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अरुणा आसफ अली

16 जुलाई, 1909 – 29 जुलाई, 1996) प्रारंभिक जीवन :- अरुणा आसफ अली का जन्म 16 जुलाई, 1909 को कालका, पंजाब, ब्रिटिश भारत (अब हरियाणा, भारत) में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता उपेंद्रनाथ गांगुली पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के बारीसाल जिले से थे, लेकिन संयुक्त प्रांत में बस गए। वह एक…

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उपन्यासकार एवं कथाकार गीतांजलि श्री को मिला 2022 का बुकर सम्मान

लाल बिहारी लाल ……………………………………………………………………………………………………….. इस साल का मैन बुकर सम्मान भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री का उपन्यास ‘रेत समाधि’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘टॉम्ब ऑफ़ सैण्ड’ के लिए दिया गया है जिसे डेजी राकवेल ने अंग्रैजी अनुवाद किया है। यह पहली बार है कि किसी भारतीय भाषा के अनुवाद को यह अवॉर्ड मिला है।………………………………………………………………………………………………….. नई दिल्ली। उपन्यासकार एवं कथाकार गितांजली श्री…

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तंबाकू छोड़ो जीवन से नाता जोड़ो

विश्व तंबाकू निषेध दिवसपर विशेष ……………………………………………………………………………………………..तंबाकू के इतिहास की बात करे तो सन 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने  पहली बार  सैन साल्वाडोर द्वीप पर  तंबाकू की खोज की थी। और अपनी दूसरी यात्रा के दैरान  स्पेन में तंबाकू के पते लेकर आए। सन1558 में  तंबाकू के बीज पूरे यूरोप महाद्वीप में फैल गए और  उपनिवेशवादियों…

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कबीरा खड़ा बाज़ार में ………..

 देश में आपसी सद्भाव का मौसम बनता बिगड़ता रहा है । इन सबके बीच दिल्ली से भाजपा नेता बग्गा की गिरफ्तारी , शाहीन बाग से बुलडोजर की बिना एक्शन वापिस लौटना , कांग्रेस का पत्थरबाजो का हिमायती होना और ताजमहल का भी ऑपरेशन कराने के खबर के बीच अब राजनीति ज्ञानवापी और मथुरा की तरफ…

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चिन्तन शिविर से  उपजे सवाल

राजनीतिक सफरनामा                                                                                                    कुशलेन्द्र श्रीवास्तव मई की तपती दुपहरी और राजस्थान की मरू भूमि पर कांग्रेस का चिन्तन शिविर आयोजित किया । कांग्रेस को वैसे भी चिन्ता और चिन्तन दोनों की आवश्यकता तो है । उनके अपने ही सदस्यों ने चिन्ता व्यक्त की और हाईकमान ने चिन्तन शिविर लगा दिया ‘‘आओ हम मिलकर चिन्तन करें’’…

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बुलडोज़र की सार्थकता

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार एवं संरक्षक उत्कर्ष मेल) आजकल अवैध क़ब्ज़ों को लक्षित करते हुए बुलडोज़र पर चर्चा आम है अनश्वर प्रेम को नज़रअंदाज़ करती नश्वर सत्ता का ही तो ये परिणाम है रक्त मास से बनी मानव देह की ज़रूरतें उतनी बड़ी नहीं हैं जितनी बड़ी उसकी अधिग्रहण की चाहतें हैं। मानव जीवन का…

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विनायक दामोदर सावरकर

(28 मई, 1883 से 26 फरवरी, 1966) प्रारंभिक जीवन                वीर सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 में महाराष्ट्र के नासिक जिले के भागुर गाँव में हुआ था। उनकी माता का नाम श्रीमती राधाबाई सावरकर और पिता श्री दामोदर पंत सावरकर था। वीर सावरकर के तीन भाई और एक बहन थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नासिक…

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सेंट्रल सेक्रेटारियट एन-जी एम्प्लॉयीज यूनियन का 18वां द्विवार्षिक कॉन्फ्रेंस का सफल आयोजन

स्पीकर हाल, कंस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग, नई दिल्ली मे दिनांक 30 अप्रैल, 2022 को सम्पन्न हुआ। इस कॉन्फ्रेंस मे अतिथि के रूप मे दिल्ली प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष माननीय के एम कर्मा ने दीप जलाकर शुभारंभ किया और अपने संबोधन में हर समय साथ रहने का भरोसा दिया। कॉन्फ्रेंस मे केन्द्रीय सचिवालय मे…

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मिले सुर मेरा तुम्हारा…..मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (सम्पादकीय)

आज एकाएक कम्प्यूटर में गीत बज उठा जो दशकों पूर्व दूरदर्शन पर खूब प्रचारित प्रसारित हुआ था – ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा––––’, इसको पंडित भीमसेन जोशी ने मुख्य रूप से स्वर दिए । यह विज्ञापन भारतीय जनमानस में एकता का संदेश पहुँचाने में सफल हुआ था ।इस बात से बात निकली…

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शुद्धिमंत्र बनें जो सदियों तक दोहराया जाएगा

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, संरक्षक) बालक हो या शावक सबकी पालिका एक भेदभाव इंसानी कुंठा प्रकृति का इरादा नेक ✍️ हम सभी अपनी माँ की गोद पर तो अपना स्वामित्व समझने लगते हैं लेकिन उस मातृत्व की गरिमा को बनाए रखने के सब दायित्व नज़रअंदाज़ कर देते हैं।परिवार और समाज से मिलने वाली शिक्षा को हम…

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