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ई-चालान, ई-स्मार्ट मीटर और महंगे एजुकेशन सिस्टम से परेशान जनता

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

टेक्नोलॉजी का उपयोग और दुरूपयोग अपनी जगह है पर सरकारी तंत्र में टेक्नोलॉजी ने हड़कंप मचा दिया है। इस ट्रिपल ई ने आम जनता के नाक में दम करके रख दिया है। जहां एक तरफ भागती दौड़ती जिंदगी में लोगों को सुकून नहीं वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी के प्रयोग ने शिक्षा चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों को बुरी तरह चपेट में ले रखा है। आपने देखा होगा कि अभी सभी बोर्डो के हाईस्कूल के परीक्षा परिणाम नहीं आए हैं लेकिन निजी स्कूलों ने एडमिशन के नाम पर जो हड़कंप मचा रखी है वह ना सिर्फ प्रताड़ना है बल्कि सरकारी आदेशों की धज्जियाँ उड़ाता एक खुला लूटतंत्र है। आम जनता को यह सोचना पड़ेगा कि उनके द्वारा चुनी सरकारें क्या चिकित्सा, शिक्षा और सरकारी तंत्रो  को दुरुस्त करने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर पा रही हैं ! यदि आप इन प्रश्नों के जवाब ढूंढेंगे तो आपको उत्तर ना में मिलेगा क्योंकि अगर आप बात चिकित्सा की करें तो सामान्य जेनेरिक दवाएं जिनकी लागत मूल्य औसतन  8 से ₹10 प्रति दस टेबलेट होती है होती है वह आज मेडिकल क्षेत्र के बाजारों और निजी चिकित्सको के डिस्पेंसरी में 200 से 250 रुपए प्रति दस टेबलेट के दाम पर बेची जा रही जिसमें मेडिकल एजेंसी और डॉक्टर का कमीशन बना हुआ है। इन महंगी दवाओं और निजी अस्पतालो के काउंटर पर कब कार्यवाही हुई !

