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डी. एम. का चश्मा

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश में बंदर डी.एम. साहब का चश्मा लेकर भाग गया । बंदर नहीं जानता डी. एम. साहब के रूतबे को । उसे तो सारे मानुष एक जैसे ही नजर आते हैं । उसने डी. एम. साहब का चश्मा देखा और छीन कर भाग गया । हो सकता है कि…

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शहीद भगत सिंह

(27 सितम्बर, 1907 से 23 मार्च, 1931) प्रारंभिक जीवन :- भगत सिंह का जन्म पंजाब के नवांशहर जिले के खटकर कलां गाँव के एक सिख परिवार में 27 सितम्बर, 1907 को हुआ था। उनकी याद में अब इस जिले का नाम बदल कर शहीद भगत सिंह नगर रख दिया गया है। वह सरदार किशन सिंह…

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महोत्सव के बाद अमृत बनाये रखने की चुनौती

रोजगार विहीन विकास किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित दांव नहीं है। बेरोजगारी न केवल हमारे मानव संसाधनों के इष्टतम उपयोग की अनुमति देती है बल्कि सामाजिक कलह और विभाजनकारी राजनीति के लिए प्रजनन स्थल भी बनाती है। शिक्षा, स्किलिंग, युवा उद्यमियों और नवप्रवर्तन कर्ताओं को उपयुक्त रोजगार और सहायता, शिक्षा और रोजगार के लिए…

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हैं नमन उनकों जो इस देश की खातिर जिए …!

आजादी का अमृत वर्ष और अब 75वे स्वतंत्रता दिवस पर देश को आह्लादित करने वाला लोकतंत्र निश्चित ही भारत के गौरवशाली इतिहास को उकेरे पर परतंत्रता के विरुद्ध निरंतर एक हजार वर्षों तक सशस्त्र संघर्ष करने के फलस्वरूप अंततः हमारा अखंड भारतवर्ष दो भागों में विभाजित होकर ‘स्वतंत्र’ हो गया। गुलामी की जंजीरों को तोड़…

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महात्मा गांधी आजादी के 75 साल बाद भी  प्रासंगिक है

लाल बिहारी लाल मुगल साम्राज्य से जब सत्ता अंग्रैजो के हाथ में गई तो पहले अंग्रैजों का व्यापारिक उदेश्य था पर धीरे-धीरे उनका राजनैतिक रुप भी सामने नजर आने लगा। और वे अपने इस कुटिल चाल में कामयाब भी हो गये । धीरे–धीरे उनके क्रिया-कलापों के प्रति जनमानस में असंतोष की भावना पनपने लगी इसी…

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हर रग में दौड़ता है खून देशभक्ति का यहां

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव 75 वर्ष हो गए हमारी स्वतंत्रता को । हम आजादी का अमृत महोत्सव मना भी रहे हैं । ‘‘जनगण मन अधिनायक’’ की मधुर स्वरलहरियां हमारे तन और मन में जोश भर रहीं हैं । हम नतमस्तक हैं अपने तिरंगे के सामने और हवा में शान से लहराता तिरंगा हमेें हमारे ‘विश्व गुरू’’ हो…

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आज़ादी का अमृत महोत्सव : डॉ नीरू मोहन ’वागीश्वरी’

याद इन्हें भी कर लो ज़रा जिनकी कुर्बानियों ने देश को आज़ादी दिलवाने का मील का पत्थर रचा… रानी गाइदिन्ल्यू भारत की नागा आध्यात्मिक एवं राजनीतिक नेत्री थीं जिन्होने भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया। भारत की स्वतंत्रता के लिए रानी गाइदिनल्यू ने नागालैण्ड में क्रांतिकारी आन्दोलन चलाया था। झाँसी की…

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ताइवान पर तनाव, अमेरिका का चाव, भारत के भाव

अमेरिका और चीन के बीच तनाव के जो मुद्दे हैं वो बने हुए हैं, चाहें वो ताइवान हों, दक्षिण चीन सागर में बढ़ता चीन का प्रभाव हो या फिर दोनों देशों के बीच चल रहा ट्रेड वॉर हो इन सभी से परे ताइवान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी साख का सवाल बनता जा…

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हर घर तिरंगा अभियान और देशभक्ति के मायने

नागरिकों के सुरक्षित और समृद्धशाली जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है; उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्धि का होना। इसलिए क्या आपको हर घर तिरंगा फहराने के साथ-साथ हर घर रोजगार की आवश्यकता ज्यादा नहीं लग रही है ? आज  आजादी के 75 साल बाद भी देश के नौजवान बेरोजगारी के चलते आत्महत्या करने को…

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हम अपना राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा कब, क्यों फहरायें ?

                                      देवेन्द्र कुमार पाठक तिरंगा तीन रंगों से बना है.केसरिया,सफेद औऱ हरा. इसके बीच  में अशोक चक्र है, जिसमें चौबीस तीलियाँ हैं. जब तिरंगा खुली हवा में आकाशीय ऊँचाई पर फहराया जाता है, तब हमारी यह संकल्प भावना होती है कि हम  सब देशवासी चौबीस घण्टे,यानी दिन-रात देश की प्रगति के लिये पूरी निष्ठा और…

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