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प्रयागराज भगदड़: प्रशासनिक लापरवाही या भक्तों का उन्माद।

एक पौराणिक शहर की सीमाओं पर विचार करना चाहिए, जिसे अपनी धार्मिक विरासत को बनाए रखते हुए आठ करोड़ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है। दस लोगों के लिए डिज़ाइन की गई जगह में सौ लोग कैसे रह सकते हैं? यह विचार करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है। इसके अलावा,…

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बेरोजगारी का शोर बनाम समाधान – राजेंद्र परदेसी

आज शिक्षा और बेरोजगारी की बहुत बात की जाती है। नेताओं से लेकर चाय की दुकान तक यही चर्चा है। पर क्या कभी हमने सोचा है कि समस्या की जड़ कहाँ है? क्या कोई भी सरकार, चाहे वह किसी भी राज्य या देश की हो, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से निकलने वाले हर विद्यार्थी को सरकारी…

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गांठे अंतर्मन की

जब से रेनू के देवर का रिश्ता तय हुआ था, रेनू के व्यवहार में एकदम परिवर्तन आ गया। देवरानी के लिए हो रही तैयारियों को देखकर उसके मन में जलन उत्पन्न होती। हर वक्त अपने समय की तुलना करती। घर में कलेश तक काटने लगती। उसका पति शाम को थका हारा घर आता। रेनू उसे…

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पत्तों की ताली

अमरैया की छांव तले  नन्हे नन्हे ,पांव चले । हरी-भरी, डाली में झूमे बचपन जिसकी ,गोद पले । मीठे फल और ठंडी छांव बरगद वाला, मेरा गांव । लट देखो ,धरती को चूमे मस्ती में वो सर- सर झूमे  । ज्यो  मतवाली नाव चले  अमरैया  की छांव तले।  नन्हे नन्हे पांव चले।  फल हैं जैसे,…

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हिमालय देवभूमि को सुरक्षित रखना समय की जरूरत है।

(उत्तराखंड हिमालय देवभूमि के रूप में उभरा है और यह हिंदू तीर्थयात्रा के केंद्र विकसित हुआ है मगर प्राकृतिक आपदाएं इसको विनाशक बना रही है. पिछले एक दशक में हाल की पारिस्थितिक नाजुकताओं को देखते हुए, लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ धरोहर स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक संकट प्रतिक्रिया तंत्र और समाधान करना…

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संकल्प

दीपू ज्यादातर विद्यालय में देरी से ही पहुँचता था । देर से आने वाले बच्चों की अलग लाइन बनवाई जाती है तथा उनका नाम भी उनकी कक्षा के अनुसार लिखा जाता है ताकि उनके कक्षाध्यापक उन्हें जान सकें और समझा सकें । उस रजिस्टर में नवीं कक्षा में पढ़ने वाले दीपू का नाम एकाध दिन…

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सावन का भोर

(ग़ज़ल) सावन का ऐसा!भोर होते देखा। घनों काआपसीशोर होते देखा। ब्रह्माण्ड की थी ऐसी जगमगाहट। धरा को सुंदरऔर गोर होते देखा।                   सावन का ऐसा।।।।। पवन के झोंके हिलाए वटों को। बारिश का पानी जोर होते देखा।                    सावन का ऐसा।।।।। फूली चमेली है घर पर जो मेरे। उसकोभी मौजे विभोर होते देखा।                     सावन…

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एसआईआर का घमासान : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा बिहार राज्य में एसआईआर को मिली अपार सफलता के बाद अब चुनाव आयोग ने देश के अन्य बारह राज्यों में एसआईआर सर्वे कराना शुरू कर दिया है । एसआईआर सर्वे को लेकर विपक्ष की त्यौरियां चढ़ी हुई हैं तो जाहिर है कि घमासान मचा हुआ है । दरअसल एसआईआर सर्वे को लेकर विपक्ष…

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लव आजकल

कविता मल्होत्रा (स्तंभकार उत्कर्ष मेल) यदि किसी बच्चे को जन्म के तुरँत बाद केवल ऊपरी ख़ुराक पर किसी हिंसक व्यक्ति के सान्निध्य में पाला जाए तो उसका व्यक्तित्व कैसा होगा?  बिन माँ के बच्चे जैसा ही होगा ना?  लेकिन हम सब तो भारत माता के बच्चे हैं फिर हमारे वजूदों में इतनी व्याधियाँ कहाँ से…

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पुराने हांडी में नया चावल पका रहें धनाढ्य नेता .!

बहुत पुराने वक्त से हम सुनते आ रहे हैं कि जनतंत्र, जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन होता है। जनतंत्र में जनता होती थी, सरकार होती थी, चुनाव होते थे, नीतियां होती थी, संसद और विधायकाऐं होती थीं, जिनमें जनता द्वारा सरकार को चुना जाता था। सरकार जनता के कल्याण के…

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