नींद से जागो
आज फिर रोज की तरह विवश हो गयी हूं ,समाज में हो रही अपराधिक घटनाओं के बारे में सोचने पर! क्या करूं मन का आक्रोश किस से सांझा करूं, क्योंकि यहां सभी धृतराष्ट्र हैं और जो नहीं है वह धृतराष्ट्र बने रहने को विवश हैं ,क्योंकि सत्य बोलने का हश्र हम सभी देख रहे है!यह…
