पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी
अयोध्या रामचरित मानस का मुख्य केंद्र रहा है । यहां से भगवान राम की जीवन यात्रा प्रारम्भ हुई जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनने तक कई घटनाओं से होकर गुजरी। पूज्य बाबा तुलसीदास जी लिखते भी है जहां सुमति तह सम्पति नाना जहां कुमति तह विपती निधाना अर्थात वैभव तो सुमति और सत्कर्म के हिस्से में है किन्तु कुमति कलंक और अपयश लेकर आती है। अयोध्या का इतिहास अद्भुत है । यहाँ कर्मफल जरूर भोगना पड़ता है । सतयुग की अयोध्या नगरी में राजा दसरथ को अकारण श्रवण कुमार का श्राप झेलना पड़ा, मां सीता के बेवजह अपमान से शापित रही, लक्ष्मण को दुःख भोगना पड़ा, उर्मिला को पति विरह में जीना पड़ा, रघुकुल का विशाल सम्राज्य कलंक से घिरा रहा। राम निर्दोष थे पर 14 बरस के लिए वन गए कैकेई ने रावन के साम्राज्य पर विनाश की मुहर लगा दी । पर सीता निर्दोष थीं वे भी पति धर्म निभाते हुए वन गईं । लक्ष्मण भाई प्रेम में वन चले गए । राज्याभिषेक के बाद निर्दोष जानकी फिर वन गईं । श्राप अयोध्या की नियति है । कपिल मुनि के श्राप से 60 हजार सगर पुत्र भस्म हो गए थे । श्राप अयोध्या के भाग्य में है । 500 वर्ष पूर्व क्रूर आक्रांता बाबर एक कलंक बनकर अयोध्या में घुसा । यह कलंक अभी धुला ही था , मंदिर बना ही था पर श्रापों से मुक्ति कहां अयोध्या की ? कलयुग का अयोध्या भी इससे अछूता नहीं रहा, लगा था कि 500 वर्षों से उपेक्षित रामलला जिस दिन अपने भव्य प्रासाद में विराजमान हो जाएंगे , अयोध्या का शाप सदा सर्वदा के लिए समाप्त हो जाएगा । लेकिन आज जो घट रहा है , वह बताता है क्षीण हुए पुण्य अभी पूरी तरह शाप मुक्त नहीं हुए । अयोध्या ने निर्दोष से अन्याय किया और दोषी को क्षमा कर दिया। वैभव के लिए अयोध्या बना ही नहीं कभी। जहां न राम बिनु सद्गति होई उहाँ कहा कब सुखी बा कोई ।। दोष न दशरथ का था कोई न पितृ भक्त श्रवण कुमार का । उस समय के राजधर्म के अनुसार राजा दशरथ तो शिकार करने गए थे । उन्हें क्या पता था कि मातृ पितृ भक्त श्रवण कुमार अपने नेत्रहीन माता पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर आए हैं और नदी से जल भरकर उनकी प्यास मिटा रहे हैं ? सिंह समझकर बाण चलाया , निर्दोष श्रवण कुमार मारा गया । अंधे मां बाप ने भी यह कहते हुए दशरथ को शाप दिया कि जिस प्रकार पुत्र वियोग में तड़फ तड़फ कर हम मर रहे हैं , उसी तरह तुम भी मरोगे । दशरथ भी निर्दोष थे और श्रवण कुमार भी । तब कैकेई ने राम की शापित मृत्यु को वनवास में बदला और स्वयं वैधव्य स्वीकार किया । पहले आक्रांताओं ने जुल्म ढहाए , मंदिर बनने के बाद अब अपने ही कलंक बन गए । अयोध्या में चोरी किसी गैर धर्मावलंबी ने नहीं की , हिंदुओं ने की , ट्रस्टियों ने की । जिनको सौंपी थी अमानत वे ही ख़यानती निकले । घर को आग लग गई घर के चिराग से ? स्वाधीनता मिलने के बाद महात्मा गांधी ने कहा था कि उद्देश्य पूरा हुआ , कांग्रेस को भंग कर दो । कोई नहीं माना , आज हालत देख लीजिए । तो मंदिर बन जाने के बाद विहिप का काम खत्म ? विहिप क्यों कब्जा जमाए बैठी है ट्रस्ट पर ? मंदिर का एक उद्देश्य पूरा हुआ , अब विहिप वाले जाएं मथुरा काशी ? समय आ गया है जागे हिंदू समाज ? मंदिर बन गया है राम का नाम लेकर खुद ही प्रबंध संभाले हिन्दू समाज ? या फिर बनाइए सत्य सनातन न्यास ? मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या इन दिनों एक नए विवाद से घिर गई है। श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम मंदिर में चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोपों ने न सिर्फ ट्रस्ट की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि करोड़ों भक्तों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही दान पेटियों में नकद, सोना-चांदी और अन्य भेंट भी बढ़ी हैं। इसी बीच कुछ स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर यह आरोप लगा कि दान की गिनती और उसके रख-रखाव में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। कुछ कर्मचारियों पर चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप लगने के बाद मंदिर प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की और 2-3 लोगों को निलंबित भी किया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, तीन-स्तरीय गिनती और चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा ऑडिट की व्यवस्था है। ट्रस्ट का कहना है कि “भक्तों का एक-एक रुपया रामकार्य में ही लगेगा। मंदिर दर्शन को आए प्रयागराज के एक भक्त ने कहा, “हम मेहनत की कमाई भगवान को चढ़ाते हैं। अगर उसमें भी गड़बड़ होगी तो फिर कहां जाएं? वहीं विश्व हिंदू परिषद के एक पदाधिकारी ने मांग की कि दान की दैनिक आय को वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए ताकि कोई संदेह न रहे। पहले जिला प्रशासन का कहना था कि अभी तक पुलिस में कोई बड़ी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है बाद में आठ लोगो पर मामला दर्ज हुआ । छोटे स्तर की शिकायतों पर कार्रवाई की गई है। एसएसपी ने बताया, “मंदिर की सुरक्षा और चढ़ावे की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। धर्म और कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसे बड़े धार्मिक स्थलों पर पारदर्शिता सबसे बड़ा हथियार है। आस्था के साथ पैसा जुड़ते ही जवाबदेही भी बढ़ जाती है। ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने से यह कलंक अपने आप धुल जाएगा। ट्रस्ट ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में दान के लिए क़्यू आर कोड, ऑनलाइन रसीद और मासिक आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाएगा। साथ ही गिनती के समय भक्तों के प्रतिनिधियों को भी बुलाने पर विचार चल रहा है। राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। यहां किसी भी तरह का विवाद सीधे जनभावना से जुड़ता है। अब जरूरत इस बात की है कि पारदर्शिता और सख्ती से इस “कलंक” को धोकर अयोध्या को फिर से आदर्श के रूप में स्थापित किया जाए।
