मेरी की व्यथा ही मेरी की कथा है
मैं सीता हूँ, विनीता हूँ, लोग मुझे देवी कहते हैं। जग जननी कहते हैं, माता कहते हैं। स्त्रियों के लिए आदर्श स्वरुपा हूँ, पति अनुगामिनी हूँ, धैर्य प्रतिरुपा हूँ, आज्ञाकारिणी पुत्री हूँ, शालिनी हूँ, कामिनी हूँ। मेरे पिता जनक, विदेह, महाज्ञानी राजा हैं। मेरे श्वसुर सम्राटों के सम्राट, रथियों में महारथी दशरथ हैं। और पति!…
