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आखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार?

भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की…

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पिता (कविता-7)

है आधारशिला उन सपनों की जिस पर यह परिवार टिका जग में सर्व प्रिय उद्भोधन है उसको हमने कहा पिता। संस्कार सहित हृदय से अपने सींच रहा परिवार का उपवन ख़ुद सहकर कष्ट सारा लगा रहा तन मन धन प्रातकाल निद्रा को त्यागें कर्मस्थली की ओर भागे कार्य स्थल में करके कार्य लोटे थका हारा…

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अधिकारों की अहवेलना कितना जायज !

______ आपने चुनावों के वक्त  देखा होगा कि बातों और वादों  का मश्रफ क्या होता है !  चुनाव आने से पहले और चुनाव बीत जाने के छ माह बाद दो आपसी आभासी मित्र  फेसबुक पर वैचारिक मतभेद प्रकट करते दिख जाते है ,यहां तक कि गाली गलौज भी कर लेते है और तो और आपसी…

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क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?

समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले “दामन” केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। “दामन की प्रतिष्ठा” अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और…

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मोरारजी देसाई

(29 फरवरी 1896 से 10 अप्रैल 1995) प्रारंभिक जीवन :- मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी, 1896 को गुजरात के बुलसर जिले के भदेली नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता श्री रणछोड़ जी देसाई भावनगर में एक स्कूल अध्यापक थे और बाद में मानसिक अवसाद से ग्रस्त रहने के कारण उन्होंने आत्म-हत्या कर ली…

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चुनौती है बढ़ता तापमान, बदलता वायुमंडलीय पैटर्न।

वैश्विक समुद्री बर्फ में खतरनाक गिरावट को रोकने के लिए जलवायु कार्यवाही निर्णायक होनी चाहिए। अनुकूली नीतियों और बेहतर ध्रुवीय निगरानी से जलवायु लचीलापन बढ़ेगा। एक टिकाऊ भविष्य उत्सर्जन को कम करने और ग्रह के नाज़ुक क्रायोस्फीयर की रक्षा करने के लिए सभी के दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। कई समुदायों में जलवायु परिवर्तन…

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हिंदी भाषा भूषण की मानद उपाधि मिली.. उर्मिला को

छत्तीसगढ की साहित्यकार उर्मिला देवी उर्मि को हिंदी भाषा की अनुपम सेवा के लिए देश की प्रतिष्ठित संस्था.. साहित्य मंडल नाथद्वारा राजस्थान.. द्वारा हिंदी भाषा भूषण की उपाधि से विभूषित किया गया है ।हिंदी पखवाडे के अवसर पर संस्था द्वारा 14 से 16 सितं. 22 तक .. हिंदी लाओ,देश बचाओ.. शीर्षक से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी…

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आओ करे ये सतत प्रतिज्ञा

नारी को सम्मान नहीं तो बताओ क्या दोगे बेटी को घर में मान नहीं तो बतलाओ क्या दोगे एक घर सुधरने से बोलो क्या बदलेगा हर सोच बदलने का प्रण बोलो कब लोगे 🌹☘️ जब तक सारी कायनात ना बदले तो सब बेकार जब तक अर्न्तमन ना स्वीकारे हर तरफ है हार हर तरक्की हर…

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हिंदी हास्य नाटक : अंगूर तो मीठे थे, का होगा मंचन

पंचानन पाठक हास्य नाटक समारोह में भव्य कल्चरल सोसाइटी पंजीकृत प्रस्तुत हिंदी हास्य नाटक : अंगूर तो मीठे थे लेखक प्रेम भारती,निदेशक संजय अमन पोपली,दिनांक 5 सितंबर,21,शाम 7 बजे अक्षरा प्रेक्षागृह, आरएमएल हॉस्पिटल के साथ,नई दिल्ली। कहानी बच्चूसिंह चौरसिया व सपना पति पत्नी हैं। इनके सामने घर में मुरालीलाल वह नीलम रहते हैं। मुरारीलाल को…

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हमेशा ऑनलाइन’ रहने के मायाजाल  की दौड़ में थकते युवा

 डिजिटल पहचान की अंधी प्रतिस्पर्धा ने मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और वास्तविक अनुभवों को संकट में डाल दिया है। सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव युवाओं के मानसिक संतुलन और जीवनशैली पर गहरा असर डाल रहा है। लाइक, व्यूज़ और फॉलोअर्स की प्रतिस्पर्धा ने उन्हें एक अदृश्य दबाव में धकेल दिया है, जहाँ डिजिटल मान्यता ही…

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