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सामाजिक समस्याओं में उलझने की हमारी कोशिश जारी है……

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी            मनुष्य कशेरुकी समूह का रीढ़युक्त प्राणी है। मानव व्यवहार को समझना स्वयं मानव के वश में नहीं। हमारे  जीवन में जीवविज्ञान का कोई अस्तित्व नहीं केवल हम  विभाजन में विश्ववास रखते है। हमें समाज में सामाजिक प्राणी कहा भर जाता है क्योंकि हमारे  पास…

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दरवाजे पर दस्तक देता कोरोना

राजनीतिक सफरनामा दरवाजे पर दस्तक देता कोरोना कुशलेन्द्र श्रीवास्तव कोरोना की फिर से वापिसी हो गई है । देश के कई राज्यों में कोरोना के मरीज मिलने शुरू हो गए हैं इनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है । इदौर में कोरोना के मरीज मिले हें जिनमें एक मरीज तो अहमदाबाद से आया है ऐसा माना जा…

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महाराणा प्रताप: स्वाभिमान का प्रतीक और स्वतंत्रता का अमर सेनानी

महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि भारतीय आत्मगौरव के प्रतीक थे। जब सारे राजपूत मुग़ल दरबार में झुक गए, तब प्रताप ने जंगल में रहना स्वीकार किया लेकिन दासता को नहीं। हल्दीघाटी की मिट्टी आज भी उनके पराक्रम की गवाह है। उनका जीवन सिखाता है कि स्वतंत्रता सुविधाओं से नहीं, संकल्प और त्याग से…

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सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है,

डॉक्टर सुधीर सिंह सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है, पाकिस्तान तब थड़थड़ाने लगता है। भारत का सामना पाक कैसे करेगा? जो भीख  मांगकर  भूख मिटाता है। जिसकी आदत  भिक्षाटन करने की, हिंदुस्तान को वह आंख दिखाता है। भीख की झोली खाली देख भिक्षुक, भूख से तब वह मिमियाने लगता है। दुनिया की नजर में  बेनकाब…

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ऑपरेशन सिन्दूर (ताटंक छ्न्द)

सेना का है शौर्य निराला, जांँबाजों की टोली है। आती जब भी बात देश की,चले खून की होली है। दुश्मन थर-थर कांँपे इनसे, बदला लेते हैं पूरा। जिसने भी छेड़ा है इनको, बना दिया उनका चूरा। बहनों का सिन्दुर है छीना,दुश्मन वह कितना पापी। सेना ने पीटा घर घुसकर, दुनिया ही उसकी नापी।। ऑपरेशन सिन्दुर…

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बेलगाम आतंकवाद एक वैश्विक समस्या बन जाएगी

पाकिस्तान के घरेलू आतंकवाद के बारे में सबूतों की कोई कमी नहीं है। इसने IC-814 का अपहरण करने वालों का साथ दिया, 26/11 मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को पनाह दी, दुनिया के सबसे वांछित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपनी सैन्य अकादमी से एक मील से भी कम दूरी पर एक सुरक्षित पनाहगाह…

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आज के दिन ही उगा था हिंदी मीडिया का सूरज

(हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दी का सफर) 19 वीं सदी के कलकत्ता की चहल-पहल भरी गलियों में, घोड़ों की गाड़ियों के शोर और ताज़ी चाय की खुशबू के बीच, एक शांत क्रांति आकार ले रही थी। 30 मई, 1826 को उदंत मार्तंड नामक एक मामूली साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू हुआ था-जिसका अर्थ है “उगता हुआ…

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आतंकवाद के जड़मूल नाश से पूर्व यह’ ऑपरेशन सिन्दूर’ रुकेगा नहीं : मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक)

22 अप्रैल को हुआ पहलगाम (जम्मू कश्मीर में) हमला जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उन परिवारों को या कहें पूरे देशवासियों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया जो जीवन भर दर्द का अहसास कराता रहेगा किन्तु उन परिवारों के साथ पूरे देश की जनता की आवाज एक सुर में उठने…

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पत्रकारिता : चुनौती एवं भविष्य : विजय गर्ग

हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर यदि सामाजिक सरोकार रखने वाली निष्पक्ष पत्रकारिता तथा पीत पत्रकारिता के बारे में बात न हो,तो हिंदी पत्रकारिता दिवस की महत्वत्ता का आंकलन नही किया जा सकता। वर्तमान परिदृश्य में पीत पत्रकारिता की प्रबलता और स्वार्थसाधनी राजनीति निजी महत्वकांक्षा के चलते पत्रकारिता मिशन न रहकर व्यवसाय बन चुका है।…

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साफ-साफ दो टूक

साफ-साफ दो टूक शब्द में कहना सबके मन भाया आज हमारे मोदी जी ने सब बापों  को समझाया टेरर टॉक अब नहीं चलेगा नहीं चलेगा टॉक और ट्रेड केवल बात pok पर होगी किया फैसला सबसे ग्रेट नहीं बहेगा साथ साथ अब खून और पानी सब सुन ले मौत, जिंदगी उन पर छोड़ी जो चुनना…

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