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स्योरिटी

                 रूपा के काॅलेज की छुट्टियाँ चल रही थीं। उसने सोचा की खाली समय में खाली बैठने से अच्छा है की कुछ काम ही कर लिया जाये।एक सहेली से बात करके दोनों ने एक प्राइवेट स्कूल में बात की और  फिर इन्टरव्यू के बाद  दोनों का ही उसी स्कूल में सैलेक्शन हो गया। दोनों ने…

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लोग

लोग होते हैं जो ढूँढते हैं अपनी कमी दूसरों में। हँसते हैं झूठी हँसी छिपाते हैं अपनी दोहरी शख्स़ियत करते हैं दिखावा आदमीयत का। लोग नज़र आते हैं करते हुए काना-फूसी चुगली करते ज़हर उगलते मीठी ज़बान से। लोगों की किस्मों का ही तो भरम है करें किससे प्रेम भरोसा करें किस पर झूठ ओढ़े…

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तितली के पंख : अरुण कुमार शर्मा

क्या, तितली के पंख को तुमने, हाथ लगा कर देखा है , जिसपर वो मंडराती है, उस फल को खाते देखा है ! क्या देखी है “अरुण” कभी, तनहाई सूरज की बोलो , क्या तुमने रवि की किरणों को, पास से जाकर देखा है! चंदा हँसता है खिलकर, और तारे मुसकाते तो हैं , मुझे…

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परछाईं

घर में प्रवेश करते ही त्रिशा माँ से लिपट कर उत्साह से चहक उठी ‘माँ मेरा प्रमोशन हो गयाl’ मिठाई का एक टुकड़ा माँ के मुँह में डाल मिश्राजी के सीने से लग कर उनका मुँह मीठा करते हुए उसने कहा ‘पापा आपके आशीर्वाद से इंक्रीमेंट भी अच्छा मिला हैl’ पापा ने त्रिशा के सिर…

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पत्नी अपने पति को बहुत प्यार से कहती है

जैसे शिव जी पार्वती के बिना अधूरे विष्णु जी लक्ष्मी के बिना अधूरे ठीक वैसे ही हर पति बिना पत्नी के अधूरे  “लड़की “इज्जत माता पिता के घर की “लड़की “ सिर का ताज ससुराल की नारी “ आन बान शान परिवार की शादी के बाद कुछ यूँ कहती अपने पति से “ माँग मेरी…

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सच्चाई

कपिल जी ने अपनी बेटी का विवाह बड़े धूमधाम से किया। लेकिन विवाह के दो महीने पश्चात ही बेटी ससुराल छोड़कर मायके आ धमकी। दोनों पक्षों के बीच में वाद विवाद भी खूब हुए। कानूनी कार्रवाई कर कर फैसला कर लिया गया। अब कपिल जी अपनी बेटी के लिए किसी दूसरे अच्छे रिश्ते की तलाश…

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बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई

कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…

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करुणा मन में जो धरे होता वही महान

अंधकार मन का मिटे तम का न हो निशान उजियारा हो प्रेम का दूर हटे अज्ञान । मजबूत नींव कीजिये फिर कीजै संधान व्यर्थ किसी तूफ़ान में ढह न जाए मकान l पूर्ण जरूरत कीजिए रखिये इतना ध्यान ऐसी शिक्षा दीजिए बने नेक इंसान l घर के चिराग से कहीं जल न जाए मकान लाड़…

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सूरज की सगी बहन

आग उगलती दोपहरी ये अंगारे सा दिन, कब आषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। प्यासे अधर नदी झरनों के, कंठ कुओं के सूखे, दिन भर के दुबके नीड़ों में, पंछी सोऐं भूखे। प्रातः से ही तपन तपस्विन करने लगी हवन, कब मेघों का बिजुरियों से होगा मधुर मिलन। सड़कों पर सन्नाटा लेटा, मृग मरीचिका बनकर,…

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प्यासी धरती मुरझा मधुवन

प्यासी धरती तुझे पुकारे, प्यासी नदिया तुझे पुकारे,       आ रे मेघा अब तो आ रे। बादल नीलगगन पर छाते, संग आंधियों को ले आते, तेरे राजदूत बनकर वे, झूठे आश्वासन दे जाते। सूखी पोखर तुझे पुकारे, आ रे मेघा अब तो आ रे।  कोयल सूखी अमराई में,  विरह गीत गाती रहती है,  और मोरनी…

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