Special Article
कभी भी करो-ना तेरा-मेरा
हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी पिछले काफ़ी समय से ये जुमला जनमानस की मानसिक अवस्था की सटीक अभिव्यक्ति बना हुआ है।जिसका एकमात्र कारण है – “मैं और मेरी खुशी”! लगभग हर व्यक्ति मैं-मेरी के कोरोना से ग्रस्त है, जिसके चलते,परस्पर भेदभाव की प्रतिस्पर्धा बाज़ारों से अब हर दिल…
कमल में कीचड़
कमल कीचड़ में ही खिलता है, जब भाजपा अस्तित्व में आई, अपने चुनाव चिन्ह’कमल’को लेबढ़ चढ़ कर यही दावा करती रहीहम अब तक व्याप्त राजनीति के दलदल में,कीचड़ में,कमल की तरह ऊपर है, अलग है, पार्टी विदए डिफरेंस है बस कुछ समय तकऐसा आभास कराया, जब दो सेचौरासी ,फिर एक सौ बियासी, दो सौ बहत्तर…
सिंधिया के तीर से घायल कमलनाथ
अब तो यह तय हो ही गया है कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक भाजपा की रणनीति है । भाजपा के वायरस ने मध्यप्रदेश की सरकार को संकट में डाल दिया है । कभी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी जैसा नेता भी इस वायरस की चपेट में आ सकता है…
डिजिटल इंडिया में सबसे बड़ा झोल
ऑनलाइन ठगों से सावधान एक तरफ डिजिटल इंडिया की बात कहकर तथा ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को बढ़ावा देने की बात कही जाती है कि कैशलेस ट्रांजेक्शन होंगी तभी डिजिटल इंडिया बनेगा, व्यापार करना, लेनदेन करना सुगम हो जाएगा । ठीक है, सच भी है, आजकल ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए बाजार में…
विश्व महिला दिवस पर हार्दिक बधाई
नारी शक्ति ने अपनी योग्यता, क्षमता का लोहा सभी क्षेत्रों में मनवा रखा है, अब वह कहाँ किसी से कम है. शिक्षा, व्यापार, साहित्य, खेल, विज्ञानं, नौकरी ….. प्रत्येक क्षेत्र में नित नए आयाम लिख रही हैं . अनुराधा प्रकाशन परिवार के लिए यह गर्व का विषय है कि हमें नारी शक्ति का स्नेह, आशीर्वाद,…
नफरत की लाठी तोड़ो
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) मार्च के प्रथम पखवाड़े में ‘होली’ त्यौहार है । बात ‘होली’ की करूँ या जो दिल्ली में ‘हो + ली’, उसकी करूँ । संपादकीय लिखते समय यही विचार मेरे मन में उपज रहा है । ‘होली’ त्यौहार आपसी मेलजोल एवं सद्भावना को बढ़ावा देने वाला है, आप सभी को इस…
हो रँग यही अब फागुन का
कविता मल्होत्रा (स्तंभकार-उत्कर्ष मेल) वसँत ऋतु ने अब के बरस ये कैसी दस्तक दी है, चारों तरफ रक्त-रँजित फाग का मँज़र है। कहाँ गया वो मौसम जब हर पखवाड़ा वृँदावन की पावनता से महकता था। आखिर एैसा क्या हो गया कि आज सर्वोत्तम योनि पाकर भी मानव अपनी ही चाल भूल गया है। क्यूँ चाहिए…
होली सामाजिक भाईचारे की अजब मिसाल- लाल बिहारी लाल
भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास से मनाये जाने वाला रंगों से भरा हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी उत्सुकतापूर्वक करते है और उस दिन इसे लजीज पकवानों और रंगों के साथ धूमधाम से मनाते है। बच्चे सुबह-सुबह ही रंगों और पिचकारियों के साथ…
ट्रंप का तमाशा ना बनाओ साधो (व्यंग्य)
आठ दस रंग रोगन दीवारों को देखते हुए जब आप भारत के चमकते केसरिया तोरणद्वार में प्रवेश करते हैं, आप इसे एक पार्क समझ कर तफरीह करने घुसते हैं। बगल में किसी खलियर आदमी (अरविंद केजरीवाल ) की कभी दिल्ली भी आइए की रिक्वेस्ट होती है जो आपको चाटुकार किंग जैसे किसी वाहियात खेल में…
अनुभव
वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सविता चडढा की कलम से उनका नाम डी डी त्रिपाठी अर्थात धर्म ध्वज त्रिपाठी था। वे रायबरेली के विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे । पता नहीं कहीं उन्होंने मेरी एक कहानी किसी पत्रिका में पढ़ी थी और उन्होंने उस पर प्रतिक्रिया स्वरुप अपना पत्र मुझे लिखा था । कहानी उन्हें पसंद आई थी…
