Special Article
राष्ट्रीयता के स्तम्भ है पण्डित दीनदयाल उपाध्याय !
जातिवाद से ऊपर उठकर पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अंत्योदय उत्थान का जो प्रयास प्रारम्भ किया आज वो सबके लिए अनुकरणीय है । उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ जातिवाद चरम पर है वहीं दूसरी तरफ पढ़े लिखे वर्ग का प्रतिनिधित्व भी बढ़ा है किन्तु दुखद है कि आज भी कुछ लोग जातिवाद के नाम…
अब के बरस मानव चेतना की जागृति के दीप जलाएँ
कविता मल्होत्रा (संरक्षक एवं स्थाईस्ताभ्कर) राम राज्य की आकांक्षा तो सभी किया करते हैं मगर खुद राम होने से डरते हैं।अग्नि परीक्षा महिलाओं की ज़िम्मेदारी है।आज तक द्रौपदी का चीरहरण जारी है। कितने युग बीत गए मगर उस युग की महक आज भी हर एक मन को सुवासित करती है।कौन है जो मीरा के भक्तिभाव…
मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर भगाएंगे अवसाद !
मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां ,कार्यस्थल पर तनाव निवारण कार्यक्रम, हिंसा निवारण कार्यक्रम इत्यादि को संचालित कर के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं । इससे एक शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति का निर्माण एवं एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता हैं । एक शारीरिक एवं मानसिक रूप…
गाँधी जी व शास्त्री जी (दोनों विभूतियों को नमन!)
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) 2 अक्टूबर , दो महान विभूतियों की जयन्ती (राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, जिन्हें हम बापू कहकर भी पुकारते हैं और किसानों के मसीहा कहें अथवा अपने जीवन में शून्य से शिखर तक की यात्रा तय करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी) पर बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं ।देश की जनता का…
युवा पीढ़ी के प्रेरणा स्त्रोत है- मनमोहन शर्मा ‘शरण’
लाल बिहारी लालधरती पर लोग जन्म लेते है और अपने ढंग से जीते है औऱ एक दिन इस दुनिया को छेड़कर चले जाते हैँ।यही प्रकृति का नियम है।लेकिन इस धरातल पर कुछ ऐसे महान यशस्वी भी जन्म लिए है जो हमारे बीच हैं,जो दूसरों के लिए जीते है औऱ अपने सद्कर्मों से जन मानस के…
देश की समस्याओं का नीतिगत हल जरूरी !
दुर्भाग्य है कि आजकल सत्ता से असहमत होने के अधिकार से जनता को वंचित करने की लगातार कोशिश की जा रही । किसान आंदोलन के नाम पर सरकार अपने विरोधीयों को देशविरोधी साबित कर भारतीय संविधान के असहमति और तर्क के सौंदर्य की हत्या करने एवं संविधान में दिये गये अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य के अधिकार को…
सरकारी दफ्तरों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाना जरुरी
लाल बिहारी लाल आज भारत में हिन्दी बोलने,लिखने तथा ब्यवहारिक प्रयोग करने वालों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत है फिर भी आज दुख इस बात का है कि सरकारी दफ्तरों में और न्यायालयों में अंग्रैजी का बोलबाला है । खुशी की बात ये है कि इलाहाबाद न्यायालय के कुछ जज हिदी में केस की सुनवाई…
हिन्दी दिवस पर अंग्रेजी में शुभकामनाऐं
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव (वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार, स्थायी स्तंभकार) हिन्दी दिवस मनाना तो हमारी आदत में आ चुका है, अब हिन्दी दिवस चुपचाप नहीं निकलता, भले ही हममें से बहुत सारे लोग हिन्दी को लेकर प्रहसन करते हों पर हिन्दी दिवस तो मना ही लिया जाता है । ‘‘आइए हम हिन्दी को अपनायें’’ कहने वाले लोग इसे…
मरणासन्न स्थिति में पड़े जीवितों को निकाला जाए
कविता मल्होत्रा (संरक्षक – स्थायी स्तंभकार) मरणासन्न स्थिति में पड़े जीवितों को निकाला जाए अब के बरस श्राद्ध कर्म में श्रद्धा का भाव डाला जाए ✍️ ये तो सच है कि माता-पिता के प्रति अपने संपूर्ण दायित्व निभाने वाली संतान को तीर्थ यात्रा पर जाने की ज़रूरत नहीं होती।अपने विस्तृत परिवार के साथ-साथ समाज के…
व्यंग्य- भारतीय तालिबानी
अफगानिस्तान में एक ओर नई सरकार बनी तो यहाँ दूसरी तरफ पुरानी सरकार को गिराने की तैयारी है। ये भारतीय तालिबानियों की बात ही निराली है। इन्हें सबसे ज्यादा खतरा भारत में ही नजर आता है और तंज कसना इन्हें बखूबी भाता है। थोक के भाव में जैसे कम गुणवत्ता के फल मिल जाते हैं…
