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महात्मा गांधी और भारत की साझा राष्ट्रीय चेतना का विचार : मनजीत सिंह

महात्मा गांधी मूलतः एक जननेता थे—ऐसे नेता, जिन्होंने लोकतांत्रिक और क्रांतिकारी राजनीति को अमल में उतारकर दिखाया। उनका राजनीतिक जीवन किसी एक विचारधारा या सीमित दायरे में क़ैद नहीं था, बल्कि उसमें समग्रता, परस्पर-संबद्धता और रणनीतिक सूझ-बूझ साफ़ दिखाई देती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके लिए केवल एक राजनीतिक संस्था नहीं, बल्कि क़ौम और वतन…

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बीमार लालू को लेकर बड़ी खबर: दिल्‍ली एयरपोर्ट पर तबीयत बिगड़ने पर फिर ले जाए गए एम्‍स

Lalu Prasad Yadav News: राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) से जुड़ी यह आज की सबसे बड़ी खबर है। मंगलवार को तबीयत खराब होने के बाद उन्‍हें चिकित्सकों की सलाह पर अचानक रांची के रिम्‍स (अस्‍पताल) से एयर एंबुलेंस से दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS, Delhi) भेजा गया। लालू…

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तब कविता कुछ कहती है

व्यथा से मन की उर्वर भूमि में भावो का रोपण होताकरुणा संग सींचा जाता शब्दों सेतब कविता कहती है। वेदना के स्वर पत्थरों पर गुजर कर पिघला देतेरस की धारा बहती कलम चलती तब कविता कहती है। हृदय की टीस आंसुओं से ना निकल कर कलम सेकरुणावर्षा होती धरा के आंचल तब कविता कहती हैं।…

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“आत्मा” : शुभांगी

कितना हल्का हल्का सा लग रहा है शरीर। अहा! जैसे सारे तनावों और विकारों को किसी ने जड़ से उखाड़ फेंका हो! ऐसा लगता है जैसे 30 -40 साल से नहीं सो पाई थी और आज इतनी गहरी नींद पूरी कर के उठी हूँ। सच बहुत फ्रेश लग रहा है। चलो अच्छा है जाने कब…

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कोरोना काल!कैसा हाल!!

बड़ी अजीब विडम्बना है, जब चार माह पूर्व जब कोरोना शुरुआती चरण में था तो लोग सजग थे,  पूरी सावधानी बरत रहे थे पर अब जब कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया है,24 लाख से ऊपर केस हो गये, रोज़ पचपन-साठ हज़ार केस आ रहे हैं,यही हाल रहा तो दिसम्बर आते आते यह संख्या…

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“मिल जाओ मोहन”

एक छोटे से गांव में मोहन अपनी मां के साथ रहता था। एक छोटा सा खेत था उनके पास। उसमें फसल उगाकर मां मोहन की परवरिश कर रही थी। मोहन एक होनहार छात्र था। कक्षा में हमेशा प्रथम आता।मेहनत से पढ़ाई करता। जो समय बचता उसमें मां की काम में सहायता कर देता। पिता का…

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नववर्ष  2025

नववर्ष आ गया……. नववर्ष आ गया , नवफूल मुस्कुराए । कलियाँ खिली दिलों मे, खुशियों के चमन में। इरादे बदल गये हैं, ख्वाहिश नई जगी है । रेतों के परिन्दे , हरियाली में मुस्कुराए। मंजिलों के नए सपने , जन्म   ले   रहे   हैं  । इरादे बुलंद देखो, मन में खिल रहे हैं । छोटे से…

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पत्तों की ताली

अमरैया की छांव तले  नन्हे नन्हे ,पांव चले । हरी-भरी, डाली में झूमे बचपन जिसकी ,गोद पले । मीठे फल और ठंडी छांव बरगद वाला, मेरा गांव । लट देखो ,धरती को चूमे मस्ती में वो सर- सर झूमे  । ज्यो  मतवाली नाव चले  अमरैया  की छांव तले।  नन्हे नन्हे पांव चले।  फल हैं जैसे,…

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जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं,वह देश मूक है

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां:-जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं;वह देश मूक है.हिंदी से हिंदुस्तान की पहचानअचूक है.हिंदी हिंदुस्तान  की लोकप्रिय  भाषा है,हिंद की एकता की  उत्कृष्ट परिभाषा है.समृद्ध हिंदी हेतु मिलकर सत्प्रयास करें,आइए!हिंदी में काम करने की शपथ लें.बच्चों को शिक्षा मिले हिंदी के ही जरिए,अंग्रेजी को उसकी दासी…

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अनुभवों का नया पिटारा खोलता  नव वर्ष 2024 ..!

एक और आंग्ल वर्ष 2023 समाप्त हो चूका है और आंग्ल नव वर्ष 2024 का दस्तक हुआ है यह वर्ष राम मंदिर स्थापना और लोकसभा चुनावों की भेंट चढ़ने वाला है। उधर कुछ लोग जान बूझकर दिवाली होली  क्रिसमस का विरोध ऐसे करते हैं जैसे उन्होंने देश का ठेका ले रखा है। उत्तर भारत में…

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