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आतंक की फैक्ट्री बनते शिक्षण संस्थान, अल फलाह जैसे और ना जाने कितने…!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी अल्पसंख्यक शिक्षा और सीबीएससी एजुकेशन के नाम पर भारत के शिक्षा व्यवस्था का नाश किया जा रहा। कई स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी शिक्षा के नाम पर धंधा कर रही और अब अल फलाह जैसी यूनिवर्सिटीयां डॉक्टर के नाम पर आतंकवादी तैयार करवा रही। माइंड वाश करने की…
दिल्ली धमाका से दहशत में लोग
राजनीतिक सफरनामा दिल्ली धमाका से दहशत में लोग : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली धमाके ने दहशत का माहौल बना दिया । विगत अनेक वर्शो से दिल्ली ऐसे धमाकों से दूर थी । इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला आतंकवादियों को वह माड्यूल है जिसमें पढ़े-लिखे डाक्टर शामिल हैं । पूरी गैंग डाक्टरों की ही है…
जिग्मे सिंगये वांगचुक : भूटान के आधुनिक निर्माण और भारत-भूटान मित्रता के शिल्पकार
भूटान के पूर्व राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक (K4) ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से देश को आधुनिकता, लोकतंत्र और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन पर खड़ा किया। उन्होंने सकल राष्ट्रीय सुख को विकास का मूल दर्शन बनाया और भारत के साथ जलविद्युत कूटनीति के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी। भारत-भूटान संबंधों को उन्होंने पारस्परिक विश्वास…
फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ: नौकरशाही, सत्ता और संवेदनहीनता
जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य बनकर, लोकतंत्र को मशीन बना देता है जहाँ नियम ज़्यादा हैं और रिश्ते कम। – डॉ. सत्यवान सौरभ हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि समाज अन्याय से भर गया है, बल्कि…
शिक्षित वर्ग में जातीय पूर्वाग्रह का स्थायित्व
संविधान ने समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों को स्थापित किया, परंतु भारतीय समाज में जाति चेतना अभी भी गहराई से विद्यमान है। शिक्षित और शहरी वर्गों में यह चेतना प्रत्यक्ष भेदभाव के बजाय सूक्ष्म रूपों में प्रकट होती है—जैसे रोजगार, विवाह और सामाजिक नेटवर्क में। आर्थिक प्रगति और आधुनिकता ने जाति को कमजोर किया…
बिहार चुनाव : कब मिलेगी बिहार को अराजकता से आजादी…
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषण एवं पत्रकार जौनपुर यूपी बिहार को अराजकता से आज़ादी कब ! यह प्रश्न हर उस व्यक्ति के जहन में है जो लालूराज का बिहार देखा है। आज यह आजादी जैसा महत्वपूर्ण स्लोगन किस बुनियाद पर बना है और कहां, जो आज लगभग बहुत से जगह पर इस्तेमाल होता है।…
बिहार चुनावःः रेबड़ियों के भरोसे
राजनीतिक सफरनामा : बिहार चुनावःः रेबड़ियों के भरोसे — कुशलेन्द्र श्रीवास्तव बिहार चुनाव अपने रंग मे रंगा चुके है । एक तरफ दीपावली और छठ जैसे महापर्व चल रहे थे वहीं दूसरी ओर नेता सारा कामकाज छोड़कर चुनाव में लगे थे । पांच साल के लिए मेहनत होती है यह ‘‘कर लो भैया आपको, माई…
मैं कैसे पढ़ूँ?
रोहन बड़े ही सहज भाव से पास आकर खड़ा हो गया,“मैम आप कहती तो हैं कि तुमलोग डॉक्टर, इन्जीनियर ,शिक्षक कुछ भी बन सकते हो, परंतु हमारे यहाँ तो दो जून का भोजन भी मुश्किल से बनता है, हमारे माँ-बाप हमें कहाँ से डॉक्टर और इन्जीनियर बनायेंगे? उसमें तो बहुत अधिक पैसे लगते हैं।”…
काल और उसके रहस्य : आशा सहाय
जब कब अब और तब जैसे शब्द निरर्थक हैं अगर इनके साथ काल नहीं जुड़ा हो।पूर्वोक्त शब्दों से हम काल को मापने का दम्भ भरते हैं। वस्तुतः भौतिक दृष्टि से इसे मापना अत्यंत कठिन है। यह अपनी व्यावहारिक सुविधा के लिए करना चाहते हैं ताकि दो घटनाओं के मध्य की स्थिति को हम मस्तिष्क मे…
My 86th Birthday Morning: A Lesson from Nature
By [Dr. M.K. Shingari], Author of 8 Books (5 Technical, 3 Non-Technical)On the morning of 1st November, I completed 85 years of my life and stepped into the 86thyear of my active and disciplined journey. My regular routine is to rest between 8:00 PMand 3:00 AM, rising at the beginning of Brahma Muhurat, a sacred…
