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प्रिये नव सम्वत्सर बन आना

सभी मौसम सभी ऋतुओं को संग ले आना।प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना। सरसों के फूल बन के यादें तेरी आतीं हैं।मुझसे गेहूॅं की बालियों सी लिपट जातीं हैं। अपनी यादों के संग एक बार आ जाना,प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।सभी मौसम सभी ऋतुओं को संग ले आना। जब भी…

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अवध में राम आए हैं

 – रवीन्द्र जुगरान      कलयुग में त्रेतायुग के, सरकार आए हैं।     देखो-देखो आज अवध में, राम आए हैं।। जग नियंता सीताराम, मन मंदिर में बसे हुए।  भारत की माटी में खेलकर , दशरथ नंदन बढ़े हुए।। जीवन में संबंधों की, मर्यादा लाए हैं। ग्राम- नगर में खुशियों के, अम्बार छाए हैं।।  …

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आज विश्व में आई विपदा चारों ओर है त्राहिमाम

आज विश्व में आई विपदा चारों ओर है त्राहिमामचीनी भाई ने दिया कोरोना जिसने मुसीबत में डाली है जान आज युद्ध की घड़ी है आयी पर तैयार खड़ा है हिंदुस्तानबहनों – भाईयों न घबड़ाओ होशो-हवाश से लो सब काम माना वैरी है बड़ा बलशाली पर हम भी हैं बुद्धिमानदें सफाई पर ध्यान हम खुद के,…

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मीडिया और महिला

इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है कि भारतीय प्रेस में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति पिछले एक दशक में पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है। उन्हें हर जगह स्पॉट किया जाता है – जहां भी समाचार उत्पन्न होता है, समाचार डेस्क को संभालना, संस्करणों की निगरानी करना और न्यूज़रूम में चारों ओर…

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लड़कों के साथ बेड टच

मम्मी में स्कूल नहीं जाऊंगा, स्कूल नहीं जाऊंगा। छोटा सा बच्चा माधव नींद में चिल्ला रहा था। माधव की मम्मी नेहा को बड़ी विचित्र लगी उसकी यह हरकत। ऐसा तो पहले माधव ने कभी नहीं किया नींद में। माधव तो 5 साल से लगातार स्कूल जा रहा है। पढ़ने में भी खूब अच्छा है। कभी…

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राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है : महात्मा गांधी

महात्मा गांधी ने अदालती कामकाज में भी हिन्दी के इस्तेमाल की पुरजोर पैरवी की थी। वे कहते थे, देश की उन्नति के लिए राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि अपनों तक अपनी बात हम अपनी भाषा द्वारा ही पहुंचा सकते हैं। अपनों से अपनी भाषा में बात करने में…

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कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता है

लैंगिक भेदभाव का मूल कारण भारतीय समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक मन है. हालांकि अब ये शहरीकरण और शिक्षा के साथ बदल रहा है, फिर भी एक के लिए लंबा रास्ता तय करना है. सामाजिक कंडीशनिंग और कठोर लिंग निर्माणों की घटनाओं के कारण असमान संतुलन बना हुआ है) —-प्रियंका सौरभ रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,…

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ये भी एक रास्ता

अनिल बड़ी मुश्किल से सांस ले पा रहा है।आखिर आगे ढींगू मंदिर की खड़ी चढ़ाई है, पहुंचना भी बौद्घ गोंपा तक है।पिता जी ने किसी जमाने में यहां शिमला में सस्ते में ज़मीन ले ली थी फिर गांव छोड़ यहीं के हो कर रह गए  थे। अनिल अब नौकरी के सिलसिले में चंडीगढ़ ज़्यादा रहता…

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“करें नारी का सम्मान सभी जन”

नारी   मानवता की  पहचान , भरती है  सबके अन्दर जान । होती  सभी  गुणों  की  खान , करें  सभी   उसका   सम्मान ।। घर  की  इज्जत  होती  नारी , करती   स्वीकार   जिम्मेदारी । दिल  दया-करुणा का सागर , भरें उसमे सब अपनी  गागर ।। परीश्रम  की  होती  प्रतिमूर्ति , तन-मन मे  विद्धुत सी  फूर्ति । कुछ …

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आज के बदलते दौर में गीता के उपदेश कितने आवश्यक

श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश महाभारत युद्ध के दौरान योगेश्वर श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन को दिए थे।18 अध्यायों के 700 श्लोकों में निहित श्रीमद्भगवत गीता ग्रन्थ आज प्रतिदिन पढ़ने की आवश्यकता है।गीता अध्यात्म पथ पर चलना सिखाती है। निष्काम कर्म करने की राह बताती है। आत्मिक शांति चाहिए तो गीता के श्लोक अवश्य पढ़ना चाहिए। बढ़ते…

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