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हम सब तुम्हारे अपराधी हैं प्रियंका!

ख़ूब तड़पती रही गिलहरी गर्म तवे के भभके से सबने इसे तमाशा समझा, ताली पीटी, चले गए हम सब तुम्हारे अपराधी हैं प्रियंका! जाओ, अपने फफोलों के लिए मत तलाशो यहाँ कोई आँसू। परलोक में जाकर निर्भया को ख़बर कर देना, कि उसकी मौत पर जली मोमबत्तियों की रौशनी अब काली पड़ गई है। उसे…

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एकता,सरदार पटेल

वतन की दरदे नेहा की दवा है एकता गरीब कौम की हाजत रवा है एकता तमाम दहर की रूहे रवा है एकता वतन से मोहब्बत नहीवह क्या जाने क्या चीज़ है एकता क्या है अनेकता ******* दे रहा है ज़माना पैगामे पटेल अब न होगा फिर कब होगा सब मे मेल जाँ हथेली पे ले…

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जयहिंदी,जयहिंद’ के जयकारा को हम

डॉक्टर सुधीर सिंह जयहिंदी, जयहिंद के जयकारा को हम, मिलकर हिंद  की  सरजमीन पर उतारें। हिंदी थिरकेगी जनजीवन के अधरों पर, प्रत्येक भारतीय इसके लिए प्रयास करें। समाज और समुदाय के बीच राष्ट्रभाषा, मधुर रिश्तों की दृढ़-बुनियाद रखती है। एकजुटता,भाईचारा और राष्ट्रीयता का; अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। व्यक्ति,समाज और राष्ट्र का प्रगति-पथ; समृद्ध राष्ट्रभाषा…

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खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है

संसद के अंदर  जब  शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही  घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का  ध्यान नहीं जाता है। संसद  में  एक मिनट  के  बहस  में  व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी  जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…

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पर्यटन ,दर्शनीय स्थलों पर जाकर सुकून महसूस करें

मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के धार जिले के विकासखंड बाग़ के समीप लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर 5 वी -7 वी सदी में निर्मित 12 बौद्ध गुफाएं है । इनकी बनावट अजंता -एलोरा ,श्रीलंका ,बौद्ध गुफा की लगभग एक समान है । गुफाओं में मूर्तियां ,लाइट रिफ्लेक्टिंग पेंटिंग आकर्षकता का केंद्र है ।यहाँ पर…

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वृद्धाश्रम नहीं, सम्मानाश्रम चाहिए

लेखक : विजय गर्ग समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। आज जब जीवन की गति तेज़ हो गई है, रिश्तों में व्यावहारिकता ने भावनाओं की जगह ले ली है, तब हमारे सामने एक दर्दनाक सच्चाई उभरकर आई है — वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या।…

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हीमा

तुम द्युति गति अनन्त सीमा हो श्वासों का ऊर्जित प्रवाह ऊषा प्रस्फुट हीमा हो! °°°°°°°° तुम गति लय भारत की तुम उत्तंग शिखर पताका तुम गौरवपथधावक विजयी तुम अग्निशिखा शलाका! ••••••••• तुम धीरजधात्री धरणी तुम लक्ष्यभेदक करणी तुम एकलव्य पार्थ हो भारत अस्मिता भवतरणी! °°°°°°°° तुम जठराग्नि अभाव तुम अकिंचन दबाव हो तुम प्रभंजन नियतिकाल…

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बड़ी अम्मा

बात  आज  की  नहीं  बरसों  पुरानी  है।तब  मैं  शायद सातवीं  या  आठवीं  कक्षा  में  रही  हूँगी। सर्दियों  के  दिन  थे। अच्छी -खासी  ठण्ड  पड़  रही  थी। हम  भाई –बहन  दिन  भर  स्कूल ,खेल –कूद  ,गृह -कार्य,तू-तू  मैं -मैं और तरह -तरह की खुरपातों  में  लगे  रहते  और  रात  को  खाना  खाने  के  बाद अपनी -2…

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डॉ.राहुल का सम्मान

साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा (राजस्थान) में पूज्य आचार्य भगवतीप्रसाद देवपुरा की 10 पुण्यतिथि के उपलक्ष्य  में आयोजित भव्य समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राहुल को  06 जनवरी 2024 को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उत्तर  प्रदेश  हिन्दी  संस्थान, लखनऊ  और हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कार प्राप्त डॉ.राहुल एक ख्याति-प्राप्त आलोचक-कवि हैं।अबतक इनकी 80 पुस्तकें प्रकाशित …

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