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सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
आप सभी को भारतीय संस्कृति के महान पर्व पंच दिवसीय महोत्सव की बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं। धन तेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा के साथ भाई-बहन के पवित्र पर्व भाई-दूज, ये सब पंच दिवसीय महोत्सव के अंग हैं।गोवर्धन पूजा एवं भाईदूज नवम्बर में (2-3) मनाएंगे। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में लोग अपने…
सामाजिक गमलों में बोन्साई से उगते हमारे कर्म
(पंकज सीबी मिश्रा, मिडिया विश्लेषक / पत्रकार जौनपुर यूपी ) यह विश्वास किया जाता है कि हमारे कर्म हमारे अगले जन्म को निर्धारित करते हैं। हमें नफरत और द्वेष से दूर रहकर प्रेम और सद्भाव को अपनाना चाहिए। हमें नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। कर्मों का प्रभाव हमारे वर्तमान जीवन पर पड़ता है। सकारात्मकता का…
सूखे आंगन की दीवारी : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
(राजनीतिक सफरनामा ) दीपमाला से कांक्रीट के आंगन सज चुके हैं और सीमेन्ट की मोटी-पतली दीवालों पर भी लाइटिंग जगमगा रही है । अब यही तो प्रदर्शित करती है कि दीपावली का त्यौहार आ चुका है । ऊंची-ऊची बिल्डिंगों पर रोशनी जगमग हो रही है, उनके परिवार के मुस्कुराते हुए चेहरों पर और पा लेने…
यम द्वितीया का पौराणिक महत्व
भारत त्योहारों का देश है। हिंदू धर्म में सभी त्योहारों का कोई ना कोई पौराणिक महत्व होता है ।सभी त्योहार किसी न किसी घटना से संबंधित होते हैं। कभी -कभी घटनाएं परंपराएं बन जाती है। सतयुग से कलयुग तक हिंदू धर्म में कई परंपराएं आज भी ज्यों कि त्यों चली आ रही हैं। आज भी…
कितना बदल गया इंसान’ (सम्पादकीय)
संपादक मनमोहन शर्मा ‘शरण’ अक्टूबर माह का प्रारंभ भारत की दो महान विभूतियों की जयंती से हो रहा है। 2 अक्टूबर एक और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती दूसरी ओर सादा जीवन उच्च विचार की सर्वोत्तम मिसाल भूतपूर्व प्रधानमंत्री लालबहादूर शास्त्री जी की भी। तिथि दो महानविभूतियाँ भी दो, जिन्होंने ना सिर्फ भारत अपितु…
सावधान सावधान वोटर मौन है ! -कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
चुनाव चल रहे हैं भले ही केवल दो राज्यों के चनाव हों पर माहौल वैसा ही है, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप वाला । वैसे ऐसी अंत्याक्षरी न हो तो मजा भी नहीं आता, हमें भी आदत सी बन गई है । चुनाव घोषित होने के पहले ‘‘तू चल मैं आया’’ वाले आवागमन को देखने की…
प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञान भिक्षु’ अब बने हैं डां प्रेम भारद्वाज
प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञान भिक्षु ‘ को USA के विश्वविद्यालय ग्लोबल इन्टरनेशनल विश्वविद्यालय, अमेरिका से मिली, De lit ,, Doctorate honorary causa and Honorary Doctorate ,, In में Doctor of philosophy in Social work अब बने हैं डां प्रेम भारद्वाज जिसे विश्वविद्यालय ने दिनांक 22 सितम्बर 2024…
प्रकाश शिन्दे की ‘आस-प्रयास’ दिखाती है कि दुनिया में अच्छे लोग भी हैं
(ग्वालियर हलचल सम्पादक प्रदीप मांढरे से ‘आस प्रयास’ नाटक के लेखक श्री प्रकाश शिंदे की विशेष वार्ता)प्रदीप मांढरे ग्वालियर हलचल ग्वालियर, 19 सितम्बर। 50 वर्षीय प्रकाश शिन्दे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर में कार्यरत हैं। पिछले 10 साल से वह अपनी कैंसर पीड़ित पत्नी के इलाज में दिन- रात एक कर रहे थे । दुर्भाग्य से…
संस्कारों का विकास
कुणाल के दोस्त का जन्मदिन था। वह सुबह से ही पापा के पीछे लगा हुआ था क्योंकि दोस्त के जन्मदिन में जाने के लिए अच्छा सा गिफ्ट भी तो चाहिए था ना। पापा उसे बाजार ले गए और एक साधारण सा गिफ्ट उसे दिलवा दिया। कुणाल को अच्छा नहीं लगा। इधर उसने देखा,पापा खूब सारी…
किंकर्तव्यमूढ़ समाज के चारों तरफ क्यों जमी है धुंध.!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी हम वही देखते है जो हमें दिखाया जाता है जबकि वास्तविक चित्र अब भी धुंधला है और धूर्त नेता इस चित्र के आगे कुंडली मार बैठे है। आपको समाज का सबसे निकृष्ट व्यक्ति साबित करने में इन्हे केवल दो मिनट लगता है जबकि इनका वीआईपी कल्चर…
