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मैयत के मेरे फूल खिल उठे

मैयत के मेरे फूल खिल उठे हैं अब थोड़ा पहले आते आधा जल चुके हैं अब तुमने कहा था कि जा रहे हो अपने रास्ते तो हम भी अपने रास्ते निकल चुके हैं अब कई लम्हे पत्थरो से बात करता रहा मगर कई पत्थर पिघल चुके हैं अब आज फिर मेरी उनसे बात हुई लगा…

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भगत सिंह: “इंकलाब से आज तक”

“क्रांति बंदूक की गोली से नहीं, बल्कि विचारों की ताकत से आती है।” भगत सिंह का जीवन केवल एक क्रांतिकारी गाथा नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रतीक है। उनकी शहादत से पहले उनके विचारों की ताकत थी, और उनकी शहादत के बाद भी उनका प्रभाव अमर है। आज जब हम आर्थिक असमानता, सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार…

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अन्य जातियों के आंदोलन से सीखने की जरूरत , सवर्णों की निजी राजनीतिक लिप्सा पतन का कारण

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  ब्राह्मण  संगठनों को भी आगरा राजपूताना आंदोलन से सीखना चाहिए कि अपने जाति के अधिकारों और सम्मान के प्रति जागरूकता कितनी आवश्यक है ! आन्दोलन का मतलब किसी का अपमान अथवा तोड़फोड़ नहीं  अपितु आगामी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई लड़ना है…

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समर्थन

विधवा शब्द कहना कठिन  उससे भी कठिन अँधेरी रात में श्रृंगार का त्याग  श्रृंगारित रूप का विधवा में विलीन होना जीवन की गाड़ी के पहिये में  एक का न होना चेहरे पर कोरी झूठी  मुस्कान होना  घर आँगन में पेड़ झड़ता सूखे पत्ते  ये भी साथ छोड़ते  जीवन चक्र की भाति  सुना था पहाड़ भी…

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‘मेरी आवाज़ ही पहचान है गर याद रहे’ के गायक भुपिंदर सिंह नहीं रहे : लाल बिहारी लाल

+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++देश दुनिया के प्रसिद्ध गायक भूपेंद्र सिंह ने दिल ढूंढ़ता है फिर वही, एक अकेला इस शहर’, ‘किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है’, ‘होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा’ जैसे गानों से श्रोताओं के बीच अपना मुकाम बनाया। उनके निधन से संगीत जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है।++++ +++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++ नई दिल्ली। गजल गायक…

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साहित्य की अदालत।
कचहरी मे रीमा सिंन्हाजी ने लगाई हाजिरी।।

साहित्य की अदालत। साहित्य की कचहरी। अब देना होगा जवाब ।साहित्यकारों को भी, क्या लिखते हैं? क्यों लिखते हैं ?क्या है उनकी समाज के प्रति जवाबदेही??समाज के वर्तमान समय में साहित्य के प्रति अभिरुचि क्या है। आज के साहित्यकारों का रुझान कैसा होना चाहिए साहित्य के प्रति।ऐसे ही कुछ ज्वलंत प्रश्नों को लेकर शुरू की…

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बुजुर्ग की झोली में खुशियां भर दीजिए

बुजुर्ग की झोली में खुशियां भर दीजिए बुजुर्ग की यादाश्त कमजोर हो जाती है, बेचारे से  अक्सर  गलतियां हो जाती हैं. बेवजह  उन्हें  उलहना  सुनना पड़ता है, जिल्लत की जिंदगी  ढोनी पड़ जाती है. दिल की बात कहें  तो वे  किससे  कहें? कोई भी हमदर्द उनकेआसपास नहीं है इसलिएअकेले में वे चुपके से रो लेते…

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जीवन का आधार योग

योग: कर्मसु कौशलम् अर्थात कार्य में कुशलता ही योग है योग का अर्थ है जुड़ना जब हम किसी कार्य या विचार के साथ जुड़ जाते हैं तो वह योग कहलाता है योग हमारे तन और मन को जोड़ता है योगिक क्रियाएं ना केवल शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करती हैं अपितु मन पर भी सकारात्मक प्रभाव…

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संपत्ति की भूख और बिखरते रिश्ते

– डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा की धरती को लंबे समय तक पारिवारिक प्रेम, भाईचारे और संयुक्त परिवारों की संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। गांवों की चौपालों में रिश्तों की गर्माहट दिखाई देती थी। परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं था, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा और सम्मान का आधार माना जाता था।…

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नोएडा में 26 जनवरी से 30 जनवरी तक नाट्य-उत्सव का आयोजन

नोएडा में 26 जनवरी से 30 जनवरी तक नाट्य-उत्सव का आयोजन किया गया। यह जाने-माने लेखक, इतिहासकार, अभिनेता और फिल्मकार दिनेश कपूर और नोएडा प्राधिकरण के सानिध्य द्वारा सेक्टर 91 के पंचशील कॉलेज के 700 सीट वाले अडिटोरियम में संयोजित किया गया। इस प्रकार का यह पहला आयोजन था। दिनेश कपूर मानते हैं की गंभीर…

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