Latest Updates

नींद से जागो

आज फिर रोज की तरह विवश हो गयी हूं ,समाज में हो रही अपराधिक घटनाओं के बारे में सोचने पर! क्या करूं मन का आक्रोश किस से सांझा करूं, क्योंकि यहां सभी धृतराष्ट्र हैं और जो नहीं है वह धृतराष्ट्र बने रहने को विवश हैं ,क्योंकि सत्य बोलने का हश्र हम सभी देख रहे है!यह…

Read More

‘भगवत प्राप्ति के साधन’ पुस्तक का हुआ भव्य लोकार्पण

जांगिड़ ब्राह्मण शाखा सभा उत्तम नगर पुस्तक विमोचन समारोह जांगिड़ ब्राह्मण जिला दक्षिणी पश्चिमी एवं शाखा सभा उत्तम नगर के सौजन्य से प्रभु श्रीराम जयंती रामनवमी के शुभ अवसर पर जांगिड़ ब्राह्मण धर्मशाला द्वारका मोड़ के परिसर में मासिक हवन यजमान युगल श्री रामपाल ‘जांगिड’  एवं युगल श्री जय भगवान मलिक के सानिध्य में किया…

Read More

‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर,

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर, भारत माता धन्य   हो गई थी. आज भी वैसी संतान के लिए, व्याकुल हो रही है  माँ भारती! विषमता से भरे इस समाज में, देशभक्तों की बहुत ही कमी है. परेशान  भारत माता कहती है, कोईअब महात्मा गांधी नहीं है. बापू! ईमानदारी की पूछ नहीं, दिव्य-दृष्टि से तुम…

Read More

सहयोग

भावना तेज कदमो से चली जा रही थी उसे पता था कि निश्चय आज डांट मिलेगी । स्कूल से घर की दूरी को भावना ने तेज तेज चलते हुए पास बनाने की कोशिश की । पर फिर भी टाइम से नही पहुँच पायी । जब पहुँची तो प्रार्थना     हो चुकी थी । उसने जल्दी से…

Read More

सफलता और पूजा एक दूजे के पूरक

कि आपको यह मुकाम हासिल करने में किन परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पर पूजा जी ने बताया कि लगभग दो साल से सोशल मीडिया पर काम कर रही हूँ। मेरे परिवार में मेरे दो बच्चे मेरे पति और मेरे मम्मी पापा है। मैंने दो साल पहले वे नहीं सोचा था कि एक वीडियो…

Read More

देश की तरक्की के लिए धन और ब्रेन, ड्रेन को रोकना जरूरी*

(राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के पांच साल) स्कूल समाजीकरण के प्राथमिक माध्यम के रूप में नागरिकों के निर्माण में पहला और सबसे महत्वपूर्ण घटक है। इवान इलिच ने अपनी पुस्तक ‘डिस्कूलिंग सोसाइटी’ (1971) में तर्क प्रस्तुत किया है कि “शिक्षा का संस्थागतकरण एक अति-संस्थागत समाज के निर्माण को गति प्रदान करता है। शिक्षा प्रणाली एक…

Read More

व्यंग्य – कैशलेश होकर ये कहां आ गए हम….

मोबाइल आया घड़ी का ज़माना गया, लैपटॉप आया टेलीविजन का जमाना गया, एंड्राइड फोन आया रेडिओ का जमाना गया और अब तो हद ही हो गई ऑनलाइन पैमेंट आया बेचारे पर्स का जमाना गया। अति मॉडर्न दिखने के चक्कर में युवा वर्ग अपने पास कैश नहीं रखता। जो रखते भी हैं उनके पास खुल्ले पैसे…

Read More

खादी

बिजली शिक्षा , नाली सडक और स्वास्थ्य  छोड़ो मित्रो ये सब चिन्ता , कुछ  खादी की बात करे रेशमी पैबन्द से हार जाए, तो भी कोई बात नहीं खादी को हिंदुस्तान कह देना भी ,कम बड़ी बात नहीं खादी बनने की प्रक्रिया ने बतलाया आज मुझे तन ढकने से लेकर खादी राष्ट्रध्वज तक  मान तुझे…

Read More

मगर….

खफा हो गए मुझसे मेरे ही शब्द बहुत सोचा मगर कुछ लिख पाया नहीं। एक नगमा था जो गाती थी कभी मैं आज बहुत सोचा मगर याद कुछ आया नहीं। ये जो बदली थी न ये कल भी थी बरसी बहुत टूटकर मगर मेरे मन को भिगाया नहीं। ये जो राह गुजर रही है आना…

Read More

हृदय परिवर्तन

“अच्छा माँ, मैं चलता हूं ऑफिस को लेट हो रहा है। शाम को थोड़ा लेट आऊंगा आप और पापा टाइम से डिनर कर लेना।” अंकित ने ऑफिस का बैग हाथ में पकड़ते हुए कहा।          “ठीक है बेटा, घर आते टाइम कुछ सामान भी लेते आना। समान के लिस्ट की पर्ची तुम्हारे बैग में रख…

Read More