Special Article
स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग -प्रियंका सौरभ
मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी। दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान…
नव आंग्ल वर्ष के अवसर पर हमारा विचारवाद !
यूपी में रहते हुए और लगभग तीन दशकों तक कभी कभार ही इधर उधर की यात्रा करते हुए मैं इस भूमि से लगभग कटा रहा। किन्तु भारत के इस बड़े राज्य इस भूमि को समझने का माध्यम-स्थल हो सकते हैं। दृष्टि होनी चाहिए। यहां के नगर न्यूयॉर्क जैसे नगर नहीं हैं। न्यूयॉर्क में अमीरी गरीबी…
नये साल का रोचक इतिहास
लाल बिहारी लाल नव वर्ष उत्सव मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष…
ये हितैषी बच्चियों के
भगवती प्रसाद गेहलोत अलसुबह कड़कड़ाती ठंड में धुंध अपनी चादर समेटने की मशक्कत कर रही थी । मैले-कुचले कपड़े व अधफटे चप्पल बिखरे बाल लिए दो बच्चियाँ अपने डेरे से सीधे उठकर झोला लिए बस स्टैंड आती है रात्री को भजन संध्या में फैंके गए झूठन वाले कचरे के ढेर से पन्नियाँ, प्लास्टिक, कुछ…
छोटी सी मुलाकात उपहार बन गयी
फिल्म डायरेक्टर श्री अशोक त्यागी जी से अद्भुत भेंट जी हाँ आदरणीय मित्रो फिल्म एक्टर / डायरेक्टर अशोक त्यागी जी से 3-4 बार फ़ोन पर बात हुई , मिलने की जिज्ञासा दोनों को थी कल शनिवार (पालिका केंद्र, कनाट प्लेस) में समय निश्चित हुआ और सहृदयता से भेंट हुई, उनको उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र)…
वर्तमान परिपेक्ष्य में साहित्यकारों की भूमिका
अक्षत श्रीवास्तव हम यथार्थवादी युग में प्रवेश कर चुके हैं । कल्पनाओं में अब हम नहीं जी सकते । सभी को हकीकत का दर्शन चाहिये । हम कल्पनाओं में नहीं जी सकते । हमारी कल्पनायें भी बेरंग हो चुकी हैं । हमें यथार्थ ही चाहिए । यथार्थ याने कड़वी दवा जिसके मीठेपन में भी कसैलापन…
साहित्यकारा सविता चढ्ढा को मिली “विद्या वाचस्पति” की मानद उपाधि
दिल्ली। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, गांधीनगर, ईशीपुर, जिला भागलपुर (बिहार) द्वारा साहित्यकार सविता चडढा को इनकी सुधीर्घ हिंदी सेवा, सारस्वत साधना,कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां, शैक्षिक प्रदेयों, महनीय शोधकार्यों तथा राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की अनुशंसा पर विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान दिया गया है। यह सम्मान हिंदी भवन में आयोजित…
युवाओं में अतिरेक भविष्य की चिंता से बिगड़ रहा वर्तमान ..!
कैसी विडम्बना है कि आज हमारा देश विज्ञान से कटता जा रहा है। हम भूल रहे हैं कि धर्म से नौकरियां पैदा नहीं हो सकतीं, नेताओं के पीछे चलकर रोजगार पैदा नहीं हो सकते। केवल विज्ञान ही तय कर सकता है हमारा भविष्य। फिर भी, हम धर्म, मजहब, मंदिर, मस्जिद, हिंदू, मुसलमान, बेकार के, फालतू…
कुरुक्षेत्र धर्मक्षेत्र कैसे बना
धर्म की उत्पत्ति का मुख्य आधार मानव जीवन से है अर्थात जब से मनुष्य की उत्पत्ति हुई है इसके साथ-साथ ही धर्म की उत्पत्ति हुई है। मानना उचित है क्योंकि धर्म मानव जीवन में ही पाया जाने वाला एक मानवीय गुण है। ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक दृष्टिकोण से धर्म की उत्पत्ति हुई है। धीरे-धीरे इनका विकास…
गुजरात माॅडल से भयभीत नेता
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव भाजपा के ही नेता अब गुजरात माडल से भयभीत हैं । गुजरात माडल का रंग रूप् बदल चुका है । पहले गुजरात माडल को विकास के माडल के रूप् में परोसा जाता था, इस माडल से भाजपा के नेता प्रसन्न होते थे और शेष बचे बाकी नेता भयभीत होते थे…
