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रश्मि श्रीधर की 2 कविता एवं परिचय

1 क्या खोया ,क्या पाया अतीत के पन्नों को जब पलटा मैंने….तब देखा ,क्या खोया,क्या पाया….धोती-कुर्ता को छोड़,जींस-टाप क्या पहन लिया….चरण स्पर्श को छोड़,हाय-बाय को अपना लिया….दादी-नानी के रिश्तों को भुला दिया,व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर को अपना लिया…अतीत के…..अपने ही घर को मकान बना दिया,नयी दुनिया को अपना मुकाम बना लिया,समय को सपनों की दुनिया में…

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गजल : देवेन्द्र पाठक महरूम

पुरखों के गांव खेत बाग वन उजाड़कर फैलाओ न बदबू गड़े मुर्दे उखाड़कर अमरौती तो खाकर नहीं आये हो तुम यहां जाओगे तुम भी आखिरी कपड़ा उतारकर हम हैं तबाह अपने भी हैं तुमसे परेशां हालात रख दिया जो बेतरह बिगाड़कर कैसी हमारी जिंदगी गांवों में आज भी दो दिन हमारे साथ देखना गुजारकर चुप…

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हमारा राष्ट्र निशान (कविता)

हमारा प्यारा राष्ट्र निशानलाल किले पर फहर रहा है वो भारत की शानहमारा प्यारा राष्ट्र निशानइसकेे नीचे आजादी की हमनें लड़ी लड़ाईजिसके कारण अंग्रेजों को लैनी पड़ी विदाईये भारत की आन बान है ये भारत की शान हमारा प्यारा राष्ट्र निशानभारत के उन्नत मस्तक का यह है प्रथम प्रतीकरहे एकता पूर्ण देश में यह देता…

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Russia Ukraine War LIVE: रूस और यूक्रेन के बीच चौथे दिन भी जंग जारी, रूसी सेना ने खार्किव में गैस पाइपलाइन को किया तबाह

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का आज चौथा दिन है। रूस और यूक्रेन के बीच हालात लगातार बिगड़ते ही जा रहे हैं। रूस की सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव तक पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच अब आमने सामने की जंग हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि गुरुवार…

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“साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग” पुस्तक का लोकार्पण

विज्ञानं भवन नई दिल्ली में इंडियन ब्रेव हार्ट्स संस्था द्वारा आयोजित सम्मान लोकार्पण समारोह में टेक्निकल प्रोफेशनल एजुकेशन इन इंडिया के डायरेक्टर डॉ प्रभाकर राव गोविन्द राव चावरे द्वारा लिखित एवं श्री रामानुज सिंह ‘सुन्दरम’ द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘साइंस फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग’ का लोकार्पण धर्माचार्य श्री सुधांशु महाराज जी, एम पी श्री मति सुनीता दुग्गल,…

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प्यासे पंछी

***प्यासे पंछी*** वो भी तो एक ज़माना होता थाघर में हमारा चहचहाना होता थाअन्न के दाने और जल भी जबहमारे लिए भी घर में होता था…. घर में घोंसला भी बन जाता थातिनकों का महल सज जाता थानन्हें नन्हें बच्चों के कलरव सेघर गुंजायमान हो जाता था….. पर आह..!! मनुष्य ये क्या कियावृक्ष काट के…

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राखी के दोहे

धागा यद्यपि सूत का,पर दृढ़ औ’ मजबूत । बहिन-सहोदर नेह का,बन जाता जो दूत ।। पर्वों का यह पर्व है,जिसमें रक्षा,नेह । अंतर्मन उल्लास में,होती पुलकित देह ।। धागा बस इक माध्यम,पलता है विश्वास । जिसमें रहती निष्कपट,मीठी-सी इक आस ।। बचपन की यादें लिये,बिखरे मंगल गान । सम्बंधों में है सजा,संस्कार का मान ।।…

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अनुराधा प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा ‘पुस्तक लोकार्पण, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन

7 दिसम्बर 2024, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में अनुराधा प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा ‘पुस्तक लोकार्पण, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि महर्षि यूनिवर्सिटी के महानिदेशक, अनुराधा प्रकाशन के मुख्य संरक्षक प्रोफेसर (ग्रुप कैप्टेन) ओ पी शर्मा जी, अति विशिष्ट अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय गीतकार,…

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बूढ़ा-बुजुर्ग जब वृद्धाश्रम में बस जाता है

सिर पर बोझ जब भीअसह्य हो जाता है, आदमी तुरंत  उसे उतार कर रख देता है. इस भरी  दुनिया में  सिर्फ माता-पिता ही, संतान की जिम्मेवारी जीवन भर ढोता है. फूल समान लगता है सबों का बोझ उसे, माँ-बाप  मुस्कुराकर उसे उठाता रहता है. खुद के बुढ़ापा का बोझ  भूल  जाता वह, गदहे की तरह…

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हिन्दी फैल रही दुनिया में

हिन्दी हिन्दुस्तान की ही, रही नहीं अब भाषा फैल रही है दुनिया में, बन जन-जन की आशा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. आजादी में फर्ज निभाया, बनके जैसे फौजी दसों दिशा के लोग बने थे, अजब मनमौजी बनी देश की भाषा यह, दुनिया की अभिलाषा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. दुनिया में हिन्दी बिना अब,…

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