Special Article
अभी कोरोना काल ही है।
विगत वर्ष कोकोरोना वर्ष कानाम देकर उससे सम्बन्धित सारे दस्तावेजों कोसहेजकर रखना चाह रहे थेकिआवश्यकता पड़ने परउसे उलट पुलट करउसकी भयावहता की कल्पना कर लेंऔर आगामी किसी प्रकार के वायरल प्रकोपों में उसका तुलनात्मकअध्ययन कर सकें, और वह इतिहास मे अंकित व्यथा गाथा हो जायकि अचानक कोरोना ने पुनःदुगुने चौगुने वेग से साँसें लेनी शुरु…
हाहाकार का जिम्मा कौन लेगा ? ? ?
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) फरवरी 2021 आते आते भारत में कोरोना की पहली लहर मानो शांत सी हो चली थी और लगने लगा था कि अब जल्द ही ऐसा भी समय आएगा जब देशवासी खुली हवा में बंधन मुक्त होकर श्वांस लेंगे और फिर वही मिलने–जुलने का माहौल बनेगा और समारोह–जलसे आदि में भाग…
राष्ट्रीय लूट प्रबन्धन में हम कितने अव्वल !
कोरोना जैसी महामारी में भी हमने जितना लूटते बना हमने लूटें कभी डॉक्टर बनकर तो कभी पुलिस बनकर , कभी व्यापारी बनकर तो कभी सस्ते गल्ले का दुकानदार बनकर । सरकारे ने भी आम जनता को लूटने में कोई कोर कसर नही छोड़ी । विश्व का सबसे बड़ा नोटतांत्रिक देश भारत बन ही गया ,जहां…
मानवता को प्रणाम : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
भारत में कोरोना विस्फोट चरम पर है, 3–80 लाख के लगभग मामले एक दिन में आना अपने में भयावह है किन्तु साथ ही ठीक होने वालों की संख्या भी 2–97 लाख के लगभग है, जो बाकी देशों की तुलना में संतोषजनक है । इस बार कोरोना की सूनामी युवाओं को अ/िाक चपेट में ले रही…
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहें सवाल, जिम्मेदार मौन !
कोरोना जैसी भयंकर महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की कलई खोल दी है । पुराने और बिल्कुल जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं निरीह और बेबस नजर आ रही । प्राइवेट चिकित्सालय चुप्पी साध चुके है । सुनने में तो यहां तक आ रहा कि प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को भर्ती तक लेने से…
तेरी रचना का ही अंत हो न
(कविता मल्होत्रा) कैसी विडँबना है, हर कोई अपनी-अपनी स्वार्थ सिद्धि की चाहत लिए अपना स्वतंत्र आकाश चाहता था और आज अधिकांश लोगों को दो गज ज़मीन भी नसीब नहीं हो रही। अभिव्यक्ति की आज़ादी वाले देश में तमाम सीमाएँ लाँघने वाली समूची अवाम का अपनी भाषा पर ही अधिकार नहीं रहा, जो निशब्द होकर कोष्ठकों…
गीत और ग़ज़ल को ऑक्सीजन देने वाला वट वृक्ष चला गया
सज्जनता, विनम्रता, सरलता और बड़प्पन सिखाना है तो डॉ. कुंअर बेचैन से सीखें। इतना बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद भी कोई अहम नहीं पला। गीत के शलाका पुरुष और ग़ज़ल के उस्ताद डॉ. कुंअर बेचैन अति विशिष्ट श्रेणी में आते थे। वे अत्यंत विद्वान और सतत् विचारशील थे। मैंने, उनके कवि सम्मेलनों के उनके…
भारत – हमारा गर्व : सीमा तंवर
भारत एक शानदार देश रहा है जिस पर हमे सदा गर्व रहेगा दुनिया ने इस बहुमूल्य हीरे को कई बार परखा भी और हर बार जी भर कर इसके खजाने से अपनी झोली भर ली . बड़े ही दुःख की बात है की एक आम भारतीय ही कुछ ज़हरीले लोगो की साजिश के कारन अपने …
कोरोना अवसाद में “संगीत” संजीवनी*
दुनिया के बड़े से बड़े शहर आज सुनसान हैं। लोग घरों में कैद हैं, तनाव में हैं और परेशान हैं। सोशल मीडिया से लेकर टेलीविजन, न्यूज चैनलों पर चल रहे नकारात्मक दृश्य व घटनाएं लोगों को विचलित और उदास महसूस करा रहे हैं। इस स्थिति में गायन एवं कला से जुड़े लोगों का कहना है…
महारोग कोरोना नियन्त्रण के कतिपय उपाय
हम सभी व्यक्तिगत अनुभव तथा समाचार संचार माध्यमों के द्वारा नित्यप्रति कोरोना महारोग के बढ़ते प्रकोप , भयावहता तथा घातकता से परिचित है. इसकी विस्तृत विवेचना की आवश्यकता नहीं है. देश का विशाल भूखण्ड इस महदापदा से ग्रस्त है. जीवन का प्रत्येक क्षेत्र तथा क्रिया कलाप अस्त व्यस्त तथा बाधित हैं. इस अभूतपूर्व विकराल संकट…
