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जब इलाज भी बाज़ार बन जाए: भारत में स्वास्थ्य अधिकार की लड़ाई

भारत में बढ़ती निजीकरण प्रवृत्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय की कमी: क्या ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ सच में न्यायालयों में लागू किया जा सकता है? जब उपचार एक सेवा नहीं, बल्कि बाज़ार की वस्तु बन जाए, तब अधिकारों की भाषा कमजोर पड़ जाती है। – डॉ सत्यवान सौरभ भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा और ढांचा…

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जीवन : डॉ.सरला सिंह ‘स्निग्धा’

  तेजी से पटरियों के बीचों-बीच दौड़ती हुई एक लड़की, ट्रेन के किनारे-किनारे पटरियों पर पड़े  पानी के खाली बोतल उठा-उठा कर अपने बोरे में भर रही थी। कई बार वह गिर पड़ती, फिर से उठती संँभलती और फिर आगे बढ़ जाती। उसकी उम्र भी बमुश्किल कोई सात-आठ साल की रही होगी। नाम मिनी और…

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आज के बदलते दौर में गीता के उपदेश कितने आवश्यक

श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश महाभारत युद्ध के दौरान योगेश्वर श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन को दिए थे।18 अध्यायों के 700 श्लोकों में निहित श्रीमद्भगवत गीता ग्रन्थ आज प्रतिदिन पढ़ने की आवश्यकता है।गीता अध्यात्म पथ पर चलना सिखाती है। निष्काम कर्म करने की राह बताती है। आत्मिक शांति चाहिए तो गीता के श्लोक अवश्य पढ़ना चाहिए। बढ़ते…

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वर्ष 2026 का सभी 12 राशियों का वार्षिक राशिफल- गोचर के आधार पर:

गोचर प्रत्येक राशि के लिए अलग-अलग महीने में होने वाली प्रमुख घटनाओं और अवसरों का संकेत देता है। गोचर से तात्पर्य ग्रहों के वर्तमान स्थिति से है, जो हर राशि पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। यह राशिफल आपके व्यक्तित्व, कार्य, प्रेम, परिवार और अन्य पहलुओं पर आधारित है। यह राशिफल गोचर के आधार पर है,…

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ब्रह्म और महासून्यता शून्य से परे एक आध्यात्मिक दृष्टि

Nothingness*हमारी संस्कृति में ‘शून्यता’ शब्द बहुत बार गलत समझा और व्याख्यायित किया गया है। गणितीय शून्य केवल संख्या है एक अंक जो मात्रा की अनुपस्थिति दर्शाता है। वहीं सन्यता/सून्यता (Sunnata) का अर्थ है सब कुछ का अभाव -न कोई गुण, न कोई वस्तु, न कोई पहचान। मेरी पुस्तक और शोध इसी फर्क को स्पष्ट करने…

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ऋतुओं को निगलने लगा प्रदूषण: बदलता मौसम, घटता जीवन

डॉ विजय गर्ग भारत में सदियों से छह ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर) का अपना एक क्रम रहा है। हर ऋतु अपने विशिष्ट सौंदर्य, मौसम और जीवनशैली के साथ आती थी। लेकिन आज, बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण यह प्राकृतिक क्रम टूट रहा है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रदूषण…

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हमेशा ऑनलाइन’ रहने के मायाजाल  की दौड़ में थकते युवा

 डिजिटल पहचान की अंधी प्रतिस्पर्धा ने मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और वास्तविक अनुभवों को संकट में डाल दिया है। सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव युवाओं के मानसिक संतुलन और जीवनशैली पर गहरा असर डाल रहा है। लाइक, व्यूज़ और फॉलोअर्स की प्रतिस्पर्धा ने उन्हें एक अदृश्य दबाव में धकेल दिया है, जहाँ डिजिटल मान्यता ही…

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बदलती विश्व-व्यवस्था और जी-20 की चुनौती : बहुध्रुवीयता के बीच भारत की उभरती वैश्विक भूमिका

भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक अस्थिरता और नेतृत्व संकट से जूझते जी-20 में भारत का वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में उदय जी-20 वैश्विक आर्थिक समन्वय का सबसे प्रभावी मंच है, परन्तु आज यह गहरे भू-राजनीतिक विभाजनों, महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा, आर्थिक असमानताओं और नेतृत्व संकट जैसी कई चुनौतियों से घिरा है। इससे समूह की प्रासंगिकता एवं…

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विरोध की आड़ में, ये कहाँ आ गए हम……!

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी अजाक्स के एक पदादिकारी और एमपी सरकार के अधीन एक आईएएस प्रमोटेड अधिकारी का बयान वायरल हुआ था, जिसमें ब्राह्मणत्व के मानसिक विरोध में यह कहा गया  कि जबतक ब्राह्मण उसके बेटे को अपनी बेटी दान नहीं करते तब तक आरक्षण बना रहेगा। यह पूरी…

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एसआईआर का घमासान : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा बिहार राज्य में एसआईआर को मिली अपार सफलता के बाद अब चुनाव आयोग ने देश के अन्य बारह राज्यों में एसआईआर सर्वे कराना शुरू कर दिया है । एसआईआर सर्वे को लेकर विपक्ष की त्यौरियां चढ़ी हुई हैं तो जाहिर है कि घमासान मचा हुआ है । दरअसल एसआईआर सर्वे को लेकर विपक्ष…

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