एक अच्छा डॉक्टर जो प्रतिदिन 100 से 200 मरीज देखते हैं वह मरीज से कैश फीस के रूप में 500 से ₹800 वसूलते हैं, उनके महीने की कमाई कैश में 10 से 12 लाख होती है जिसका न कहीं कोई रिकॉर्ड होता है ना कोई टैक्स  होती है। इस तरह यह  ब्लैक मनी कहां जा रही इस पर सरकार ने कभी कोई कार्यवाही नहीं की। जबकि कायदे से देखा जाए तो डॉक्टर के इस लूट की  मानसिकता पर लगाम लगनी चाहिए। डॉक्टर को फीस वसूलने की छूट न देकर सरकारी इसे अपने नियंत्रण में रखें और निजी डॉक्टरों को भी मरीज देखने की एवज में महीने का वेतन निर्धारित कर दें। ठीक यही हाल शिक्षा में भी है पहले जो एडमिशन जुलाई महीने में होते थे वह आज  अप्रैल महीने में और कुछ स्कूलों में तो जनवरी और फरवरी में होने लगे हैं, जबकि हाईस्कूल और उसके निचली कक्षाओ के परिणाम मई में आते हैं फिर एड्मिशन पहले कैसे। क्या यह गलत तरीका नहीं  है। वाराणसी के कई स्कूलों के एडमिशन तो फरवरी माह में ही क्लोज हो जाते है आखिर शिक्षा विभाग कर क्या रहा..!  इस तरह से देखा जाए तो यह सरकारी तंत्र की लापरवाही और लूट के लिए दी गई खुली छूट है जिसे  सरकार नियंत्रित नहीं कर पा रही। निजी स्कूलों ने मनमानी रेट पर किताबों के दाम ट्यूशन फीस के नाम पर बीस से ₹ पचास  हजार,   ड्रेस किताबें इत्यादि की दुकान सजा के लूट।  इन सब के द्वारा आम जनता को केवल लूटा जा रहा  है । सरकारी जल्द ही इन पर नियंत्रण नहीं कर पायी तो आम जनता सड़को पर उतर कर तख्ता पलट कर देगा। जातिवाद के चक्कर में फंसी  सरकारों के लिए मुश्किलें खड़ा होती दिख रही। हाल ही में स्मार्ट मीटर सिस्टम ने भी आम जनता की कमजोरी का फायदा उठाया है। बिजली की गति से ज्यादा  बिल देना गलत है । एक तरफ जहां मैन्युअल मीटर में बिजली का बिल नियंत्रित होता था वही स्मार्ट मीटर में बेतहाशा भागता मीटर बिल कोर्ट में बिजली विभाग और सरकार की कम किरकिरी नहीं कराई है। बिजली विभाग उसे पर सफाई देते बचाव के लिए आगे आया किंतु बात नहीं बनी अब क्योंकि हाई कोर्ट ने इस मसले पर रख स्पष्ट कर दिया फिर भी लोगों से जबरदस्ती स्मार्ट मीटर का किराया वसूला जाना भी अनैतिक माना जा रहा ऐसे में सिग्नल और पुलिस की वसूली भी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है ई चालान के माध्यम से गलत चालान बनना और चौराहो पर जबरन वसूली से भी जनता में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। एक ताज़ा मामला शाहजहाँपुर के थाना मिर्ज़ापुर पुलिस का है जिसमें घर पर खड़ी ‘कार’ का कटा चालान । कार को बाइक दिखाकर ‘बिना हेलमेट’ का काटा चालान अब चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर  प्रदेश के जनपद शाहजहाँपुर ट्रैफिक पुलिस का ‘स्मार्ट’ ई-चालान सिस्टम जो आये दिन लोगों को परेशान किया जाता है, तो वहीं ताज़ा मामला शाहजहाँपुर जनपद के थाना मिर्ज़ापुर पुलिस का है, जिसके द्वारा एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जोकि ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मिडिया पर एक दावे के अनुसार शाहजहाँपुर जनपद के थाना बंडा क्षेत्र निवासी रोहित शुक्ला की चार पहिया गाड़ी का चालान ‘बिना हेलमेट’ वाहन चलाने के आरोप में काट दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है, कि जिस समय का यह चालान कटा है, उस वक्त ये कार पीड़ित के घर के दरवाजे पर खड़ी हुई थी, कार संख्या (UP27P2713) पीड़ित के घर पर कई महीनों से खड़ी हुई है। लेकिन उसके बाबजूद पीड़ित के मोबाइल पर अचानक एक मैसेज आता है, मैसेज ई चालान का होता है, ई चालान का मैसेज देख परिवार के होश उड़ गए। जब ऑनलाइन चालान की कॉपी (संख्या: UP295915260109165008) चेक की गई, तो उसमें चौंकाने वाली चीजें सामने आई आधिकारिक रिकॉर्ड में वाहन “मोटर व्हीकल एलएमबी” दर्ज है, जबकि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने को लेकर चालान काटा गया है, जिसमें 1000 का शमन शुल्क लगा है । चालान के साथ संलग्न तस्वीर में साफ देखा जा सकता है, कि एक व्यक्ति नीले रंग की बाइक पर सवार है, और उसने हेलमेट नहीं पहना है, लेकिन चालान कार के नंबर पर काट दिया गया लेकिन बिना जांच-पड़ताल के कार मालिक के नाम चालान जारी कर देना पुलिस विभाग की कार्यशैली पर एक सवालिया सवाल उठाता है। वहीं पीड़ित का कहना है, कि पुलिस की इस “कार्यशैली” की वजह से लोगों को परेशान किया जा रहा है, साथ ही बगैर गुनाह किए गुनहगार बनाया जा रहा है, क्योंकि अब, यूपी पुलिस कार चलाने वालों को भी ज़बरदस्ती हेलमेट पहना रही है ।

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