सभी रचनायें
नयी पीढ़ी बनाम पुरानी पीढ़ी : कालजयी द्वन्द्व — राजेन्द्र परदेसी
नयी पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी में सदा से मतभेद रहा है, और वह रहेगा ही। कारण यह है कि नयी पीढ़ी के पास जोश होता है। वह इस जोश पर विश्वास करके सोचती है कि भविष्य के हर अवरोध को वह सहजता से पार कर जाएगी।वहीं पुरानी पीढ़ी के पास अनुभव होता है। वह जानती…
स्कूलों की चमक से आगे सीखने की गुणवत्ता
भारत में स्कूली शिक्षा की बहस लंबे समय तक विद्यालयों की संख्या, नामांकन और बुनियादी सुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही। अब प्रश्न बदल रहा है। बच्चा विद्यालय में पहुंच रहा है या नहीं, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे बड़ा प्रश्न यह है कि विद्यालय पहुंचने के बाद वह सीख क्या रहा है, उसकी जिज्ञासा कितनी…
कल्पनाएँ , स्वप्न या सत्यमूल : आशा सहाय
कल्पनाएँ जो सामान्य शब्दों में मनोजगत की सृष्टि समझी जा सकती हैं और मानव निर्मित दृश्य और अदृश्य जगत को प्रभावित कर, उसे रंग रूप और आकार देती हैं ,वे स्वयं कहाँसे और क्यों सृष्ट होती हैंयह एक विचारणीय प्रश्न है।कल्पना से क्या ज्ञान का कोई सम्बन्ध है?क्याये सत्य के समीप होती हैं अथवा उसके…
सामनता पर मुखर हुआ समाज, छात्रों के सब्र का बाँध टूट रहा
मुद्दा : आरक्षण की गलत नीतियों से प्रभावित हो रहा सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्यमांग : जिन राज्यों अथवा गाँवों में आरक्षण की जरुरत बस वही तक सिमित कीजिये आरक्षणसुझाव : आरक्षण रिफार्म कीजिये, आरक्षण को आर्थिक स्थिति पर लागू कीजियेलेखक : पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर रांची में आंदोलनरत छात्रों…
प्रेमचंद की १४६ वीं जयंती पर उनकी पत्नी को समर्पित
‘शिवरानी देवी’ कहावत है- “ हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है।” तथा“ पुरुष की उन्नति में स्त्री का मौन किंतु अपरिहार्य योगदान निहित होता है।” इस कहावतों को चरितार्थ किया है प्रेमचंद की अर्द्धांगिनी शिवरानी देवी ने, जिन्होंने अपने मौन, संयमित एवं अनिवार्य योगदान से प्रेमचंद नामक विराट साहित्य पुरुष…
मंदिरों में दान न करें…?
पलटें तो पाएँगे कि भारत पर हुए अनेक विदेशी आक्रमणों के पीछे मंदिरों में संचित अपार संपदा भी एक प्रमुख कारण रही है। कुषाणों, हूणों और बाद के अनेक मुस्लिम आक्रमणकारियों की दृष्टि भारत की समृद्धि और मंदिरों में संग्रहित अकूत धन पर रही। सत्ता-विस्तार की महत्वाकांक्षा के साथ-साथ इस संपदा को प्राप्त करना भी…
तुमने लड़ना क्यों छोड़ दिया? – अम्ब्रीश श्रीवास्तव
माँ अक्सर कहा करती थीं,“जहाँ प्रेम होता है, वहीं लड़ाई भी होती है।” बचपन में मुझे यह बात समझ नहीं आती थी। लगता था कि प्यार और लड़ाई तो एक-दूसरे के दुश्मन हैं। लेकिन तुम्हारे साथ रहते-रहते समझ आया कि माँ कितनी सही थीं। याद है, तुम हर छोटी-छोटी बात पर मुझसे लड़ जाया करती…
सुजोक एक्यूप्रेशर ब्योल मेरिडियन” पुस्तक का भव्य लोकार्पण एवं सम्मान समारोह सम्पन्न
नई दिल्ली,6 जून 2026 हिन्दी भवन, विष्णु दिगम्बर मार्ग,आई.टी.ओ.नई दिल्ली में सुप्रसिद्ध लेखिका “डॉ. पुनीता शर्मा रेहन” द्वारा लिखित पुस्तक “सुजोक एक्यूप्रेशर ब्योल मेरिडियन” का भव्य लोकार्पण एवं सम्मान समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊंचाई…
देशभक्ति बन रही भयंकर बीमारी, महंगाई के आगे नेतागिरी भारी …!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी हमारे ऊपर जो विदेशी कर्ज बढ़ रहा है उसके लिए हमें विदेशी मुद्राओं को एक वर्ष तक संयमित खर्च करने की आवश्यकता है, इसके लिए अब जागने के बाद जब सोना ना खरीदने और पेट्रोल डीजल बचाकर अर्थात ज्यादा उपयोग ना करने का आह्वान हमारे देश…
डॉ अरुणा पाठक आभा की पुस्तक ‘रसमंजरी रामचरितमानस में रस निरुपण’ पुस्तक का हुआ विमोचन..
रसमंजरी साहित्य सृजन की संस्थापिका डॉ अरुणा पाठक आभा की पुस्तक रसमंजरी रामचरितमानस में रस निरुपण पुस्तक अनुराधा प्रकाशन नई दिल्लीद्वारा प्रकाशित, मंजुला श्रीवास्तव द्वारा संपादित श्री सूर्य नारायण गौतम वेदाचार्य जी द्वारा इसकी भूमिका लिखी गई। प्रद्युम्न नामदेव के संयोजन में मानस भवन रीवा के ऐतिहासिक सभागार में पुस्तक का विमोचन किया गया…
