महाशिवरात्रि महापर्व
विधा:-विधाता छंद करूँ मैं वंदना शिव की,सभी के हैं शरण दाता। सवारी बैल की करते, किसी से द्वेष ना भाता। भजें जो प्रेम से उनको, खुशी दें शरण पा जाता। मिले वरदान मनचाहा, भजन से इष्ट का नाता॥ लिया अवतार पृथ्वी पर, शिवानी भी विवाही हैं। त्रयोदश की शुभी तिथि के,रहेंगे गण गवाही हैं। मनाते…
