Special Article
डिजिटल इंडिया में सबसे बड़ा झोल
ऑनलाइन ठगों से सावधान एक तरफ डिजिटल इंडिया की बात कहकर तथा ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को बढ़ावा देने की बात कही जाती है कि कैशलेस ट्रांजेक्शन होंगी तभी डिजिटल इंडिया बनेगा, व्यापार करना, लेनदेन करना सुगम हो जाएगा । ठीक है, सच भी है, आजकल ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए बाजार में…
विश्व महिला दिवस पर हार्दिक बधाई
नारी शक्ति ने अपनी योग्यता, क्षमता का लोहा सभी क्षेत्रों में मनवा रखा है, अब वह कहाँ किसी से कम है. शिक्षा, व्यापार, साहित्य, खेल, विज्ञानं, नौकरी ….. प्रत्येक क्षेत्र में नित नए आयाम लिख रही हैं . अनुराधा प्रकाशन परिवार के लिए यह गर्व का विषय है कि हमें नारी शक्ति का स्नेह, आशीर्वाद,…
नफरत की लाठी तोड़ो
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) मार्च के प्रथम पखवाड़े में ‘होली’ त्यौहार है । बात ‘होली’ की करूँ या जो दिल्ली में ‘हो + ली’, उसकी करूँ । संपादकीय लिखते समय यही विचार मेरे मन में उपज रहा है । ‘होली’ त्यौहार आपसी मेलजोल एवं सद्भावना को बढ़ावा देने वाला है, आप सभी को इस…
हो रँग यही अब फागुन का
कविता मल्होत्रा (स्तंभकार-उत्कर्ष मेल) वसँत ऋतु ने अब के बरस ये कैसी दस्तक दी है, चारों तरफ रक्त-रँजित फाग का मँज़र है। कहाँ गया वो मौसम जब हर पखवाड़ा वृँदावन की पावनता से महकता था। आखिर एैसा क्या हो गया कि आज सर्वोत्तम योनि पाकर भी मानव अपनी ही चाल भूल गया है। क्यूँ चाहिए…
होली सामाजिक भाईचारे की अजब मिसाल- लाल बिहारी लाल
भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास से मनाये जाने वाला रंगों से भरा हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी उत्सुकतापूर्वक करते है और उस दिन इसे लजीज पकवानों और रंगों के साथ धूमधाम से मनाते है। बच्चे सुबह-सुबह ही रंगों और पिचकारियों के साथ…
ट्रंप का तमाशा ना बनाओ साधो (व्यंग्य)
आठ दस रंग रोगन दीवारों को देखते हुए जब आप भारत के चमकते केसरिया तोरणद्वार में प्रवेश करते हैं, आप इसे एक पार्क समझ कर तफरीह करने घुसते हैं। बगल में किसी खलियर आदमी (अरविंद केजरीवाल ) की कभी दिल्ली भी आइए की रिक्वेस्ट होती है जो आपको चाटुकार किंग जैसे किसी वाहियात खेल में…
अनुभव
वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सविता चडढा की कलम से उनका नाम डी डी त्रिपाठी अर्थात धर्म ध्वज त्रिपाठी था। वे रायबरेली के विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे । पता नहीं कहीं उन्होंने मेरी एक कहानी किसी पत्रिका में पढ़ी थी और उन्होंने उस पर प्रतिक्रिया स्वरुप अपना पत्र मुझे लिखा था । कहानी उन्हें पसंद आई थी…
भाजपा को अब संजीवनी की जरूरत !
भाजपा ने जहां – जहां रिक्त स्थान छोड़ा वहा – वहा उसे मुंह की खानी पड़ी । एक – एक करके सात राज्य हाथ से निकल गए , कारण सिर्फ एक था कि इनके पास उन जगहों पर कोई योग्य कद्दावर नेता नहीं मिला जिसे विधानसभा दल का नेता घोषित करके चुनाव लड़ा जाय, जिसे…
जी हाँ, दिल्ली जीत गई
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक -उत्कर्ष मेल) चुनाव आते हैं, चले जाते हैं । एक्जिट पोल हो–हल्ला और परिणाम के बाद शांत होकर कहीं मंथन, कहीं चिंतन होता और जिंदगी अपनी वही रफ्तार पकड़ लेती है । विभिन्न राज्यों में चुनाव होते हैं किन्तु उनकी जीत–हार के मायने पार्टी–क्षेत्र् की जनता तक सीमित होते है ।…
आपको और ‘आप’ को बधाई
कुछ नहीं बदला ,, इसकी आठ और उसके ठाठ वास्तव में कहते हैं कि नाम नहीं काम बोलता है ग्यारह को ‘आप’ की पोह बारह हो ही गयी , जी हाँ मित्रो , सबसे पहले आम आदमी पार्टी को बधाई, श्री अरविन्द केजरीवाल को बधाई , दिल्ली की जनता को भी बधाई दिल्ली बोली, दिल्ली…
