बिनु हरि कृपा मिलही नही संता..!
भज गोविंदं भज गोविंदं गोविंदं भज मूढ़मते ! सिद्ध वाक्य है, ये और अगर आपके जीवन में सर्व सुख है , संपदा हैं धन है , हर प्रकार के भोग विलास की सुख सुविधाओ का साधन है , लेकिन अध्यात्म और आत्म चिंतन नहीं है , तो आप निरीह , व्याकुल और दरिद्र हैं ।…
