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अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व

अक्षय तृतीया, जिसे ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए…

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मैं “कंगना ” हूं सुन लो लोगों,

(सुनीता जायसवाल फैजाबाद उत्तर प्रदेश) अबला समझने की भूल ना करनाआऊंगी कलाई में “हथकड़ी” बनकरजेवर समझने की भूल ना करना! झुक गई हूं मैं जरा सा क्योंकि,मैं अदब की परवरिश हूँमेरी झुकी पीठ को तुम ,पायदान समझने की भूल ना करना! गिरेबान खाली नहीं तुम्हारा ,दुनिया भर की करतूतों से ,मेरे पाक दामन पर तुम,उंगली…

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“स्वर्ग का द्वार”

स्कूल कई महीनों से बंद थे। बच्चे घर में रह कर परेशान हो गए थे। यही कारण था कि घर में दिन भर कोहराम मचा रहता। दिन भर चीखना चिल्लाना, मारना पीटना, रोना धोना बस यही हो रहा था। गांव से दादाजी आए तो उन्हें यह सब देखकर बहुत दुख हुआ। उन्होंने बच्चों को बुलाकर…

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एक झूठ

               एक प्रसिद्ध पत्रिका में लिखी हुई समस्या उसे अपने एक परिचित की समस्या सी लगी। थोड़ा सा और पता करने पर उसे महसूस हुआ कि यह कहानी तो शायद उसी परिचित व्यक्ति की ही है । उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर अपने मायके में रह रहीं थीं । वे उनके ही पड़ोस में रहने वाले…

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भाषायी सम्पदा से परिपूर्ण भारतीय भाषाएँ

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा भाषायी सम्पदा से परिपूर्ण भारतीय भाषाएँ हर काल और परिस्थिति में समृद्ध हैं। भारत के महान संतों, भक्ति कालीन कवियों, लोक-गायकों, मनीषी विद्वानों ने सभी भारतीय भाषाओं में ऐसा अद्भुत साहित्य सृजन किया जिसमें जगत कल्याण की भावना ने शब्द को ब्रह्म सिद्ध किया और आध्यात्मिक चेतना के स्तर तक पहुंचा दिया।…

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गायों की हो रही है दुर्दशा

भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं।  क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज…

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मोदी जी बनना हो तो बनारस आईए !

होली में सूचना आइल  कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बंग्लादेश  में होली खेलने गए थे । वहा शेख हसीना से कह रहे थे कि उन्होंने बांग्लादेश की आज़ादी के लिए सत्याग्रह किया था , बुरा ना मानो होली है । लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं है क्युकी आगे अप्रैल फूल भी था । कोई…

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आज के बदलते दौर में गीता के उपदेश कितने आवश्यक

श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश महाभारत युद्ध के दौरान योगेश्वर श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन को दिए थे।18 अध्यायों के 700 श्लोकों में निहित श्रीमद्भगवत गीता ग्रन्थ आज प्रतिदिन पढ़ने की आवश्यकता है।गीता अध्यात्म पथ पर चलना सिखाती है। निष्काम कर्म करने की राह बताती है। आत्मिक शांति चाहिए तो गीता के श्लोक अवश्य पढ़ना चाहिए। बढ़ते…

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भारतीय सेना की तरह पुलिस पर भरोसा क्यों नहीं है?

—-प्रियंका सौरभ  देश भर में हम आये दिन पुलिस द्वारा हिरासत में लिये गए लोगों की मृत्यु और यातना की घटनाों को सुनते हैं जिसके फलस्वरूप पुलिस की छवि पर दाग लगते है। यही नहीं अपराधी प्रवृति के लोगों में पुलिस के प्रति क्रूरता जन्म लेती है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अभी-अभी पुलिस वालों के…

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संस्मरण : यादगार बोहाग बिहू

बैशाख का महीना असम के लिए खास होता है। बैशाख जिसे असमिया में बोहाग कहते है, इस महीने में बोहाग बिहू मनाया जाता है। यह रोंगाली बिहू और भोगाली बिहू के नाम से भी जाना जाता है। गांवों में घर धन-धान्य से भरे होते है। भोग करने के साधन होते हैं और फल-फूल से भरे…

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