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गीतकार अनिल भारद्वाज “सृजन श्री सम्मान” से सम्मानित

होली के पावन पर्व पर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था *काव्य कला सेवा संस्थान* मोहनिया जनपद सीतापुर ,उत्तर प्रदेश द्वारा ग्वालियर के वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार एवं श्रेष्ठ गीतकार श्री अनिल भारद्वाज एडवोकेट को  *सृजन श्री सम्मान* से विभूषित किया गया ।   गीतकार अनिल भारद्वाज को यह सम्मान संस्थान के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित, काव्य…

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आज विश्व में आई विपदा चारों ओर है त्राहिमाम

आज विश्व में आई विपदा चारों ओर है त्राहिमामचीनी भाई ने दिया कोरोना जिसने मुसीबत में डाली है जान आज युद्ध की घड़ी है आयी पर तैयार खड़ा है हिंदुस्तानबहनों – भाईयों न घबड़ाओ होशो-हवाश से लो सब काम माना वैरी है बड़ा बलशाली पर हम भी हैं बुद्धिमानदें सफाई पर ध्यान हम खुद के,…

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आशंकाओं के भंवरजाल में नव वर्ष का उत्सव

इस एक जनवरी को उदित हुए सूरज के लाल रंग में उच्छवास नहीं है । घर की दीेवाल पर टंगें नए कैलेण्डर की चमक में भी आकर्षण नहीं है । शेष बचे पेड़ों की शाखाओं पर चिड़ियां तो चहक रहीं हैं पर इन पक्षियों की चहक मंे भी उत्साह नहीं सुनाई दे रहा है ।…

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सभ्य असभ्य इसी धरती पर।

डॉक्टर चंद्रसेन भारती सभ्य असभ्य इसी धरती पर। देव धनुज रहते आऐ। रावण से सब घृना करते  राम नाम सुन हर्साऐ। धरती से ही सोना उपजे, कोयला खान नजर आए। मंथन से कोलाहल निकला, अमृत वही नजर आए। संस्कार मिलते हे घर से, गली गलियारे मिलें नहीं। कागा धन ना हरे किसी का, कोयल किसको…

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आप और मैं

काश! आप पॉजिटिव एनर्जी से ड्राइव होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती। शायद आज आप और मैं हम होते। काश! आप न्यूट्रल  होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती । शायद आज हम हमराज होते। काश! आप  अपनों की करतूतों पर पर्दा न डालते। बल्कि मेरी ढाल बनते…

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सास गयी ससुराल गया

        जिस तरह मां के न रहने पर बचपन चला जाता है , ठीक उसी तरह सास के जाने पर भी एक बहू का रूप खत्म हो जाता है और बाकी लोग केवल पट्टीदार की भूमिका में रह जाते हैं। वह लाड़-प्यार ,डांट डपट सभी केवल याद बनकर रह जाते हैं जो जीवन भर एक…

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उजालो की चमक में ,चमचमाना जानते हैं सब

उजालो की चमक में ,चमचमाना जानते हैं सब , अंधेरो में चमकता है, उसी को जुगनू कहते हैं ! सुगम हो मार्ग, तो फिर हौसलो की बात क्या करना , विषमताओ में जीदारी, पथिक की तोला करते हैं ! गगन भर चांदनी हो तो, भला तारो की क्या कीमत , अमावस रात में, तारों को…

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गाँधी जी व शास्त्री जी (दोनों विभूतियों को नमन!)

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) 2 अक्टूबर , दो महान विभूतियों की जयन्ती (राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, जिन्हें हम बापू कहकर भी पुकारते हैं और किसानों के मसीहा कहें अथवा अपने जीवन में शून्य से शिखर तक की यात्रा तय करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी) पर बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं ।देश की जनता का…

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प्रेम की संपूर्णता–डॉ शिप्रा मिश्रा

            प्रेम में ऊब-डूब मत देना गुलाब जो मुरझा जाएँ किताबों में रखे सुषमा सौंदर्य मौलिकता सब भूल जाएँ देना इत्र में भीगे गुलाबी पत्र जिसे नोटबुक में पढ़ा जा सके नजरें बचाकर जब जहाँ जैसे जी चाहे रखा जा सके सहेजकर उन तमाम प्रेमी युगल के लिए जानते हैं जो प्रेम की मौन मूक…

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डॉक्टर प्रीतम कहिन

वर्ग उनके प्रवचन सुनकर भक्त ने पूछा आप इससे पूर्व ज्यामितिके अध्यापक थे क्या? क्यों की  आप वर्ग की बातें करते थे और अब अपवर्ग की     त्रिभूज रसिक की पत्नी को प्रेम के त्रिकोण का पता चला तो इस त्रिभुूज को भलि-भलि-भांति बांच के अपने अनुकूल कर लिया, भुजाएं खीच खांच के       सलूक…

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