Special Article
बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।
जीवन में सफल होने के लिए धैर्य रखना और अपने सपनों के लिए समर्पित रूप से कड़ी मेहनत करना महत्वपूर्ण है। जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं है, और इसलिए हमें जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए अपने सभी प्रयास करने और अपनी सीमाओं को चरम तक पहुंचाने की जरूरत है। इसके अलावा,…
पर्यटन ,दर्शनीय स्थलों पर जाकर सुकून महसूस करें
मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के धार जिले के विकासखंड बाग़ के समीप लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर 5 वी -7 वी सदी में निर्मित 12 बौद्ध गुफाएं है । इनकी बनावट अजंता -एलोरा ,श्रीलंका ,बौद्ध गुफा की लगभग एक समान है । गुफाओं में मूर्तियां ,लाइट रिफ्लेक्टिंग पेंटिंग आकर्षकता का केंद्र है ।यहाँ पर…
पुराने हांडी में नया चावल पका रहें धनाढ्य नेता .!
बहुत पुराने वक्त से हम सुनते आ रहे हैं कि जनतंत्र, जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन होता है। जनतंत्र में जनता होती थी, सरकार होती थी, चुनाव होते थे, नीतियां होती थी, संसद और विधायकाऐं होती थीं, जिनमें जनता द्वारा सरकार को चुना जाता था। सरकार जनता के कल्याण के…
जोशीमठ की डरावनी तस्वीर
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव जोश जोशी मठ की तस्वीरें सभी को डरा रही हैं । मकानों में पड़ती दरारें और सम्पूर्ण क्षेत्र का धीरे-धीरे जमीन में धंसते जाना भय तो पैदा करेगा ही । हजारों घर इसकी चपेट में आ चुके हैं और संभव है कि यह संख्या इससे भी अधिक हो जाए । नए साल…
स्वार्थों के लिए मनुवाद का राग -प्रियंका सौरभ
मनुस्मृति या भारतीय धर्मग्रंथों को मौलिक रूप में और उसके सही भाव को समझकर पढ़ना चाहिए। विद्वानों को भी सही और मौलिक बातों को सामने लाना चाहिए। तभी लोगों की धारणा बदलेगी। दाराशिकोह उपनिषद पढ़कर भारतीय धर्मग्रंथों का भक्त बन गया था। इतिहास में उसका नाम उदार बादशाह के नाम से दर्ज है। फ्रेंच विद्वान…
नव आंग्ल वर्ष के अवसर पर हमारा विचारवाद !
यूपी में रहते हुए और लगभग तीन दशकों तक कभी कभार ही इधर उधर की यात्रा करते हुए मैं इस भूमि से लगभग कटा रहा। किन्तु भारत के इस बड़े राज्य इस भूमि को समझने का माध्यम-स्थल हो सकते हैं। दृष्टि होनी चाहिए। यहां के नगर न्यूयॉर्क जैसे नगर नहीं हैं। न्यूयॉर्क में अमीरी गरीबी…
नये साल का रोचक इतिहास
लाल बिहारी लाल नव वर्ष उत्सव मनाने की परंपरा 4000 वर्ष पहले बेबीलोन(मध्य ईराक) से शुरु हुई थी जो 21 मार्च को मनाया जाता था, पर रोम के शासक जुलियस सीजर ने ईसा से 45 ई. पूर्व जूलियन कैलेंडर की स्थापना विश्व में पहली बार की तब ईसा पूर्व इसके 1 साल पहले का वर्ष…
ये हितैषी बच्चियों के
भगवती प्रसाद गेहलोत अलसुबह कड़कड़ाती ठंड में धुंध अपनी चादर समेटने की मशक्कत कर रही थी । मैले-कुचले कपड़े व अधफटे चप्पल बिखरे बाल लिए दो बच्चियाँ अपने डेरे से सीधे उठकर झोला लिए बस स्टैंड आती है रात्री को भजन संध्या में फैंके गए झूठन वाले कचरे के ढेर से पन्नियाँ, प्लास्टिक, कुछ…
छोटी सी मुलाकात उपहार बन गयी
फिल्म डायरेक्टर श्री अशोक त्यागी जी से अद्भुत भेंट जी हाँ आदरणीय मित्रो फिल्म एक्टर / डायरेक्टर अशोक त्यागी जी से 3-4 बार फ़ोन पर बात हुई , मिलने की जिज्ञासा दोनों को थी कल शनिवार (पालिका केंद्र, कनाट प्लेस) में समय निश्चित हुआ और सहृदयता से भेंट हुई, उनको उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र)…
वर्तमान परिपेक्ष्य में साहित्यकारों की भूमिका
अक्षत श्रीवास्तव हम यथार्थवादी युग में प्रवेश कर चुके हैं । कल्पनाओं में अब हम नहीं जी सकते । सभी को हकीकत का दर्शन चाहिये । हम कल्पनाओं में नहीं जी सकते । हमारी कल्पनायें भी बेरंग हो चुकी हैं । हमें यथार्थ ही चाहिए । यथार्थ याने कड़वी दवा जिसके मीठेपन में भी कसैलापन…
