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डॉ.राहुल को हिन्दी शलाका सम्मान

साहित्य मंडल संस्था,श्रीनाथद्वारा के तत्वावधान में 13-14 फरवरी को समायोजित समारोह में “हिन्दी शलाका सम्मान” प्रदान करने की घोषणा की गई है। तदर्थ, श्रीनाथजी के नमन करते हुए संस्था के प्रधानमन्त्री श्री श्यामप्रकाश देवपुराअन्य पदाधिकारियों के प्रति  विशेष आभार। राहुल जी समकालीन हिन्दी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। उनकी कृतियों सामाजिक चेतना…

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सुधार : सरकारी स्कूलों के बच्चों को ही सरकारी नौकरी में लाइये…..!

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यह सितंबर माह शिक्षक दिवस के लिए जाना जाता है। किन्तु वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का जो हाल है वह बेहद दयनीय और चिंताजनक है। पहले तो उन सभी शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करता हूँ जो आज भी स्वयं सरकारी मास्टर है, अस्सी हजार के…

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स्वतंत्रता का अधूरा आलाप

आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था।…

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गुरुग्राम में सिंधी संस्कृति का भव्य उत्सव: ‘सुहिणी शाम सिंधियत जे नाम’

गुरुग्राम: श्री झूलेलाल सेवा समिति, गुरुग्राम द्वारा सिंधी संस्कृति, कला और साहित्य को समर्पित एक भव्य सांस्कृतिक संध्या “सुहिणी शाम सिंधियत जे नाम” का आयोजन 5 जुलाई 2025 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह मनमोहक कार्यक्रम शनिवार शाम 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक अपैरल हाउस, सेक्टर 44, गुरुग्राम में आयोजित किया गया। इस आयोजन…

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02 जून का दिन वास्तव में गहन चिंतन का दिन है

आज के दिन यानी 02 जून, 1947 को भारत के शीर्ष नेताओं ने भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन के घर पर देश के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक के लिए एकत्र हुए। और वह बैठक थी भारत-पाक विभाजन की योजना के संबंध में। माउंटबेटन, जो सिर्फ़ तीन महीने पहले ही…

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सामाजिक समस्याओं में उलझने की हमारी कोशिश जारी है……

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी            मनुष्य कशेरुकी समूह का रीढ़युक्त प्राणी है। मानव व्यवहार को समझना स्वयं मानव के वश में नहीं। हमारे  जीवन में जीवविज्ञान का कोई अस्तित्व नहीं केवल हम  विभाजन में विश्ववास रखते है। हमें समाज में सामाजिक प्राणी कहा भर जाता है क्योंकि हमारे  पास…

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अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व

अक्षय तृतीया, जिसे ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए…

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एक जन कवि – रामधारी सिंह दिनकर

(23 सितंबर, 1908-24 अप्रैल, 1974) प्राचीन काल से ही, लेखकों और कलाकारों द्वारा विपत्ति के समय मानव जाति की अदम्य भावना को रेखांकित करने के लिए वीर रस या वीर भावना को अपनाया जाता रहा है। अजेय के सामने खड़े होने के इस संघर्ष का परिणाम हर बार जीत में नहीं होता, लेकिन इसने निश्चित…

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उत्कर्ष मेल 16-30 अप्रैल (सम्पादकीय )

उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र) 16-30 अप्रैल (सम्पादकीय )14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के विशाल कार्यक्रम -राष्ट्रीय-प्रादेशिक एवं जिला स्तर पर सरकारी, गैरसरकारी तथा समितियों द्वारा आयोजित किए गये, जिनमें पार्टी बाजी से इतर सबने मिलजुल कर संविधान निर्माण में अहम भूमिका अदा करने वाले डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को नमन-वंदन करते हुए ठोस लोकतन्त्र…

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भारत में वैदिक कालीन शिक्षा पद्धति

डॉ ज्योत्स्ना शर्मा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार (मो.)- 9810424170 @ j.shriji@gmail.com शिक्षा समाज और मानव विकास की आधारशिला है। जब मानव जाति के लिए शिक्षा शब्द का प्रयोग किया जाता है तब उसका अर्थ विवेक से लिया गया यानी मनुष्य की वह स्थिति जिसके अंतर्गत उसमें अंतर्निहित शक्तियों का निरंतर विकास होता है तथा उसके…

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