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महकता गुलाब

तुम्हारे कांटे भी तुमको बचा न पाएंगे, इतना मत महको लोग तोड़ के ले जाएंगे। प्यारी सूरत पै तुम्हारी न रहम खाएंगे, तुम्हारे अश्क किसी को नजर न आएंगे, तुम्हारा सीना छेद गूंथ लेंगे माला में, तुम्हारे घाव जरा भी नहीं सहलाएंगे। तुम्हारे दर्दे दिल को देव पर चढ़ायेंगे। इतना मत महको लोग तोड़ के…

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श्री लाल बिहारी “लाल” जी को जन्मदिन की बधाई

।। जन्म दिवस (10 अक्टूबर ) पर शुभकामना सन्देश।। साहित्य और समाज में अपना नाम रौशन करते रहे हमारे प्रिय मित्र, कवि गीतकार, पत्रकार, पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, सच्चे सलाहकार और लाल कला सामाजिक एवं सांस्कृतिक मंच के महासचिव भाई लाल बिहारी “लाल” जी अपनें जीवन के 48 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। हमारी साहित्यिक यात्रा के सहयोगी और…

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जीवन की रक्षा के लिए भी विकास के समांतर धरती को बचाने का संकल्प लेना होगा

विजय गर्ग सभ्यता की शुरुआत से ही प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध रहा है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन आज ऐसा लगता है कि इंसान को प्रकृति की उतनी रह गई है। इसमें दोराय नहीं कि पर्यावरण परवाह नहीं रह सिमटता नजर आ पर संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन…

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“बदला हुआ भारत: क्रिकेट और आत्मसम्मान का नया अध्याय”

“एशिया कप 2025 के फाइनल में भारत का रुख़ और खेल के मैदान से परे राष्ट्रीय गौरव की झलक” एशिया कप 2025 का फाइनल केवल क्रिकेट का खेल नहीं था। भारत ने पाकिस्तान को हराने के साथ ही ट्रॉफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि पुरस्कार देने वाला पाकिस्तान का प्रतिनिधि था। इससे प्रस्तुति…

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धर्मो रक्षति रक्षितः बनाम अहिंसा परमो धर्म: ; इस विजयदशमी दोनों आमने – सामने

“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।” लेख :- पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषणक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  यह  वर्ष खास है क्यूंकि दो अक्टूबर गाँधी जयंती और दशहरा दोनों एक साथ है। एक अहिंसा का प्रतीक है तो दूसरा धर्म के विजय अर्थात  हिंसा का। इस विजयादशमी पर संघ के 100 वर्ष पूर्ण…

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सभी को सद्बुद्धि दे मॉ जगदम्बे !

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव श्क्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि का त्यौहार पूरे देश में मनाया जा रहा है । हर एक सनातनी हिन्दु मॉ के नौ रूपों की पूजा कर अपने लिए सुख यमृद्धि का कामना करता है । ऐसा माना जाता है कि मॉ सभी की रक्षा करती हैं, दुष्टां को दंड…

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भगत सिंह: “इंकलाब से आज तक”

“क्रांति बंदूक की गोली से नहीं, बल्कि विचारों की ताकत से आती है।” भगत सिंह का जीवन केवल एक क्रांतिकारी गाथा नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रतीक है। उनकी शहादत से पहले उनके विचारों की ताकत थी, और उनकी शहादत के बाद भी उनका प्रभाव अमर है। आज जब हम आर्थिक असमानता, सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार…

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बुद्ध का सदियों का सफर

जैसे-जैसे बौद्ध दर्शन समय के साथ-साथ बदलता गया, वैसे-वैसे बौद्ध कला भी बदलती गई। परंपरा के शुरुआती दौर में, बुद्ध को कभी भी मानव रूप में नहीं दिखाया गया। बल्कि, उनकी उपस्थिति को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया। पैरों के निशान, एक बोधि वृक्ष या यहाँ तक कि एक साधारण पगड़ी – ये उनकी छवि…

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खुशी-एक सामूहिक जिम्मेदारी

“असफलता” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। सदियों से बुद्धिमान लोग यही कहते आए हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने स्पष्ट रूप से कहा था, “…असफलता का अर्थ है “सीखने का पहला प्रयास”। कलाम जी की इस परिभाषा को मुझसे बेहतर शायद कोई और व्यक्ति नहीं अपना सकता। 21वीं सदी की शुरुआत में अपने गृह…

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