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माटी में मिल गई माफियागिरी   

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘जैसी करनी, वैसी भरनी’ यह कहावत तो सदियों से लोकमानस में गूंजती आ रही है और अनेक बार इसे चरितार्थ होते हुए भी देखा है । उत्तरप्रदेश का कथित डान अब इसे चरितार्थ कर रहा है । बबूल बोओगे तो कांटे ही पाओगे सो अीतक अहमद अब कांटों का ताज पहनकर चीत्कार कर…

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नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल देवी के नवरात्र तब, लगते सभी फिजूल क्या हमारा समाज देवी की लिंग-संवेदनशील समझ के लिए तैयार है? नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है।  पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं। बहुत जगह कन्याओं का शोषण होता…

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बिनु हरि कृपा मिलही नही संता..!

भज गोविंदं भज गोविंदं गोविंदं भज मूढ़मते ! सिद्ध वाक्य है, ये और अगर आपके जीवन में सर्व सुख है , संपदा हैं  धन है , हर प्रकार के भोग विलास की  सुख सुविधाओ का  साधन है , लेकिन अध्यात्म और आत्म चिंतन  नहीं है , तो आप निरीह , व्याकुल और दरिद्र हैं ।…

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हमारी पुरातन संस्कृति का सार है हिंदू नववर्ष

हिन्दू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2080 का 22 मार्च बुधवार से शुरू हो रहा है, हिन्दू पंचाग के अनुसार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नववर्ष की शुरूआत होती है, इस तिथि को नवसंवत्सर भी कहा जाता है।महाराष्ट्र और कोंकण में इसे गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता हैं जिसे बहुत…

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‘बेरोजगारी के दौर में युवा शक्ति कौशल और शिक्षा’

युवाओं को सशक्त बनाने की कुंजी, कौशल विकास के साथ है, जब एक युवा के पास आवश्यक कौशल होता है तो वह उसका उपयोग अपनी आजीविका व दूसरों की सहायता करने के लिए कर सकता है। वह आर्थिक रूप से राष्ट्र का भी समर्थन करता है। कौशल विकास न केवल आजीविका का साधन है बल्कि…

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व्यंग्य –  नई भर्ती के तहत अब सीधे महर्षि बनाए जाने की योजना…!

 राजनीति में केचुल बदलते नेताओं के पीछे चलने वाले चच्चा और कक्का को आजकल सवर्ण बनने का चस्का लगा है । दलित ही दलित का दुश्मन है ऐसा न मानने वाले आजकल राजनीति के सांप , नेवलों और कौवों को अपना दोस्त मान बैठे है ऐसे नेवलों को  दलितों ने अपना मसीहा सांपों को  ओबीसी…

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हर क्षेत्र में विराजमान है, नारी तू ही स्वाभिमान है

आदि काल से ही नारी, शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करती रही है। जिसमें माता को आदि शक्ति के रूप में माना जाता है। उन्ही के अलग अलग रूपो का बखान हमें पढने को मिलता है।शिव शक्ति के वगैर अधूरे माने जाते है।उसी तरह हमारे इतिहास और राजा रजवाडो की कहानियों मे भी…

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समाजिक भाईचारे का पर्व है होली- लाल बिहारी लाल

भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास के साथ मनाये जाने वाला विविध रंगों से भरा हुआ हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है-होली।होली का वृहद मायने ही पवित्र है। पौरानिक मान्यताओं के अनुसार फागुन माह के पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण बाल्य काल में राक्षसणी पुतना का बध किया था…

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मेरी की व्यथा ही मेरी की कथा है

मैं सीता हूँ, विनीता हूँ, लोग मुझे देवी कहते हैं। जग जननी कहते हैं, माता कहते हैं। स्त्रियों के लिए आदर्श स्वरुपा हूँ, पति अनुगामिनी हूँ, धैर्य प्रतिरुपा हूँ, आज्ञाकारिणी पुत्री हूँ, शालिनी हूँ, कामिनी हूँ।  मेरे पिता जनक, विदेह, महाज्ञानी राजा हैं। मेरे श्वसुर सम्राटों के सम्राट, रथियों में महारथी दशरथ हैं। और पति!…

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छिलका आन्दोलन

स्वच्छ वातावरण, जैविक खेती, हृष्ट पुष्ट गायों एवं पशुओं के लिए एक सजग प्रयास “छिलका आन्दोलन” | हर वर्ग, जाती, धर्म, गरीब, अमीर, प्रत्येक संगठन, सामाजिक संस्थाओं और हर जन की भागीदारी का एक प्रयास स्वस्थ, स्वच्छ, सुन्दरतम भारत के लिए| भारतीय संस्कृति प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठसंस्कृति है | भारतीय धर्म और ज्ञान विज्ञान विश्व में…

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