Latest Updates

डॉक्टर सरोजनी प्रीतम कहिन

ग्रास मुर्गे उदास होते हैं काकटेल में वे बलि का बकरा बनते हैं दिग्गज के ग्रास होते हैं रीेतिकाल छात्रों ने पूछा दरबारी कवियों के राजकीय सम्मान से अभिप्राय वे बोले साहित्य के दिग्गज सलामी देते हैं सूंड उठाये अनुरोध उन्होंने साहित्यिक समारोह के निमंत्रण पत्र भिजवाये लिखा आप साहित्य के दिग्गज-कृप्या अपनी गजगामिनी भी…

Read More

दुनियादारी

दोस्त, तेरा चेहरा जो है बिल्कुल नूरानी है। सो,  तुझको  चाहने  की  हमें बीमारी  है।। उसकी आँखों में तेवर और होशयारी है। आज फिर से पड़ोसी ने की ग़द्दारी है।। दिल से दिल तक पहुँचती हैं जिनकी बातें। असल में वही बातें होती असर कारी हैं।। और बेटी से होती  हरेक आँगन में रौनक। सच …

Read More

कहानी :   सुनहरा मौका – डोली शाह

              दफ्तर जाने वाली लंबी कतारों में लगी गाड़ियों के बीच हम भी अपनी चार पहिया लेकर सपरिवार निकल चले एक लम्बे अरसे से बुलाते मित्र के पास । चलते- चलते हसीन वादियों के बीच मानो रास्ता खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। प्रकृति की सुंदर छटा, ठंडी हवाएं,  कभी बालू…

Read More

बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई

कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…

Read More

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (गीत) मातृभाषा हिंदी भाषा है

हिमालय के भाल पर सूरज सी जो दमके,वही मेरी राष्ट्रभाषा हिंदी भाषा है। सूर तुलसी ने सजाई काव्य गहनों से,है बहुत सुंदर ये अपनी और बहनों से,अजंता की मूर्ति सा जिसको तराशा है,वही मेरी मातृभाषा हिंदी भाषा है। गीत सा श्रृंगार और संगीत सा स्वर है,भाव मन के जहां बसते हिंदी वह घर है,हिंद के…

Read More

उपजी नाराजगी औऱ समस्याओं को परे रखे

पति पत्नी में घर के दैनिक कार्य ,नोकझोक आदि का सामना रोजाना होता है।वाट्सअप,फेसबुक आदि पर कई घंटे बिताना।पत्नी का पति को नहाने,चाय, बाजार से सब्जी,बच्चों को स्कूल छोड़ने आदि कई कामों के लिए आवाज लगाना।रोजमर्रा की ड्यूटी बन गई हो।पति का नहाने के समय टॉवेल, चड्डी, बनियान आदि का पत्नी से रोजाना मांगना औऱ…

Read More

कितना प्यार किया है तुमसे,

कितना प्यार किया है तुमसे, जिस दिन बिछड़ोगे, जानोगे। थोड़ा-थोड़ा करके खुद को, सौंप दिया है पूरा तुमको तोड़ो, जोड़ो या बिखरा दो, इससे क्या लेना है हमको। सहज मिलन है, शुक्र खुदा का नहीं मिलेंगे तब मानोगे। जिस दिन बिछड़ोगे, जानोगे।। थोड़ा तोलमोल सीखो तुम, शब्दों के खंजर होते हैं। बार बार दोहराने से…

Read More

मधुबन ही मधुबन हो (श्रंगार गीत)

गूंथ लिया सारा बसंत अपने जूड़े में ,मौसम कहता है तुम फागुन ही फागुन हो। होटों से लिपट लिपट मखमली हंसी तेरी,दूधिया कपोलों का चुंबन ले जाती है।झील के किनारों को काजल से बांधकर,पनीली सी पलकों में सांझ उतर आती है। महावारी पैरों से मेहंदी रचे हाथों तक,छू छू कर कहे हवा चंदन ही चंदन…

Read More

कालचक्र : कुछ सच, कुछ कल्पना

कवि और कविता का सम्बन्ध अन्योन्याश्रित ही माना जाता रहा है। यह किसी विद्वत्जन का कथन तो नहीं पर आज कवि वही है जो कविताओं की रचना करता है तथाकविता भी वही जोअपने रचयिता को कवि की संज्ञा दे सकती है। दोनों एक दूसरे के आधार हैं।आज का कवि अपनी रचनाओं में अपने अन्तर की…

Read More

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की पुण्यतिथि

विधा:-दोहा छंद पोरबॅंदर गुजरात में, करमचंद के पूत। राजनीति के चाॅंद थे, भारतवर्ष सपूत॥ मोहनदास जहान में, दो अक्टूबर जन्म। अठारह सौ उनत्रवाॅं, सन था हिन्दू धर्म॥ सत्य अहिंसा पूजते, जपें राम का नाम। आजादी में भूमिका, सत्याग्रह संग्राम॥ भारत में पदवी मिली, राष्ट्रपिता सरनाम। “लक्ष्य”महात्मा का मिला,जीवन में उपनाम॥ जीवन जीया सादगी, रहा मृदुल…

Read More