डिजिटल युग में हिंदी : उमा त्रिवेदी
(14 सितंबर – हिन्दी दिवस पर विशेष) तकनीक की नई जुबां और बढ़ती पैठ”निज भाषा उन्नति अहै,सब उन्नति को मूल।बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल॥”“भारतेंदु हरिश्चंद्र”एक दौर था जब यह आशंका जताई जाती थी कि अंग्रेजी और आधुनिक तकनीक के बढ़ते वर्चस्व के बीच हिंदी कहीं पीछे न छूट जाए। लेकिन डिजिटल…
