कविता और कहानी
बुजुर्ग नींव घर की
शोभा शाम को सब्जी खरीदने के लिए बाजार गई होती है तभी उसकी मुलाकात उसकी एक पुरानी सहेली से होती है। दोनों सहेलियां बड़ी गर्म जोशी के साथ मिलती हैं। लगभग 10 साल हो गए होंगे, दोनों को एक दूसरे के बिना देखे हुए लेकिन देखते ही दोनों तुरंत पहचान लेती है। उसकी सहेली कोमल…
26जून अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस
अपनों से प्रेम करो, गफलत से दूर रहो। नशे ने उजाड़ दी, कई जिंदगानियां। भूल गए फर्ज क्या, दूध का कर्ज क्या, छाती से चिपका कर, गायी थी लोरियां । दुर्घटना ऐसी घटी, माता की छाती फटी , नशे ने माताओं की, उजाड़ दी गोंदियां । फेरे जब सात लिए, जन्मो को साथ भये, सपने…
गर्मी पर दोहे : दुष्यंत कुमार
बढ़ रही है गर्मी, द्वार खड़ी है मौत। न जागे गर नींद से, मनाओगे रोज शोक।।१।। काट जंगल वनों को, बन गए खुद यमराज। फँसोगे अपने जाल में, वरना आ जाओ बाज।।२।। नौतपा में दिखी गर्मी, याद आ गयी नानी। पता चला इस दौर में, कितना उपयोगी पानी।।३।। जीव जन्तु भी मर रहे, खुद सराबोर…
तितली के पंख : अरुण कुमार शर्मा
क्या, तितली के पंख को तुमने, हाथ लगा कर देखा है , जिसपर वो मंडराती है, उस फल को खाते देखा है ! क्या देखी है “अरुण” कभी, तनहाई सूरज की बोलो , क्या तुमने रवि की किरणों को, पास से जाकर देखा है! चंदा हँसता है खिलकर, और तारे मुसकाते तो हैं , मुझे…
पत्नी अपने पति को बहुत प्यार से कहती है
जैसे शिव जी पार्वती के बिना अधूरे विष्णु जी लक्ष्मी के बिना अधूरे ठीक वैसे ही हर पति बिना पत्नी के अधूरे “लड़की “इज्जत माता पिता के घर की “लड़की “ सिर का ताज ससुराल की नारी “ आन बान शान परिवार की शादी के बाद कुछ यूँ कहती अपने पति से “ माँग मेरी…
बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई
कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…
