी अनेक भावनाओं का हम सभी अनुभव करते हैं, और अधिकांश समय ये भावनाएं जल्दी से समाप्त भी हो जाती हैं लेकिन कुछ लोगों के लिए यह भावनाएँ अधिक जटिल बनी रहती हैं और जीवन की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। तब इसका निदान करना जरूरी हो जाता…
गुरु महिमा
हे गुरुदेव! प्रथम वंदन आपको साक्षात दण्डवत प्रणाम , बिना गुरु के ज्ञान अधूरा , फिर -फिर गोता खाय, गुरु मंत्र को आत्मसात कर , भव सागर पार कर जाय। गुरुदेव मानव को नवजीवन देते , गुरुदेव मानव का तिमिर मिटाते, गुरुदेव मानव को प्रकाशवान बनाते , गुरुदेव हृदय में ज्ञान दीप जलाते, गुरुदेव ही…
