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संपत्ति की भूख और बिखरते रिश्ते

– डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा की धरती को लंबे समय तक पारिवारिक प्रेम, भाईचारे और संयुक्त परिवारों की संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। गांवों की चौपालों में रिश्तों की गर्माहट दिखाई देती थी। परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं था, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा और सम्मान का आधार माना जाता था।…

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प्रेम, वियोग और तड़प के कवि (विनम्र श्रद्धांजलि)

आधुनिक उर्दू साहित्य की सबसे प्रिय आवाजों में से एक, डॉ. बशीर बद्र के निधन से उर्दू कविता की दुनिया थोड़ी उदास-सी लग रही है। वे न केवल लाखों लोगों को छूने वाली रचनाओं का भंडार छोड़ गए हैं, बल्कि जीवन को हृदय के सरल लेकिन गहन नजरिए से देखने का एक अनूठा तरीका भी…

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भक्ति, बाबाओं की सत्ता और न्याय का विरोधाभास

जेल, पैरोल और धार्मिक प्रभाव के बीच उलझता भारतीय समाज – डॉ.  सत्यवान सौरभ भारत में धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है; वह सामाजिक प्रभाव, राजनीतिक शक्ति और आर्थिक संरचना का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। यही कारण है कि जब किसी बड़े धार्मिक बाबा, स्वयंभू संत या आध्यात्मिक संगठन के प्रमुख पर…

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ऐसा क्यों ?

             वन्दना को बहुत दिनों से नहीं देखा तो लगा शायद उसकी शादी हो गयी होगी ।अचानक ही व्हाट्सएप पर उसका नाम दिखा तो गरिमा से न रहा गया उसने मैसेज भेज ही दिया – “अरे वन्दना तू कैसी है ?कहाँ है ?”        कुछ समय बाद वन्दना…

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गर्मी

1 धरती सारी जल उठी, आसमान है मौन रहबर भी भटका हुआ, राह दिखाए कौन राह दिखाए कौन, पड़ा असमंजस भारी होते सब हैरान, परेशां दुनिया सारी देती सबको प्यार, हमारे दुर्गुण सहती यही मातृ रूपेण, हमारी प्यारी धरती। 2 व्याकुल जन्तु जीव सभी, हलाकान दिन रैन धूप चिलचिलाती बड़ी, करे बहुत बेचैन करे बहुत…

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