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व्यंग्य –  नई भर्ती के तहत अब सीधे महर्षि बनाए जाने की योजना…!

 राजनीति में केचुल बदलते नेताओं के पीछे चलने वाले चच्चा और कक्का को आजकल सवर्ण बनने का चस्का लगा है । दलित ही दलित का दुश्मन है ऐसा न मानने वाले आजकल राजनीति के सांप , नेवलों और कौवों को अपना दोस्त मान बैठे है ऐसे नेवलों को  दलितों ने अपना मसीहा सांपों को  ओबीसी…

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हर क्षेत्र में विराजमान है, नारी तू ही स्वाभिमान है

आदि काल से ही नारी, शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करती रही है। जिसमें माता को आदि शक्ति के रूप में माना जाता है। उन्ही के अलग अलग रूपो का बखान हमें पढने को मिलता है।शिव शक्ति के वगैर अधूरे माने जाते है।उसी तरह हमारे इतिहास और राजा रजवाडो की कहानियों मे भी…

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चलाचली

जीवन की नाव सरक रही है  सासों की ईंधन पा धीरे-धीरे;   कभी गहरे जा खेले झिझरी    खाते हिचकोले नदिया तीरे। नपी तुली भरी हुई है ईंधन  जाने कब उखड़ जाये सांस;   उड़े प्राण पखेरु तज काया    दिखे न दूर तक कोई आश। नाप तौल कर व्यय करना  व्यर्थ का न करना…

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गीतकार अनिल भारद्वाज “सृजन श्री सम्मान” से सम्मानित

होली के पावन पर्व पर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था *काव्य कला सेवा संस्थान* मोहनिया जनपद सीतापुर ,उत्तर प्रदेश द्वारा ग्वालियर के वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार एवं श्रेष्ठ गीतकार श्री अनिल भारद्वाज एडवोकेट को  *सृजन श्री सम्मान* से विभूषित किया गया ।   गीतकार अनिल भारद्वाज को यह सम्मान संस्थान के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित, काव्य…

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नारी के बिना अधूरी है दुनिया : लाल बिहारी लाल

हमारी भारतीय संस्कृति ने सदैव ही नारी जाति का स्थान पूज्यनीय एवं वन्दनीय रहा है, नारी का रूप चाहे मां के रूप में हो, बहन के रुप में हो, बेटी के रुप में हो याफिर पत्नी के रूप में हो सभी रुपों में नारी का सम्मान किया जाता है। यह बात आदिकाल से ही हमारे…

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समाजिक भाईचारे का पर्व है होली- लाल बिहारी लाल

भारत में फागुन महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन हर्षोउल्लास के साथ मनाये जाने वाला विविध रंगों से भरा हुआ हिदुओं का एक प्रमुख त्योहार है-होली।होली का वृहद मायने ही पवित्र है। पौरानिक मान्यताओं के अनुसार फागुन माह के पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण बाल्य काल में राक्षसणी पुतना का बध किया था…

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लोकार्पण : ‘आधुनिक परिप्रेक्ष अयोध्या’ : पुस्तक

विश्व पुस्तक मेला में डॉ.राहुल की नवीनतम पुस्तक“आधुनिक परिप्रेक्ष्य में अयोध्या” का लोकार्पणसुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं समालोचक प्रो करुणाशंकर उपाध्याय, अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, मुम्बईविश्वविद्यालय ने किया।उन्होंने कहा कि यह अत्यन्तमहत्वपूर्ण और उपयोगी पुस्तक है।इसमें अयोध्या केइतिहास से संबंधित अनेक ऐसी दुर्लभ जानकारियांदी गई हैं जो जिज्ञासा जागृत करती हैं।इतिहास केपरिप्रेक्ष्य में भारतीय संस्कृति के अध्येता प्रसिद्धविद्वान…

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विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में पुस्तकों के विमोचन के साथ भव्य काव्य गोष्ठी

दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में सोशल ऐंड मोटिवेशनल ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित एकल एवं साझा पुस्तकों के विमोचन का भव्य आयोजन लक्ष्मी प्रकाशन के बुक स्टाल पर संपन्न हुआ। पुस्तकों के रचनाकार एवं उपस्थित पुस्तक प्रेमियों की उपस्थिति में सोशल ऐंड मोटिनेशनल ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता सिंह एवं संस्था के…

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समर्थन

विधवा शब्द कहना कठिन  उससे भी कठिन अँधेरी रात में श्रृंगार का त्याग  श्रृंगारित रूप का विधवा में विलीन होना जीवन की गाड़ी के पहिये में  एक का न होना चेहरे पर कोरी झूठी  मुस्कान होना  घर आँगन में पेड़ झड़ता सूखे पत्ते  ये भी साथ छोड़ते  जीवन चक्र की भाति  सुना था पहाड़ भी…

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मेरे सरताज ना आएंगे

होली में सब रंग आएंगे,प्यासे तीर उमड़ आएंगे।पर ए रंगों की बारात,मेरे सरताज ना आएंगे। सपनों में रंग डाला तुमको,प्यासी पलकों के काजल से,भिगो दिया भीगी अंखियों ने,अंसुओं के खारे बादल से । इंद्रधनुष कांधों पर रखकर,रंगों के कहार आएंगे ,पर ए सतरंगी बरसात ,मेरे सरताज ना आएंगे। सखियों के अधरों से रह-रह,मधुर मिलन के…

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