नई दिल्ली/सोल, 27 मार्च 2026. दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल स्थित क्वांगवून यूनिवर्सिटी के सभागार में डॉ. अजय कुमार ओझा की पुस्तक “इंडिया इन कोरिया: कोरिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव” का भव्य विमोचन अंतरराष्ट्रीय विद्वानों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। अनुराधा प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित इस पुस्तक में भारत और कोरिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।
इस अवसर पर Bureau of Revived Ancient Soft Skilling (BRASS), नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. पाण्डेय अखिलेश कुमार अरुण ने पुस्तक की विषयवस्तु, उसके व्यापक परिप्रेक्ष्य और मूल भाव को सरल एवं प्रभावी शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में इस बात पर विशेष जोर दिया कि सभ्यताएँ स्थिर नहीं होतीं, बल्कि वे निरंतर विकसित होती रहती हैं। कला, परंपरा और विचारों का आदान-प्रदान ही उन्हें जीवंत बनाए रखता है।
पुस्तक का औपचारिक विमोचन एवं लोकार्पण ‘इंडियंस इन कोरिया’, सोल, दक्षिण कोरिया संस्था के अध्यक्ष एवं क्वांगवून यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. नागेन्द्र कौशिक, ग्लोबल पीस फाउंडेशन (इंडिया) के अध्यक्ष डॉ. मार्कण्डेय राय, सनातन धाम फाउंडेशन के अध्यक्ष तथा डॉ. पाण्डेय अखिलेश कुमार अरुण द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस समारोह में लगभग 250 अंतरराष्ट्रीय विद्वानों, शोधकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की उपस्थिति ने इस पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम में उपस्थित अनेक प्रतिष्ठित वक्ताओं ने पुस्तक के शीर्षक, उसकी प्रासंगिकता और कालजयी महत्व को रेखांकित किया। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत और कोरिया के बीच सांस्कृतिक सेतु का सशक्त प्रमाण है।
डॉ अजय कुमार ओझा लिखित इस पुस्तक में भारत और कोरिया के प्राचीन संबंधों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जो इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता में गहराई से निहित हैं। इसमें अयोध्या की राजकुमारी सूर्यरत्ना (रानी ह्वांग-ओक) की कथा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है, जिन्होंने लगभग 48 ईस्वी में कोरिया जाकर राजा किम सूरो से विवाह किया और दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक एवं भावनात्मक संबंध स्थापित किया।
इसके साथ ही, “इंडिया इन कोरिया: कोरिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव” पुस्तक में बौद्ध धर्म के प्रसार को भारत-कोरिया संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण आयाम बताया गया है। भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ भारत से चीन के माध्यम से कोरिया पहुँचीं और वहाँ के समाज, कला, शासन तथा शिक्षा व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। गोगुर्यो, बैक्जे और सिल्ला जैसे प्राचीन राज्यों में बौद्ध धर्म का व्यापक विकास हुआ। सेओकगुराम गुफा, बुलगुक्सा और हेइनसा मंदिर जैसे स्थापत्य इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो आज भी इस विस्तृत एवं व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव की जीवंत गवाही देते हैं।
“इंडिया इन कोरिया: कोरिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव” पुस्तक यह भी दर्शाती है कि बौद्ध मठ केवल धार्मिक केंद्र नहीं थे, बल्कि शिक्षा और ज्ञान के प्रमुख केंद्र भी थे, जहाँ दर्शन, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और साहित्य का अध्ययन होता था। सारांशतः, यह संदेश उभरकर सामने आता है कि आधुनिक तकनीकी युग में भी वास्तविक प्रगति के लिए करुणा, नैतिकता और संतुलन अनिवार्य हैं। यह पुस्तक न केवल अतीत की विरासत को उजागर करती है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करती है। पुस्तक के लेखक डॉ अजय कुमार ओझा, पुस्तक के प्रकाशक, और इसके प्रस्तावना लेखक और समीक्षक डॉ पाण्डेय आखिलेश कुमार अरुण को अनेक साधुवाद।
