Special Article
सरकार के गलें की फांस ना बन जाए बेरोजगारी !
वर्तमान समय में केंद्र सरकार महंगाई , बढ़ते पेट्रो कीमतों और गिरती अर्थव्यवस्था पर जनता की आलोचना झेल रही । केंद्र सरकार ने जिस हिंदुत्व के मुद्दों पर बंगाल चुनाव अभियान शुरू किया था उस वहा की जनता ने नकार दिया क्युकी मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ और महंगाई के मार से दबा आम…
एक थी सुमन… (स्टबर्न बट काइंड, लविंग बट फ़ेयर)
(राजसभा डाइरेक्टर, अंग्रेज़ी की प्रोफेसर, अप्रैल 4, 1956-जून 27-2020) बिहार भागलपुर के एक छोटे से गाँव कमलपुर में पैदा हुई सुमन माला ठाकुर , मध्यमवर्गीय एक आम परिवार में ४ एप्रिल १९५६ में पैदा हुई जहां नातो पैसा था ना ही लड़कियों के लिए शिक्षा का महत्व। ऐसे में सुमन के दादा बिंदेश्वरी प्रसाद ठाकुर…
पर्यावरण संरक्षण में जनभागिदारी जरुरी – लाल बिहारी लाल
जब इस श्रृष्टि का निर्माण हुआ तो इसे संचालित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों का एक सामंजस्य स्थापित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवोके बीच एक परस्पर संबंध का रुप प्रकृति ने दिया जो कलान्तर मे पर्यावरण कहलाया।जीवों के दैनिक जीवन को संचालित करने के लिए उष्मा रुपी उर्जा की जरुरत होती है। और…
कुर्सी की लालसा में सियासी हलचल
राजनीतिक सफरनामा (कुशलेन्द्र श्रीवास्तव) देश के कई राज्यों में हलचल है । यह हलचल कुर्सी के लिए है । समाजसेवा का लबादा ओढ़कर सत्ता के रसगुल्ले खाने की लालच से ग्रसित कतिपय लोगों ने लोकतंत्र को मजाक बनाकर रख दिया है । पश्चिम बंगाल में मुकुन्द राय ने टीएमसी के सत्ता पर काबिज होते ही पाला…
जलजला आता है निशां छोड़ जाता है (सम्पादकीय)
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) बहुत दिनों के बाद फिर से सुनने को मिला है कि ‘कोरोना’ संक्रमण की गति धीमी हुई है और संक्रमितों की संख्या में काफी कमी देखी गई है । प्रतिदिन लाखों में संक्रमितों की संख्या अब 50–60 हजार के आसपास आ रही है । किन्तु फिर एक बार हम सबको…
राम प्रसाद बिस्मिल
(11 जून, 1897 से 19 दिसंबर, 1927) प्रारंभिक जीवन :- राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून, 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मुरलीधर और माता का नाम श्रीमती मूलमती था। जब राम प्रसाद सात वर्ष के हुए तब पिता पंडित मुरलीधर घर पर ही उन्हें…
मदर टेरेसा : ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’
जिंदगी उसी की जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे।यूं तो हर शख्स आता है दुनिया में मरने के लिए।। हां वैसे तो बहुत सारे लोग आते हैं और चले जाते हैं पर याद वहीं रहते हैं जिन्होंने इस देश को अपनी एक अलग छवि दी है, अपना एक अलग रूप दिया है, अपनी एक अलग…
एलोपैथ का टूटता तिलिस्म, आयुर्वेदिक काढ़ा बना लाईफलाइन !
आयुर्वेदिक संस्था के रूप में पतंजलि आज वर्तमान समय में सर्वाधिक प्रचलित प्रतिष्ठान है जो भारत के एलोपैथ को तगड़ा टक्कर दे रहा । भारत समेत वैश्विक व्यापार और बाजार में पतंजलि आयुर्वेद का सबसे अग्रणी निर्यातक है । अभी हाल ही में बढ़ते करोना संकट में जहां एक तरफ एलोपैथ से सुसज्जित हाईटेक अस्पतालों…
जाना कहाँ है जब हर तीर्थ यहाँ है
कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्तंभकार – उत्कर्ष मेल) मौसम ख़ुश्क,हर सू धुँआ-धुँआ है असामयिक विदाइयाँ,सदी का बयाँ है क्रंदन मुखरित,आज ख़ामोश हर ज़ुबाँ है मानव गंतव्य भ्रमित,नकारात्मकता जवाँ है चंद धड़कनों की तलब में,प्यासा हर रोआँ है ✍️ आज हर तरफ, हर दिल की अशाँति के मुखरित पन्नों पर ओम शाँति के हस्ताक्षर दर्ज़ हो रहे…
बिपिन चन्द्र पाल
(Bipin Chandra Pal) (07 नवंबर, 1858 से 20 मई, 1932) प्रारंभिक जीवन :- बिपिन चन्द्र पाल का जन्म 07 नवंबर, 1858 को अविभाजित भारत के हबीबगंज जिले में (अब बांग्लादेश में) पोइल नामक गाँव में एक संपन्न घर में हुआ था। उनके पिता रामचंद्र पाल एक पारसी विद्वान और छोटे ज़मींदार थे। उन्होंने ‘चर्च मिशन…
